फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   supreme court news updates reserves order on a raja plea kerala high court Delhi High Court Bar Association

SC: CJI ने न्यायविद एमके नाम्बियार को श्रद्धांजलि दी; DHCBA कोषाध्यक्ष पद महिलाओं के लिए आरक्षित करने का आदेश

Thu, 26 Sep 2024 02:55 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Thu, 26 Sep 2024 02:55 PM IST
सार

ए राजा ने केरल हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ 20 मार्च 2023 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। ए राजा का कहना है कि वह हिंदू परायण समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और देवीकुलम के तहसीलदार ने उन्हें जाति प्रमाणपत्र भी जारी किया था। 

विज्ञापन
supreme court news updates reserves order on a raja plea kerala high court Delhi High Court Bar Association
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने प्रसिद्ध न्यायविद एमके नाम्बियार को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि मौलिक अधिकारों की परस्पर संबद्ध प्रकृति को उजागर करने की दिशा में उन्होंने लगातार प्रयास किए। आज इसी का नतीजा है कि मौलिक अधिकार भारतीय न्यायशास्त्र का अभिन्न अंग बन गए हैं। बकौल चीफ जस्टिस चंद्रचूड़, 'जब नांबियार ने पहली बार अपने विचार प्रस्तुत किए थे तो वे नए और अनसुने थे, लेकिन उनकी व्याख्याएं समय की कसौटी पर खरी उतरी हैं।' बता दें कि 1898 में जन्मे नाम्बियार ने 1920 के दशक में कानूनी पेशे में कदम रखा था। वे सुप्रीम कोर्ट और मद्रास हाई कोर्ट के एक प्रतिष्ठित वकील रहे। 1975 में उनका निधन हो गया। उन्हें मौलिक अधिकारों और संविधान के मूल ढांचे की रक्षा के लिए खास तौर पर याद किया जाता है। आज इनका जन्मस्थान केरल के कासरगोड जिले में है।
विज्ञापन


विधायक ए राजा की याचिका पर फैसला सुरक्षित
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सीपीआईएम विधायक ए राजा की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। ए राजा ने केरल हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। दरअसल केरल हाईकोर्ट ने केरल की देवीकुलम सीट से ए राजा के निर्वाचन को रद्द करने का आदेश दिया था। देवीकुलम सीट पर दूसरे स्थान पर रहे कांग्रेस नेता डी कुमार ने ए राजा के निर्वाचन को चुनौती दी थी। डी कुमार का आरोप है कि देवीकुलम सीट आरक्षित वर्ग के लिए रिजर्व है और ए राजा इस सीट से चुनाव लड़ने के लिए योग्य नहीं हैं। 
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट में ए राजा की याचिका पर सुनवाई कर रही जस्टिस अभय एस ओका, जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्ला और ऑगस्टीन जॉर्ज की पीठ ने ए राजा की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील वी गिरी और नरेंद्र हुड्डा के सबमिशन सुने और फैसला सुरक्षित रख लिया। ए राजा ने केरल हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ 20 मार्च 2023 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। ए राजा का कहना है कि वह हिंदू परायण समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और देवीकुलम के तहसीलदार ने उन्हें जाति प्रमाणपत्र भी जारी किया था। 
विज्ञापन
विज्ञापन

डीएचसीबीए में कोषाध्यक्ष पद महिला सदस्यों के लिए आरक्षित करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (डीएचसीबीए) में कोषाध्यक्ष का पद महिला सदस्यों के लिए आरक्षित करने का आदेश दिया है। इसके अलावा पांच पदाधिकारियों के पैनल में एक अन्य पद भी महिला सदस्यों के लिए आरक्षित करने के निर्देश दिए। जस्टिस सूर्यकांत, दीपांकर दत्ता और उज्जल भुइयां की पीठ ने यह भी कहा कि यह वांछनीय है कि डीएचसीबीए की आम सभा कार्यकारी समिति में तीन सीटें आरक्षित करने पर विचार करे, जिनमें से एक वरिष्ठ नामित महिला अधिवक्ता के लिए होनी चाहिए।

पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता मोहित माथुर, जो डीएचसीबीए के अध्यक्ष भी हैं, से कहा कि वे जिला न्यायालयों के बार निकायों से भी इसी तरह की व्यवस्था करने का आग्रह करें। पीठ ने डीएचसीबीए को निर्देश दिया कि वह अपनी आम सभा की बैठक यथाशीघ्र और 10 दिनों से अधिक समय बाद न बुलाए। हाई कोर्ट बार एसोसिएशन की कार्यकारी समिति में पांच पदाधिकारियों सहित 15 सदस्य हैं। शुरुआत में माथुर ने कहा कि उन्हें कुछ समय दिया जाना चाहिए, क्योंकि पदाधिकारियों और कार्यकारी समिति में महिलाओं के लिए पद आरक्षित करने के संबंध में कोई भी निर्णय केवल आम सभा द्वारा लिया जा सकता है और वह अकेले यह बयान नहीं दे सकते। माथुर ने ये भी कहा कि कार्यकारी समिति में पहले से ही पर्याप्त महिला सदस्य हैं। शीर्ष अदालत डीएचसीबीए में महिला सदस्यों के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने की मांग वाली याचिका पर विचार कर रही थी। एसोसिएशन के चुनाव अक्टूबर या नवंबर में होने हैं।

पत्रकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

एक पत्रकार ने उत्तर प्रदेश में अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, क्योंकि उसने राज्य में 'सामान्य प्रशासन की जाति गतिशीलता पर एक समाचार रिपोर्ट प्रकाशित की थी। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करना राज्य की कानून प्रवर्तन मशीनरी का दुरुपयोग करके उसकी आवाज को दबाने का एक स्पष्ट प्रयास है और आगे किसी भी उत्पीड़न को रोकने के लिए इसे रद्द किया जाना चाहिए। अभिषेक उपाध्याय की याचिका में दावा किया गया है कि 'यादव राज बनाम ठाकुर राज' शीर्षक से स्टोरी करने के बाद उनका नाम 20 सितंबर को लखनऊ के हजरतगंज थाने में दर्ज एफआईआर में दर्ज किया गया।

अधिवक्ता अनूप प्रकाश अवस्थी के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि स्टोरी को अगर उसके मूल रूप में देखा जाए तो भी उसमें किसी अपराध का खुलासा नहीं हुआ है। इसमें कहा गया है, इस अदालत में आने का कारण यूपी पुलिस के आधिकारिक 'एक्स' हैंडल की तरफ से कानूनी कार्रवाई की धमकी है और याचिकाकर्ता को यह जानकारी नहीं है कि उत्तर प्रदेश राज्य या कहीं और इस मुद्दे पर उसके खिलाफ कितनी अन्य एफआईआर दर्ज हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed