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कर्नल कुरैशी विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने एमपी सरकार को लगाई फटकार, विजय शाह पर केस चलाने में देरी पर सख्त
Fri, 08 May 2026 04:10 PM IST
Rahul Kumar
आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली
Published by: Rahul Kumar
Updated Fri, 08 May 2026 04:10 PM IST
सार
कर्नल सोफिया कुरैशी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश सरकार को फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने में देरी करने पर आपत्ति जताई है।
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कर्नल सोफिया कुरैशी और विजय शाह
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश सरकार द्वारा आदिवासी मामलों के मंत्री कुंवर विजय शाह पर मुकदमा चलाने की मंजूरी देने के फैसले में हुई देरी पर नाराजगी जाहिर की। यह मामला भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ शाह की विवादित टिप्पणियों से जुड़ा है। कर्नल कुरैशी ने पिछले साल 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान मीडिया को जानकारी दी थी।
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'अब बस हमारे आदेश का पालन करें'
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने राज्य सरकार से सवाल किया कि उसने सुप्रीम कोर्ट के पिछले निर्देश का पालन क्यों नहीं किया, जिसमें उसे दो हफ्तों के भीतर मंजूरी देने पर फैसला लेने को कहा गया था। सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अब बस हमारे आदेश का पालन करें। बहुत हो चुका।
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सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि शाह की टिप्पणियां 'दुर्भाग्यपूर्ण' थीं और सुझाव दिया कि मंत्री का इरादा शायद कर्नल कुरैशी की तारीफ करना था, लेकिन वे अपनी बात ठीक से कह नहीं पाए।
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सॉलिसिटर जनरल (एसजी) मेहता ने कहा, "उन्होंने जो कहा, वह निश्चित रूप से दुर्भाग्यपूर्ण था। हो सकता है कि वे महिला अधिकारी की तारीफ करना चाहते हों लेकिन वे अपनी बात ठीक से कह नहीं पाए और कुछ और ही कह बैठे। उन्होंने यह भी साफ किया कि यह उनका निजी विचार था, न कि मध्य प्रदेश सरकार का पक्ष।
हालांकि, सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच इस बात से सहमत नहीं हुई। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण नहीं था। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था। जब एसजी मेहता ने फिर दोहराया कि शाह से शायद गलती से कुछ निकल गया हो, तो पीठ ने कहा कि राजनेता आम तौर पर अपने सार्वजनिक बयानों में काफी सावधान और अपनी बात कहने में माहिर होते हैं।
'राजनेता होने के नाते, उन्हें पता है कि अपनी बात कैसे कहनी है'
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक राजनेता होने के नाते, उन्हें पता है कि अपनी बात कैसे कहनी है और महिला अधिकारी की तारीफ कैसे करनी है। अगर यह सचमुच जुबान फिसलने की वजह से हुआ होता, तो इसके तुरंत बाद माफी भी मांगी गई होती। सुप्रीम कोर्ट ने अदालत द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल (एसआईटी) की ओर से पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट का भी जिक्र किया और कहा कि रिपोर्ट से पता चलता है कि शाह को इस तरह की टिप्पणियां करने की आदत है। शाह की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने कहा कि मंत्री ने अपनी टिप्पणियों के लिए पहले ही सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस माफी की ईमानदारी पर ही सवाल उठा दिया। सिर्फ इसलिए कि कोर्ट ने संज्ञान लिया, आपने माफी मांगी। चिट्ठी लिखना माफी नहीं है। यह सिर्फ एक झूठा बचाव करने के लिए था। सबसे पहली चीज तो यह होनी चाहिए थी कि आप हाथ जोड़कर माफी मांगते। इसके बाद एसजी मेहता ने कहा कि शाह ने टेलीविजन पर भी हाथ जोड़कर माफी मांगी थी।
मामले की सुनवाई चार हफ्ते बाद
सीजेआई कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने आखिरकार राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह अपने पिछले आदेश का पालन करे और मंजूरी के मुद्दे पर फैसला ले, साथ ही उसे हालात की पूरी तस्वीर पर भी विचार करने को कहा। अब इस मामले की सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी। इससे पहले, 19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया था कि वह एसआईटी की सीलबंद रिपोर्ट खोलने के बाद, शाह पर मुकदमा चलाने की मंजूरी देने के बारे में दो हफ्ते के भीतर फैसला ले। इस रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ था कि जांच पैनल ने मंत्री के खिलाफ आगे बढ़ने के लिए मंजूरी मांगी थी।
शाह ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा तब खटखटाया था, जब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपनी तरफ से शुरू की गई कार्रवाई में, कर्नल कुरैशी को निशाना बनाने वाली उनकी टिप्पणियों को लेकर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था। गिरफ्तारी समेत किसी भी जबरदस्ती वाली कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली एक एसआईटी बनाने का आदेश दिया था, जिसमें एक महिला आईपीएस अधिकारी भी शामिल थी।