फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court notice to Centre, UP government on exploitation of minor in Lalitpur

Supreme Court: ललितपुर में नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म पर केंद्र, यूपी सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

Fri, 05 Aug 2022 10:33 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Fri, 05 Aug 2022 10:33 PM IST
सार

जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यन की पीठ ने केंद्र, यूपी सरकार व अन्य को 18 अगस्त तक जवाब दाखिल करने को कहा है।

विज्ञापन
Supreme Court notice to Centre, UP government on exploitation of minor in Lalitpur
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने ललितपुर में एक नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म मामले में केंद्र, यूपी सरकार व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत एनजीओ बचपन बचाओ आंदोलन की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि पीड़िता के साथ थाने में भी यौन उत्पीड़न किया गया।

विज्ञापन


जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यन की पीठ ने केंद्र, यूपी सरकार व अन्य को 18 अगस्त तक जवाब दाखिल करने को कहा है। एनजीओ के वकील एचएच फूलका ने पीठ को बताया कि नाबालिग लड़की की जान को खतरा है और एनजीओ ने उसे घटनास्थल से दूर एक स्कूल हॉस्टल में भर्ती करा दिया है। उन्होंने बताया कि स्थानीय प्रशासन ने उसे कोई मदद नहीं की है। यही नहीं, दलित नाबालिग लड़की से सामूहिक दुष्कर्म के पांच महीने बाद तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई, बल्कि पुलिस विभाग ने पीड़िता व उसके परिवार को धमका कर प्रताड़ित भी किया। थाने में उसके साथ यौन उत्पीड़न भी किया गया।
विज्ञापन


अविवाहित महिला को सुरक्षित गर्भपात पर सुनवाई 
सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला सुनाते हुए कहा कि एक अविवाहित महिला को सुरक्षित गर्भपात के अधिकार से वंचित करना उसकी व्यक्तिगत स्वायत्तता का उल्लंघन करता है। सुप्रीम कोर्ट अब मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) अधिनियम और संबंधित नियमों की व्याख्या करेगा कि क्या अविवाहित महिलाओं को चिकित्सकीय सलाह पर 24 सप्ताह के गर्भपात की अनुमति दी जा सकती है। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने शुक्रवार को केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को इस प्रक्रिया में अदालत की सहायता करने को कहा। 
विज्ञापन
विज्ञापन


अदालत ने कहा, जब कानून के तहत अपवाद प्रदान किए गए हैं, और यदि चिकित्सा सलाह अनुमति देती है तो अविवाहित महिलाओं को 24 सप्ताह की गर्भावस्था को समाप्त करने के लिए शामिल क्यों नहीं किया जा सकता है। संसदीय मंशा स्पष्ट प्रतीत होती है क्योंकि इसने पति को साथी के साथ बदल दिया है। यह दर्शाता है कि उन्होंने अविवाहित महिलाओं को भी 24 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति देने वालों की श्रेणी में माना है। 

 

सिखों को विमान में कृपाण की अनुमति के के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सिख समुदाय के लोगों को घरेलू उड़ानों में कृपाण ले जाने की अनुमति को चुनौती देने वाली एक याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया। पीठ ने याचिकाकर्ता से हाईकोर्ट का रुख करने को कहा। याचिका ‘हिंदू सेना’ नामक संगठन ने दायर की थी। संगठन ने नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो द्वारा सिख समुदाय को दी गई छूट को भेदभावपूर्ण बताते हुए चुनौती दी थी। जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस जेके माहेश्वरी की पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा, आप हाईकोर्ट जा सकते हैं।

आरे में पेड़ नहीं काटे, सिर्फ कुछ खरपतवार हटाई गई: मुंबई मेट्रो

मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमएमआरसीएल) ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कहा कि मुंबई के आरे जंगल में कोई पेड़ नहीं काटा गया है। वहां सिर्फ कुछ खरपतवार, झाड़ियाें और शाखाओं को हटाया गया है।
जस्टिस यूयू ललित की पीठ के समक्ष स्थानीय निवासियों के एक समूह के वकील चंदर उदय सिंह ने दलील दी कि मेट्रो कार शेड परियोजना के लिए आरे वन क्षेत्र में यथास्थिति के आदेशों के बावजूद पेड़ों की कटाई फिर से शुरू कर दी गई है। इस पर पीठ ने कहा, मामले को विस्तार से सुनने की जरूरत है। एमएमआरसीएल की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, क्षेत्र में कोई पेड़ नहीं काटा जा रहा था। 2019 में सुप्रीम कोर्ट के यथास्थिति आदेश के बाद कोई पेड़ नहीं काटा गया। हालांकि, क्षेत्र में खरपतवार और झाड़ियां थीं, जिन्हें संबंधित अथॉरिटी द्वारा हटाया जा रहा था। पीठ अब 13 अगस्त को इस मामले में सुनवाई करेगी।

खिलाफ याचिका पर 9 सितंबर को सुनवाई 

सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को 1991 में बने उपासना स्थल कानून के कुछ प्रावधानों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया। शीर्ष अदालत में इस मामले पर 9 सितंबर को सुनवाई होगी। 
 सीजेआई एनवी रमण की पीठ को वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने बताया कि इस याचिका को छह बार हटाया गया है। अब इसे 9 सितंबर को सूचीबद्ध किया जाना है। कृपया आप निर्देश दें कि इसे इस बार हटाया न जाए। भाजपा नेता व वकील अश्विनी उपाध्याय की इस मामले में दाखिल एक जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 12 मार्च को केंद्र से जवाब मांगा था। हाल ही में 29 जुलाई को जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने छह अलग-अलग याचिकाओं पर विचार करने से इन्कार कर दिया था और याचिकाकर्ता को उपाध्याय की लंबित जनहित याचिका में हस्तक्षेप याचिकाएं दाखिल करने को कहा था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed