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मुंबई पुलिस: परमबीर सिंह को अब ठाकरे सरकार देगी दूसरा झटका! किसके गले की फांस बनेंगे ये '96 घंटे'
Wed, 24 Mar 2021 06:14 PM IST
Harendra Chaudhary
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Wed, 24 Mar 2021 06:14 PM IST
सार
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 20 मार्च को मनसुख हत्या मामले की जांच एनआईए को सौंपी थी। पहले इस केस की जांच मुंबई एटीएस के पास थी। इस मामले को लेकर एनआईए ने ठाणे की अदालत में याचिका लगाई है। उसमें कहा गया है कि मनसुख केस की फाइल एनआईए की जांच टीम के हवाले कर दी जाए...
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परमबीर सिंह
- फोटो : ANI
विस्तार
मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त परमबीर सिंह की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा है कि वे बॉम्बे हाईकोर्ट में अपनी याचिका दायर करें। अमर उजाला डॉट कॉम ने मंगलवार को इस मामले में जब एक पूर्व आईपीएस से बात की थी, तो उन्होंने साफतौर पर कह दिया था कि परमबीर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से सीबीआई जांच की मांग कर खुद को मुसीबत में डाल लिया है। उन्हें मुंबई पुलिस के मुखिया रहते हुए इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए थी, लेकिन उस वक्त वे चूक गए।
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जब परमबीर सिंह को मुंबई पुलिस कमिश्नर के पद से हटाया गया, तो उन्होंने गृह मंत्री अनिल देशमुख पर धन उगाही का आरोप लगा दिया। अब '96' घंटे बाद भी मुंबई एटीएस ने मनसुख केस की फाइल एनआईए को नहीं सौंपी है। फाइल सौंपने में हो रही देरी किसके गले की फांस बनेगी, ये बहुत जल्द सामने आएगा।
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जानकारों का कहना है कि ठाकरे सरकार परमबीर सिंह को दूसरा झटका दे सकती है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा, परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर जिस तरह के आरोप लगाए हैं, वे बेहद गंभीर हैं। सर्वोच्च अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस सुधार पर दिए गए कोर्ट के फैसलों को अभी तक लागू नहीं किया गया है। पुलिस सुधार का मुद्दा तभी उठता है, जब किसी केस को लेकर राजनीतिक सिस्टम में ज्यादा उथल-पुथल होती है।
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पूर्व आईपीएस प्रदीप कुमार भारद्वाज ने भी यही बात कही है। उनके मुताबिक, पुलिस सुधारों को लेकर धर्मवीर कमीशन की रिपोर्ट अभी तक लागू नहीं की गई। यह रिपोर्ट तो अस्सी के दशक में दे दी गई थी। सरकार ने इस रिपोर्ट के हल्के-फुल्के सुझाव तो लागू कर दिए, मगर अहम बातों को नजरअंदाज कर दिया। सबसे अहम बात, पुलिस में आला पदों पर होने वाली नियुक्तियों और तबादलों के लिए एक ऐसा मेकेनिज्म अपनाया जाए, जिसमें राजनेताओं का हस्तक्षेप न हो। वह प्रक्रिया पूरी तरह गैर-राजनीतिक रहे। इस अहम सिफारिश को लागू करने से सभी सरकारों ने गुरेज किया। नतीजा, मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह केस में सुप्रीम कोर्ट को पुलिस सुधारों पर गंभीर टिप्पणी करनी पड़ी।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 20 मार्च को मनसुख हत्या मामले की जांच एनआईए को सौंपी थी। पहले इस केस की जांच मुंबई एटीएस के पास थी। इस मामले को लेकर एनआईए ने ठाणे की अदालत में याचिका लगाई है। उसमें कहा गया है कि मनसुख केस की फाइल एनआईए की जांच टीम के हवाले कर दी जाए। हालांकि एटीएस ने इसका विरोध किया है। एटीएस का कहना है कि वह इस केस को सुलझाने के बहुत करीब है। एपीआई सचिन वाजे 25 मार्च तक एनआईए की हिरासत में है। पिछले सप्ताह एटीएस ने भी ठाणे कोर्ट में वाजे को प्रोडेक्शन वारंट पर लेने के लिए याचिका दी थी। उस पर अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है।
एटीएस का कहना है कि उसे राज्य सरकार से फाइल सौंपने का आदेश नहीं मिला है। कई दिन बीत चुके हैं और ऐसे में केस से जुड़े कई अहम सबूत, उपकरण और दूसरी संदिग्ध वस्तुओं के छेड़छाड़ संभव है। एटीएस का कहना है कि कारोबारी मनसुख हीरेन की मौत का केस तकरीबन सुलझा लिया गया है। इस केस से जुड़े तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें दो ऐसे सिपाही भी शामिल हैं, जो निलंबित हैं। तीसरा आरोपी एक सटोरिया बताया गया है।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के तेज तर्रार अधिकारी रहे अशोक चांद का कहना है कि जब केंद्रीय गृह मंत्रालय आदेश जारी कर देता है तो संबंधित एजेंसी को तुरंत सभी दस्तावेज दूसरी जांच टीम को मुहैया करा देने चाहिए। किसी भी मामले की जांच में देरी ठीक नहीं रहती। हालांकि इस मामले में एपीआई सचिव वाजे पहले से ही एनआईए की हिरासत में है। एनआईए दोबारा से इस केस की जांच करेगी। इस केस में न्यायिक प्रक्रिया को फॉलो किया जा रहा है।
एनआईए के पास यह विकल्प भी है कि वह केस से जुड़े दस्तावेज लेने के लिए कोर्ट में जा सकती है। इस बाबत याचिका लगाई गई है। ऐसा संभव है कि मुख्य आरोपी के हिरासत में होने के कारण दस्तावेज सौंपने में देरी हो रही हो। आरोपी की हिरासत अवधि खत्म होते ही दस्तावेज दिए जा सकते हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी के एक अधिकारी बताते हैं, इस केस में अब परमबीर सिंह पर संकट आ सकता है। जिस तरह से एक दिन पहले मुंबई क्राइम ब्रांच से दर्जनों कर्मी इधर-उधर किए गए हैं, उसका कुछ मतलब है। महाराष्ट्र सरकार, परमबीर सिंह के खिलाफ सबूत एकत्रित कर रही है। वे सबूत न केवल मौजूदा केस से जुड़े हैं, बल्कि वे उनके अतीत को भी कुरेद सकते हैं।