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Courts: सुप्रीम कोर्ट ने तदर्थ न्यायाधीशों को नियुक्ति का दिया आदेश, हाईकोर्ट ने सरकार को नहीं भेजे नाम

Sun, 09 Mar 2025 04:36 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Sun, 09 Mar 2025 04:36 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने 30 जनवरी को उच्च न्यायालयों को तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति करने की अनुमति दी थी।  मगर सरकार को अब तक हाईकोर्ट से तदर्थ न्यायाधीश पद के उम्मीदवारों के नाम नहीं मिले हैं। 

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Supreme Court orders appointment of ad-hoc judges, High Court did not send names to the government
अदालत (सांकेतिक) - फोटो : ANI

विस्तार

देशभर के न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या बढ़ रही है। इससे निपटने के लिए हाईकोर्ट में तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट ने एक महीने पहले मंजूरी दी थी। मगर सरकार को अब तक हाईकोर्ट से तदर्थ न्यायाधीश पद के उम्मीदवारों के नाम नहीं मिले हैं। 

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देशभर की अदालतों में 18 लाख से ज्यादा आपराधिक मामले लंबित हैं। इससे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 30 जनवरी को उच्च न्यायालयों को तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति करने की अनुमति दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि तदर्थ न्यायाधीशों की संख्या कोर्ट की कुल स्वीकृत संख्या के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। संविधान का अनुच्छेद 224ए भी लंबित मामलों से निपटने में मदद के लिए उच्च न्यायालयों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को तदर्थ न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की अनुमति देता है।
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सूत्र बताते हैं कि केंद्रीय कानून मंत्रालय को तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए संबंधित उच्च न्यायालय के कॉलेजियम से अभी तक कोई सिफारिश नहीं मिली है। तय प्रक्रिया के मुताबिक संबंधित उच्च न्यायालय कॉलेजियम कानून मंत्रालय में न्याय विभाग को न्यायाधीशों के रूप में नियुक्त किए जाने वाले उम्मीदवारों की सिफारिशें या नाम भेजते हैं। इसके बाद विभाग उम्मीदवारों पर इनपुट और विवरण जोड़ता है। 
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फिर इसे सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को भेजा जाता है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम अंतिम फैसला लेता है और सरकार को चयनित व्यक्तियों को न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश करता है। इसके बाद राष्ट्रपति नवनियुक्त न्यायाधीश के नियुक्ति पत्र पर हस्ताक्षर करते हैं। तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी ऐसी ही होगी। लेकिन राष्ट्रपति नियुक्ति पत्र पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे। हालांकि इस बारे में राष्ट्रपति की सहमति ली जाएगी। 

उच्च न्यायालयों में तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति पर 20 अप्रैल 2021 को दिए फैसले में शीर्ष अदालत ने कुछ शर्तें लगाई थीं। बाद में मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बीआर गवई और सूर्यकांत की सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ ने कुछ शर्तों में ढील दी और कुछ को स्थगित रखा। पूर्व मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने लंबित मामलों को निपटाने के लिए सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की दो से तीन साल की अवधि के लिए तदर्थ नियुक्ति करने का निर्देश दिया था।

इसमें शर्त थी कि यदि हाईकोर्ट में स्वीकृत पदों की संख्या 80 प्रतिशत है, तो तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति नहीं की जा सकती। जबकि दूसरी शर्त थी तदर्थ न्यायाधीश अलग-अलग बेंचों पर बैठकर मामलों का निपटारा कर सकते हैं। इन शर्तों में ढील देते हुए न्यायालय ने कहा था कि फिलहाल स्वीकृत पदों की संख्या के 20 प्रतिशत से अधिक रिक्तियों की आवश्यकता को स्थगित रखा जाएगा।


पीठ ने कहा था कि प्रत्येक उच्च न्यायालय को दो से पांच तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति करनी चाहिए और यह कुल स्वीकृत पदों की संख्या के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा कि तदर्थ न्यायाधीश उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ में बैठेंगे और लंबित आपराधिक अपीलों पर निर्णय लेंगे।


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