SC: दोषी नेताओं के आजीवन चुनाव लड़ने पर पाबंदी की मांग वाली याचिका पर सुनवाई टली, पढ़ें कोर्ट की अहम खबरें
आपराधिक मामलों में दोषी नेताओं को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य करार देने की मांग करने याचिका पर सुनवाई टल गई है। अदालत ने कहा है कि इस याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई की जाएगी। पढ़ें सुप्रीम कोर्ट की अहम खबरें...
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आपराधिक मामलों में दोषी नेताओं को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य करार देने की मांग करने याचिका पर सुनवाई एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दी है। भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हिमा कोहली और जेबी पारदीवाला की पीठ ने मंगलवार को इस पर अगले सप्ताह में सुनवाई के लिए कहा है। पीठ ने कहा कि वह इस मामले की सुनवाई अगले सप्ताह करेगी क्योंकि वह अन्य मामलों की सुनवाई कर रही थी।
वहीं, मामले में शीर्ष अदालत की सहायता के लिए एमिकस क्यूरी नियुक्त किए गए वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया ने पीठ से इस पर शीघ्र सुनवाई के लिए अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि मैं अनुरोध कर रहा हूं, कुछ तत्काल आदेशों की आवश्यकता है। हंसारिया ने अदालत द्वारा पारित एक आदेश के अनुसार एक रिपोर्ट भी दायर की है। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश मांगा कि सांसदों के खिलाफ मामले से निपटने वाली अदालतें विशेष रूप से ऐसे मुद्दों पर सुनवाई करें।
मालूम हो कि अश्विनी उपाध्याय ने अपनी याचिका में गुहार लगाई है कि आपराधिक मामलों में दो वर्ष या इससे अधिक की सजा पाने वालों पर आजीवन चुनाव लड़ने की पाबंदी लगा दी जानी चाहिए। साथ ही राजनेताओं के मामले का ट्रायल एक वर्ष के भीतर पूरा हो जाना चाहिए। साथ ही याचिका में यह भी गुहार की गई है कि चुनाव लड़ने के लिए अधिकतम उम्र निर्धारित हो और न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तय हो। इस याचिका में राजनेताओं के खिलाफ मामलों के तेजी से निपटारे की भी मांग की गई है। इसमें तर्क दिया गया है कि ऐसी गतिविधियों के लिए कई बाबुओं को निलंबित कर दिया गया था, जबकि राजनेताओं को कानून द्वारा माफ कर दिया गया।
याचिका में कहा गया कि मौजूदा स्थिति है कि दोषी ठहराए जाने और सजा काटने के दौरान भी दोषी राजनीतिक दल बना सकता है और वह दल का पदाधिकारी बन सकता है। इतना ही सजा काटने के छह वर्ष बाद भी दोषी फिर से चुनाव लड़ सकता है।
गौरतलब है कि शीर्ष अदालत ने अगस्त 2021 में निर्देश दिया था कि संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय की अनुमति के बिना पूर्व सांसदों और विधायकों के खिलाफ कोई भी मुकदमा वापस नहीं लिया जाएगा। अदालत ने आगे निर्देश दिया था कि विशेष अदालतों में सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों की सुनवाई करने वाले न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश तक अपने मौजूदा पदों पर बने रहना चाहिए।
राजनीति नहीं जनहित देखें सरकारें, लोगों को बैठकों से मतलब नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकारों को राजनीति से पहले जनहित पर विचार करना चाहिए। शीर्ष अदालत ने घग्गर नदी में उफान के कारण 25 गांवों में बाढ़ की समस्या के समाधान के लिए पंजाब और हरियाणा की सरकारों को ठोस कदम उठाने का निर्देश देते हुए यह बात कही।
शीर्ष कोर्ट ने कहा, हमारे पिछले आदेश के बाद केंद्रीय जल और विद्युत अनुसंधान स्टेशन (सीडब्ल्यूपीआरएस), पुणे ने मामले में सिफारिशें की थीं। पर इन राज्यों ने घग्गर कमेटी की दो बैठकों के अलावा उन पर और कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने दोनों सरकारों के वकीलों से कहा, आम लोगों को बैठकों में कोई दिलचस्पी नहीं है, उन्हें सिर्फ समाधान से मतलब है। अपनी सरकार को बताएं कि यह राजनीति नहीं है। जनहित सर्वोपरि है। आप यह नहीं कह सकते कि आप सिफारिशों या हमारे आदेशों का पालन नहीं करेंगे।
स्थिति रिपोर्ट : बैठकों के अलावा नहीं हुआ कुछ काम
शीर्ष कोर्ट ने इस वर्ष अगस्त में घग्गर की बाढ़ के कारण लोगों को हो रही परेशानी के बारे में पंजाब और हरियाणा सरकारों को सीडब्ल्यूपीआरएस की सिफारिशों पर अमल करने का निर्देश दिया था। मंगलवार को दोनों राज्य सरकारों की ओर से दाखिल स्थिति रिपोर्ट देखने पर कोर्ट ने पाया कि मामले में बैठकों के अलावा खास कुछ नहीं हुआ है।
नीट-पीजी 2022 : सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- क्या मेधावियों को आरक्षित श्रेणी का उम्मीदवार माना जाएगा, तीन दिन में केंद्र को जवाब दाखिल करने के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र से पूछा कि क्या नीट-पीजी 2022 में मेधावियों को भी आरक्षित श्रेणी का उम्मीदवार माना जाएगा। शीर्ष अदालत ने सामान्य श्रेणी के अंक हासिल करने वाले आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को अखिल भारतीय कोटे की सीटों में आरक्षित श्रेणी के माने जाने वाले आरोपों की याचिका पर केंद्र से हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से तीन दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। हालांकि भाटी ने कहा, काउंसलिंग प्रक्रिया में रोस्टर के आधार पर आरक्षण नीति का पालन किया गया है। सुप्रीम कोर्ट अब इस याचिका पर सोमवार को सुनवाई करेगा। याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने कहा, एआईक्यू में एनईईटी-पीजी सीटों के लिए चल रही काउंसलिंग में मेरिट से ऊपर अंक लाकर सामान्य श्रेणी की सीट सुरक्षित करने में सफल आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को आरक्षित श्रेणी में सीट के लिए उम्मीदवार के रूप में माना जाता है।
भूषण ने एक ओबीसी उम्मीदवार का उदाहरण भी दिया, जिसने सामान्य श्रेणी में 73 स्थान हासिल किया लेकिन उसे आरक्षित श्रेणी में रखा गया। इस कारण आरक्षित वर्ग के दूसरे उम्मीदवार की संभावना प्रभावित हुई। पीठ ने इस दलील को रिकॉर्ड पर लिया। भाटी ने कहा, एआईक्यू के लिए नीट-पीजी काउंसलिंग की सीटों का आवंटन प्रवेश विवरणिका के पैरा 3.1 और 3.2 के अनुसार किया जा रहा है। हालांकि पीठ ने कहा, इस संबंध में केंद्र सरकार की ओर से एक हलफनामा जरूरी होगा।