दिल्ली हिंसा: सुप्रीम कोर्ट की फटकार, पुलिस ने पेशेवर तरीके से नहीं किया काम
दिल्ली हिंसा पर शीर्ष अदालत ने दिल्ली पुलिस को फटकारते हुए कहा, सही वक्त पर की होती कार्रवाई तो ऐसे हालात पैदा नहीं होते। कोर्ट 23 को शाहीन बाग से लोगों को हटाने की याचिका सुनेगा। कोर्ट ने कहा, अभी सुनवाई के लिए अनुकूल माहौल नहीं है।
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नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ भड़की दिल्ली हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा, अगर दिल्ली पुलिस कानून ने कानून के तहत सही वक्त पर कार्रवाई की होती तो ऐसे हालात पैदा नहीं होते। जस्टिस एसके कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ ने कहा, अगर कोई भड़काऊ भाषण देता है तो पुलिस को इंतजार किए बगैर फौरन कार्रवाई करनी चाहिए थी। पुलिस ने पेशेवर तरीके से काम नहीं किया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ब्रिटेन और अमेरिका की पुलिस को ऐसे मौकों पर किसी का आदेश लेने की जरूरत नहीं होती है? वह तुरंत हरकत में आ जाती है। इसी के साथ कोर्ट ने शाहीन बाग में धरने पर बैठे लोगों को हटाने वाली याचिका पर सुनवाई करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि अभी सुनवाई के लिए अनुकूल माहौल नहीं है और इसी के साथ मामले की सुनवाई 23 मार्च तक के लिए टाल दी।
इससे पहले जस्टिस जोसेफ ने कहा, पिछले दो दिनों में डेढ़ दर्जन से अधिक लोगों की मौत पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह दुखद घटना है जो नहीं होनी चाहिए थी। आप लोगों को इस तरह से खुली छूट देंगे तो मुश्किल पैदा होगी। पीठ ने सरकार से कहा कि अगर आप पुलिस को कार्रवाई करने की छूट नहीं देंगे तो कैसे होगा? उन्होंने कहा, प्रकाश सिंह फैसले के दिशानिर्देशों को लागू करने की जरूरत है। पुलिस में प्रकाश सिंह फैसले को लागू करने में अनिच्छा दिखी। जब तक भड़काने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई का इंतजार होगा, तब तक तो वे पकड़ से दूर हो जाएंगे।
मेहता बोले, हिंसा पर कोई प्रतिकूल टिप्पणी से बचे पीठ, पुलिस का गिरेगा मनोबल
दरअसल, शाहीन बाग मामले की याचिकाओं से संबंधित सुनवाई का निपटारे के दौरान पीठ और दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के बीच तीखी तकरार भी हुई। दरअसल जस्टिस जोसेफ ने कहा कि वह हिंसा मामले में कुछ कहना चाहते हैं। इस पर मेहता ने कहा, पीठ को हिंसा पर कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे पुलिस का मनोबल गिरेगा। हमें मालूम है कि हम किन हालातों में काम कर रहे हैं। एक हेड कांस्टेबल की मृत्यु हो गई है। डीसीपी वेंटीलेटर पर हैं।
मन की बात नहीं कहूंगा तो जज के रूप में विफल हो जाऊंगा : जस्टिस जोसेफ
तब जस्टिस जोसेफ ने कहा, संस्था के प्रति अपने भरोसे को देखते हुए ही मैं कोई टिप्पणी करूंगा। उन्होंने कहा, अगर मैं इस मुद्दे पर अपने मन की बात नहीं कहूंगा तो मैं संस्था के प्रति और एक न्यायाधीश के रूप में अपने सांविधानिक कर्तव्य में विफल हो जाऊंगा। जस्टिस जोसेफ ने कहा, आप मुझे गलत नहीं समझे। मैंने यह टिप्पणी व्यापक परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए की है। पीठ ने कहा, वह दिल्ली पुलिस के खिलाफ नहीं है, मगर उसकी यह टिप्पणी दूरगामी प्रभाव वाली है। सरकारी एजेंसियों को माहौल को अनुकूल बनाना चाहिए।