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SC: निजी परिसर में कथित जातिसूचक टिप्पणी को अदालत ने नहीं माना 'सार्वजनिक स्थान', SC/ST एक्ट के आरोप किए रद्द

Mon, 08 Dec 2025 11:35 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Mon, 08 Dec 2025 11:35 PM IST
सार

Supreme Court: देश की सर्वोच्च अदालत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि घर के अंदर हुई घटना को सार्वजनिक दृष्टि में हुई घटना नहीं माना जा सकता है। इस टिप्पणी के साथ ही शीर्ष अदालत ने आरोपियों के खिलाफ चल रहे SC/ST एक्ट के आरोप रद्द कर दिए हैं।

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Supreme Court quashes proceedings initiated against accused under SC/ST Act
सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कुछ आरोपितों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत चल रही कार्यवाही रद्द कर दी। शीर्ष अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता के घर के अंदर हुई घटना को सार्वजनिक दृष्टि में हुई घटना नहीं माना जा सकता, जो इस कानून के तहत अपराध साबित करने की एक जरूरी शर्त है।
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि शिकायत में आरोप लगाया गया था कि जातिसूचक गालियां शिकायतकर्ता के घर के अंदर दी गई थीं। एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(एस) तभी लागू होती है जब जातिसूचक गालियां किसी ऐसी जगह पर दी गई हों जो सार्वजनिक दृश्य में हो। इसलिए, घर के अंदर हुई घटना को पब्लिक व्यू नहीं माना जा सकता। पीठ ने कहा, 'शिकायतकर्ता का घर सार्वजनिक दृश्य वाला स्थान नहीं है। इसलिए इस मामले में एससी/एसटी एक्ट लागू नहीं होता।'
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'लेकिन आईपीसी के आरोप जारी रहेंगे'
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि एससी/एसटी एक्ट के आरोप तो रद्द किए जाते हैं, लेकिन भारतीय दंड संहिता के तहत लगे अन्य आरोपों पर ट्रायल पहले की तरह चलेगा।

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जानें क्या था पूरा मामला?
बता दें कि आरोप लगाया गया था कि जुलाई 2023 में आरोपितों ने शिकायतकर्ता को जातिसूचक गालियां दीं और उसके बेटे से मारपीट की। ट्रायल कोर्ट और फिर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आरोपियों को एससी/एसटी एक्ट और आईपीसी दोनों के तहत ट्रायल के लिए बुलाया था। आरोपितों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट के आरोप हटाने का आदेश दिया।

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