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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट का जिला अदालतों, हाईकोर्ट में जजों के पद बढ़ाने की याचिका पर विचार करने से इंकार
Tue, 29 Nov 2022 09:08 PM IST
Jeet Kumar
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Tue, 29 Nov 2022 09:08 PM IST
सार
मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि अधिक न्यायाधीशों की नियुक्ति करना इसका हल नहीं है। आपको अच्छे जजों की जरूरत है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Social Media
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जिला अदालतों और हाईकोर्ट में जजों के पद बढ़ाने की एक जनहित याचिका पर विचार करने से इंकार कर दिया। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से केंद्र और सभी राज्यों को अधीनस्थ न्यायपालिका और उच्च न्यायालयों में लंबित मामलों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए न्यायाधीशों की संख्या दोगुनी करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
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मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि अधिक न्यायाधीशों की नियुक्ति करना इसका हल नहीं है। आपको अच्छे जजों की जरूरत है। मुख्य न्यायाधीश ने वकील अश्विनी उपाध्याय को अपनी जनहित याचिका वापस लेने को कहा।
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जैसे ही वकील अश्विनी उपाध्याय ने अपनी दलीलें कोर्ट के सामने रखना शुरू कीं तो पीठ ने कहा कि इन लोकलुभावन उपायों और सरल समाधानों से इस मुद्दे को हल नहीं किया जा सकता है। वहीं सीजेआई ने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय में 160 भरे जा सकते हैं तो जनहित याचिका के अनुसार 320 पद होने चाहिए।
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वकील ने अपनी दलील में कहा कि देश में लगभग पांच करोड़ लंबित मामलों से निपटने के लिए न्यायाधीश-जनसंख्या अनुपात को काफी हद तक बढ़ाया जाना चाहिए। इसके बाद उन्होंने अमेरिका का उदाहरण दिया जहां न्यायाधीश-जनसंख्या अनुपात भारत की तुलना में कहीं बेहतर है।