चुनाव बाद हिंसा मामला: राज्य सरकार की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, कोलकाता हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका
हाईकोर्ट के फैसले के विरोध में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और सीबीआई से जांच नहीं कराने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को मामले की सुनवाई करने का आदेश जारी किया है।
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पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा के मामले में राज्य सरकार की याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को अगली सुनवाई का आदेश दिया है। राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के फैसले को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने हिंसा मामले की जांच सीबीआई से कराने का आदेश दिया था, लेकिन राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से इसे खारिज करने की मांग की थी। बता दें कि बीते दिनों पश्चिम बंगाल सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की थी।
पश्चिम बंगाल सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आरोप लगाया कि राज्य में चौंकाने वाली चीजें हुई हैं और डकैती के मामलों सहित मामलों को बड़े पैमाने पर सीबीआई को स्थानांतरित किया जा रहा है। राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने जस्टिस विनीत सरन और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ से कहा कि जब भी कोई आरोप लगता है कि जांच निष्पक्ष रूप से नहीं की जा रही है, अदालत तथ्यों को ध्यान में रखती है और फिर प्रथम दृष्टया निष्कर्ष के बाद मामले को सीबीआई को स्थानांतरित कर देती है। इस मामले में भी सामूहिक रूप से सीबीआई को मामले दिए गए। कुछ सबसे चौंकाने वाली चीजें हुई हैं। उदाहरण के लिए हत्या के एक मामले में जिस व्यक्ति को पीड़ित बताया जा रहा है वह जीवित है। इस बीच डकैती के मामलों की भी सीबीआई जांच कर रही है।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने अपने 19 अगस्त के आदेश में कहा था कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग समिति की रिपोर्ट में बताए गए हत्या या महिलाओं से बलात्कार से संबंधित सभी मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए। हाईकोर्ट ने कहा था कि राज्य को मामलों के सभी रिकॉर्ड सीबीआई को सौंपनी चाहिए। साथ ही हाईकोर्ट ने एनएचआरसी समिति की रिपोर्ट में उल्लेखित अन्य सभी मामलों को जांच अदालत की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराने का निर्णय लिया था।