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SC: एक साल पुराने अपने ही आदेश को कोर्ट ने लिया वापस, पढ़िए शराब दुकान की स्थापना से जुड़ा क्या है पूरा मामला
Tue, 30 Jan 2024 01:32 AM IST
जलज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जलज मिश्रा
Updated Tue, 30 Jan 2024 01:32 AM IST
सार
सोमवार को मुख्य न्यायाधीश डी.वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ पुडुचेरी द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस दौरान पुडुचेरी की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कोर्ट में कहा कि पिछली साल यह आदेश गलती से पारित हो गया था।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही करीब एक साल पुराने फैसले को वापस ले लिया है। दरअसल, अदालत ने पुडुचेरी की एक शराब दुकान को मंदिर, मस्जिद या शैक्षणिक संस्थान से 500 मीटर से अधिक दूर स्थापित करने के फैसले को वापस लिया और कहा कि शराब दुकानों के मामले में स्थानीय नगरपालिका के कानून भी लागू होंगे। अदालत ने यह फैसला मार्च 2023 में सुनाया था, जिसे सोमवार को रद्द कर दिया गया।
पहले जानिए, क्या है पूरा मामला
बता दें, 2016 में सर्वोच्च अदालत ने तमिलनाडु बनाम के. बालू मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा था कि ड्रिंक एंड ड्राइव और सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाने के लिए राष्ट्रीय-राज्य राजमार्गों के 500 मीटर के भीतर किसी भी शराब दुकान को अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके बाद, कोर्ट ने अपने आदेश में संशोधन किया और राजमार्गों से 500 मीटर की दूरी पर शराब की दुकाने खोलने के नियम को घटा कर 220 मीटर कर दिया, अगर वह क्षेत्र 20 हजार से कम की आबादी वाला नगरपालिका क्षेत्र है। इसी के साथ कोर्ट ने यह भी कहा कि सर्वोच्च अदालत के फैसले के साथ-साथ राज्य सरकार स्थानीय नगरपालिका के कानूनों और दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए भी शराब दुकानों के लिए नीतियां-नियम बना सकती हैं।
ताजा मामला, 20 मार्च 2023 का है, जब सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने 2016 के फैसले को आधार मानते हुए शराब दुकान को 500 मीटर से अधिक दूर स्थापित करने का आदेश दे दिया। हालांकि, अदालत ने बाद में किए गए संशोधनों पर ध्यान नहीं दिया।
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अब जानें, सोमवार को कोर्ट में क्या हुआ
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को मुख्य न्यायाधीश डी.वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ पुडुचेरी द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस दौरान पुडुचेरी की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कोर्ट में कहा कि पिछली साल यह आदेश गलती से पारित हो गया था। इसे वापस लेना चाहिए। इसके बाद पीठ ने शराब दुकान की स्थापना वाले मामले को दोबारा मद्रास हाईकोर्ट के रिकॉर्ड पर बहाल कर दिया।
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पहले जानिए, क्या है पूरा मामला
बता दें, 2016 में सर्वोच्च अदालत ने तमिलनाडु बनाम के. बालू मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा था कि ड्रिंक एंड ड्राइव और सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाने के लिए राष्ट्रीय-राज्य राजमार्गों के 500 मीटर के भीतर किसी भी शराब दुकान को अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके बाद, कोर्ट ने अपने आदेश में संशोधन किया और राजमार्गों से 500 मीटर की दूरी पर शराब की दुकाने खोलने के नियम को घटा कर 220 मीटर कर दिया, अगर वह क्षेत्र 20 हजार से कम की आबादी वाला नगरपालिका क्षेत्र है। इसी के साथ कोर्ट ने यह भी कहा कि सर्वोच्च अदालत के फैसले के साथ-साथ राज्य सरकार स्थानीय नगरपालिका के कानूनों और दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए भी शराब दुकानों के लिए नीतियां-नियम बना सकती हैं।
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ताजा मामला, 20 मार्च 2023 का है, जब सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने 2016 के फैसले को आधार मानते हुए शराब दुकान को 500 मीटर से अधिक दूर स्थापित करने का आदेश दे दिया। हालांकि, अदालत ने बाद में किए गए संशोधनों पर ध्यान नहीं दिया।
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अब जानें, सोमवार को कोर्ट में क्या हुआ
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को मुख्य न्यायाधीश डी.वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ पुडुचेरी द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस दौरान पुडुचेरी की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कोर्ट में कहा कि पिछली साल यह आदेश गलती से पारित हो गया था। इसे वापस लेना चाहिए। इसके बाद पीठ ने शराब दुकान की स्थापना वाले मामले को दोबारा मद्रास हाईकोर्ट के रिकॉर्ड पर बहाल कर दिया।