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Supreme Court: 'क्या वह इतने जरूरी हैं..', ED निदेशक को सेवा विस्तार पर शीर्ष कोर्ट ने किया सवाल

Thu, 04 May 2023 04:59 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 04 May 2023 04:59 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने ईडी निदेशक संजय कुमार मिश्रा को दिए तीसरे सेवा विस्तार पर केंद्र सरकार से पूछा, क्या वह इतने जरूरी हैं कि सुप्रीम कोर्ट के मना करने के बावजूद उनका कार्यकाल बढ़ाया जा रहा है।

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supreme court on extension of service to ED director Is he so important
ईडी के निदेशक संजय कुमार मिश्रा - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने ईडी निदेशक संजय कुमार मिश्रा को दिए तीसरे सेवा विस्तार पर केंद्र सरकार से पूछा, क्या वह इतने जरूरी हैं कि सुप्रीम कोर्ट के मना करने के बावजूद उनका कार्यकाल बढ़ाया जा रहा है। शीर्ष अदालत ने पूछा, क्या कोई व्यक्ति इतना जरूरी हो सकता है। शीर्ष अदालत ने 2021 के अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि सेवानिवृत्ति की उम्र के बाद प्रवर्तन निदेशक के पद पर रहने वाले अधिकारियों का कोई भी सेवा विस्तार कम अवधि का होना चाहिए। यह भी स्पष्ट किया था कि संजय मिश्रा को आगे कोई विस्तार नहीं दिया जाएगा।

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जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संजय करोल की पीठ के समक्ष केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, मिश्रा का विस्तार प्रशासनिक कारणों से आवश्यक था और वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) के भारत के मूल्यांकन के लिए महत्वपूर्ण था। इस पर पीठ ने सवालों की झड़ी लगाते हुए पूछा, क्या ईडी में कोई दूसरा व्यक्ति नहीं है जो उनका काम कर सके? क्या एक व्यक्ति इतना जरूरी हो सकता है? आप के मुताबिक ईडी में कोई और सक्षम व्यक्ति है ही नहीं? 2023 के बाद इस पद का क्या होगा जब मिश्रा सेवानिवृत्त हो जाएंगे?
 

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केंद्र का तर्क, भारत की रेटिंग नीचे न जाए इसलिए जरूरी
तुषार मेहता ने कहा, मनी लॉन्ड्रिंग पर भारत के कानून की अगली सहकर्मी समीक्षा 2023 में होनी है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि भारत की रेटिंग नीचे नहीं जाए, प्रवर्तन निदेशालय में नेतृत्व की निरंतरता महत्वपूर्ण है। मिश्रा लगातार कार्यबल से बात कर रहे हैं और इस काम के लिए वह सबसे उपयुक्त व्यक्ति हैं। कोई भी बेहद जरूरी नहीं है लेकिन ऐसे मामलों में निरंतरता जरूरी है।
 

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राजनेताओं की याचिका पर फिर उठाया सवाल
मेहता ने एक बार फिर राजनेताओं की याचिका पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, याचिकाकर्ताओं की पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ गंभीर मामले चल रहे हैं। ऐसे में इन लोगों के याचिका दाखिल करने पर मुझे आपत्ति है। मेहता ने कहा, इनमें से कुछ के पास बेहिसाब दौलत है और इसका ब्योरा नहीं देते। एक मामले में तो नोट गिनने वाली मशीनें लानी पड़ी थीं। मेहता ने पूछा, क्या अदालत ऐसे लोगों के इशारे पर दाखिल याचिकाओं को सुनेगा जो एजेंसियों पर दबाव डालने की मंशा रखते हैं। हालांकि पीठ ने मेहता की दलीलें स्वीकार नहीं की। सुनवाई 8 मई को होगी।

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