SC: छत्तीसगढ़ बार काउंसिल चुनाव में खरीद-फरोख्त के आरोपों की जांच करेगा जस्टिस धूलिया पैनल, अदालत का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ राज्य बार काउंसिल चुनाव में कथित खरीद-फरोख्त और गड़बड़ियों की जांच के लिए जस्टिस सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में समिति गठित की।
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ राज्य बार काउंसिल के चुनावों में खरीद-फरोख्त और चुनावी अनियमितताओं के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए इनकी जांच का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने यह जिम्मेदारी पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता वाली हाई-पावर्ड समिति को सौंपी है।
बीसीआई की याचिका और हाईकोर्ट का हस्तक्षेप
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि बीसीआई ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में लंबित एक याचिका को शीर्ष अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद, जिसमें कहा गया था कि राज्य बार काउंसिल चुनावों में हाईकोर्ट हस्तक्षेप नहीं करेगा, इसके बावजूद हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई की। हाल ही में हाईकोर्ट ने बीसीआई अध्यक्ष द्वारा कार्यालय पदाधिकारियों के चुनाव को टालने के आदेश पर सवाल उठाया था और इसका आधार पूछने को कहा था।
दो हफ्ते में रिपोर्ट सौंपेगी समिति
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने जस्टिस धूलिया की अगुआई वाली समिति को दो सप्ताह में जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट में लंबित याचिका का निपटारा करते हुए दोहराया कि बार काउंसिल चुनावों की निगरानी स्वयं शीर्ष अदालत कर रही है।
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पदाधिकारियों का चुनाव भी कराएगी समिति
सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस धूलिया समिति को छत्तीसगढ़ बार काउंसिल के पदाधिकारियों के चुनाव कराने का अधिकार भी दे दिया है। समिति के सभी खर्च बार काउंसिल ऑफ इंडिया वहन करेगी। इस हाई-पावर्ड समिति में जस्टिस सुधांशु धूलिया, जस्टिस रवि शंकर झा (पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश) और वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरि शामिल हैं, जो पूरी चुनावी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।
11 साल बाद हुए थे चुनाव
छत्तीसगढ़ राज्य बार काउंसिल चुनाव 2025 करीब 11 वर्षों के अंतराल के बाद कराए गए थे। 30 सितंबर 2025 को हुए मतदान में 13,000 से अधिक वकीलों ने हिस्सा लिया और 25 सदस्यों का चुनाव किया गया। इन्हीं निर्वाचित सदस्यों में से अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारी चुने जाते हैं।
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