सुप्रीम कोर्ट: कोविड-19 मुआवजे के कम वितरण पर उठाए सवाल, कहा- पीड़ितों को वंचित नहीं कर सकते
जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने कहा कि पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने में देरी के खिलाफ बार-बार आदेश देने के बावजूद संबंधित अथॉरिटी उसके निर्देशों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने कोविड-19 से मौत के मामलों में मृतकों के परिजनों को मुआवजा नहीं दिए जाने और भुगतान में देरी पर राज्य सरकारों को फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने वास्तविक मौतों की तुलना में कम संख्या में आवेदनों को प्रोसेस करने के लिए आंध्र प्रदेश और बिहार के मुख्य सचिवों की खिंचाई की। शीर्ष अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि तकनीकी कमियों के कारण पीड़ितों को मुआवजे से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही अदालत ने सभी राज्यों से कहा है कि मुआवजे के आवेदन को निरस्त करने का कारण आवेदकों को बताया जाना चाहिए।
जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने कहा कि पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने में देरी के खिलाफ बार-बार आदेश देने के बावजूद संबंधित अथॉरिटी उसके निर्देशों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। यह देखते हुए कि कई राज्यों में कोविड की मौत के लिए दायर दावों की संख्या आधिकारिक मौतों से कम है, शीर्ष अदालत ने कहा कि सरकार सक्रिय कदम नहीं उठा रही है और पीड़ितों तक पहुंचने के लिए राज्य और जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण की मदद नहीं ले रही है। साथ ही शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्य विधिक सेवा अथॉरिटी की मदद से उन बच्चों को मुआवजा दिलाने की कोशिश करनी चाहिए जिन्होंने कोविड काल में अपने माता-पिता या इनमें से किसी एक को खो दिया है।
योग्य दावेदारों को भुगतान नहीं करना हमारे आदेश की अवज्ञा
परिवारों को मुआवजे के भुगतान के लिए पीठ ने कहा, योग्य दावेदारों को भुगतान नहीं करना हमारे पहले के आदेश की अवज्ञा के समान होगा। वकील गौरव बंसल द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई की शुरुआत में शीर्ष अदालत ने आंध्र प्रदेश और बिहार के मुख्य सचिवों की दोपहर दो बजे व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित होने के लिए कहा। आंध्रप्रदेश के मुख्य सचिव ने कहा कि यदि यह पाया जाता है कि अस्वीकृति गलत है तो राज्य उन सभी दावेदारों तक पहुंचेगा और उन्हें कमियों को दूर करने का अवसर देगा। उन्होंने अदालत को यह भी आश्वासन दिया कि राज्य यह सुनिश्चित करेगा कि मुआवजे का एक भी दावेदार इससे वंचित न रहे।
बिहार के आंकड़ों पर भरोसा नहीं
पीठ ने बिहार सरकार की तरफ से पेश हुए वकील से कहा, हमें भरोसा नहीं हो रहा कि बिहार राज्य में कोविड के कारण केवल 12,000 लोगों की मौत हुई। हम चाहते हैं कि आपके मुख्य सचिव दो बजे डिजिटल तरीके से यहां पेश हों। बिहार के संबंध में शीर्ष अदालत ने पाया कि दर्ज की गई 13,250 मौतों में के लिए 11,000 आवेदन प्राप्त किए गए हैं। पीठ ने कहा, अन्य राज्यों की तुलना में बिहार में कम संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। राज्य की अलग सी स्थिति को देखते हुए बिहार राज्य को पात्र व्यक्तियों के परिजनों या उन लोगों के परिवार के सदस्यों तक पहुंचने के लिए अधिक प्रयास की आवश्यकता है जिनकी मौत कोविड -19 के कारण हुई।
2001 के गुजरात भूकंप का किया जिक्र
जस्टिस एम आर शाह और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों से कोविड-19 से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों से संपर्क करने और मुआवजा दावों का पंजीकरण और वितरण उसी तरह करने को कहा, जैसा 2001 में गुजरात में आए भूकंप के दौरान किया गया था।