Supreme Court: सत्येंद्र जैन को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मिली राहत, सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ाई अंतरिम जमानत
सत्येंद्र जैन ने सुप्रीम कोर्ट में रेगुलर जमानत देने के लिए याचिका दायर की थी। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सत्येंद्र जैन की अंतरिम जमानत बढ़ाने का निर्देश दिया।
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4 दिसंबर को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट अब 4 दिसंबर को ही सत्येंद्र जैन की रेगुलर जमानत की याचिका पर सुनवाई करेगा। इससे पहले मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सत्येंद्र जैन को 9 अक्तूबर तक अंतरिम जमानत दी थी। वहीं ईडी ने दावा किया कि आप नेता सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका लंबित होने का हवाला देकर ट्रायल कोर्ट में बार-बार सुनवाई स्थगित करने की मांग कर रहे हैं। ईडी ने आरोप लगाया कि सत्येंद्र जैन ट्रायल कोर्ट से 16 तारीखें ले चुके हैं।
जैन पर लगे हैं ये आरोप
सत्येंद्र जैन पर आरोप है कि उन्होंने अपने से जुड़ी चार कंपनियों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग की। सीबीआई ने सत्येंद्र जैन के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत साल 2017 में भी एक मामला दर्ज किया था। सीबीआई वाले मामले में 6 सितंबर 2019 से सत्येंद्र जैन को लगातार ट्रायल कोर्ट से जमानत मिली हुई है। वहीं मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने बीते साल 30 मई को सत्येंद्र जैन को गिरफ्तार किया था। इस साल 26 मई को सुप्रीम कोर्ट ने जैन को स्पाइनल सर्जरी कराने के लिए छह हफ्तों की अंतरिम जमानत दी थी। इसके बाद 12 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने जैन की अंतरिम जमानत को 25 सितंबर तक बढ़ा दिया था।
याचिकाकर्ता ने उठाई ओसीसीआरपी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने ओसीसीआरपी समेत कई अन्य मीडिया और अन्य रिपोर्ट्स को उठाया। सुप्रीम कोर्ट इस पर कहा कि इस तरह की रिपोर्ट का कोई साक्ष्यात्मक महत्व नहीं है। इस तरह की धारणा बनाना कठिन है कि यह विश्वसनीय है।
एसजी तुषार मेहता ने कहा, फैसलों को प्रभावित करने के लिए कहानियां बनाई जा रही है और इस तरह की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। इसका एक उदाहरण ओसीसीआरपी रिपोर्ट है। याचिकाकर्ता के वकील ने समिति कि रिपोर्ट का जिक्र किया, जिसमें चिकन और अंडे का उल्लेख है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हम उनके फैसले पर बैठे रहने वाले विशेषज्ञ नहीं है। अगर हमें लगता है नियमों को संशोधित किया जाना है, तो हम आदेश दे सकते हैं।
विधेयक लंबित रखने वाली केरल सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने दी सलाह
सुप्रीम कोर्ट ने केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के अतिरिक्त मुख्य सचिव से पंजाब के मामले में उसके हालिया फैसले को ध्यान से पढ़ने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित के खिलाफ ऐसी ही शिकायत पर स्पष्ट कहा था कि राज्यपाल विधानसभा से पारित विधेयकों को लटकाकर कानून निर्माण की सामान्य प्रक्रिया को विफल नहीं कर सकते। केरल सरकार ने खान पर उसके पारित विधेयकों को मंजूरी नहीं देने का आरोप लगाया है।
सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने केरल सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए शुक्रवार को कहा, पंजाब के मामले में हमारा आदेश बीती रात साइट पर अपलोड हुआ है। केरल राज्यपाल के अतिरिक्त मुख्य सचिव को उसे पढ़ने के लिए कहिये। केरल सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील और पूर्व अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा,सभी मंत्री उनसे (राज्यपाल) मिले हैं। मुख्यमंत्री उनसे कई बार मिल चुके हैं। आठ विधेयकों पर सहमति लंबित है। इस मामले में अब 28 नवंबर को सुनवाई होगी।