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Supreme Court: यूपी, दिल्ली समेत पांच राज्यों में खुलेगी चेक बाउंस मामलों की विशेष अदालत, सुप्रीम कोर्ट ने दिया निर्देश 

Thu, 19 May 2022 09:59 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Thu, 19 May 2022 09:59 PM IST
सार

जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एस रवींद्र भट ने कहा, इन पांच राज्यों में बड़ी संख्या में चेक बाउंस मामले लंबित हैं। ये विशेष अदालतें परक्राम्य उपकरण अधिनियम के तहत इन मामलों का निपटारा करेंगी।

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Supreme Court News Special court for check bounce cases will open in five states including UP lifts ban on feeding stray dogs 
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने चेक बाउंस मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए 1 सितंबर से पांच राज्यों में सेवानिवृत्त जज की विशेष अदालतों के गठन का निर्देश दिया है। ये विशेष अदालतें महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में खोली जाएंगी। 

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जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एस रवींद्र भट ने कहा, इन पांच राज्यों में बड़ी संख्या में चेक बाउंस मामले लंबित हैं। ये विशेष अदालतें परक्राम्य उपकरण अधिनियम के तहत इन मामलों का निपटारा करेंगी। पीठ ने कहा, हमने इन राज्यों के पांच जिलों में पायलट अदालतें गठित करने वाले न्यायमित्र के सुझावों को अपने आदेश में शामिल किया है और समय सीमा भी तय की है। पीठ ने कोर्ट के महासचिव को आदेश की कॉपी सीधे इन पांच राज्यों में हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल तक पहुंचाने का निर्देश दिया ताकि चीफ जस्टिस इस पर तुरंत कदम उठाएं। पीठ ने हाईकोर्ट को 21 जुलाई तक हलफनामा दाखिल कर अनुपालन रिपोर्ट पेश करने को कहा। इस मामले में अगली सुनवाई 26 जुलाई को होगी। 
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आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर लगाई रोक सुप्रीम कोर्ट ने हटाई
वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के भोजन के अधिकार और इन्हें खाना खिलाने के बारे में नागरिकों के अधिकार के बारे में दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर लगा स्थगन आदेश वापस ले लिया। शीर्ष अदालत ने इस वर्ष 4 मार्च को हाईकोर्ट के आदेश के लागू होने पर यह कहते हुए रोक लगा दी थी कि इससे आवारा कुत्तों का खतरा बढ़ सकता है। शीर्ष अदालत ने गैर सरकारी संस्था (एनजीओ) ह्यूमन फाउंडेशन फॉर पीपुल एंड एनीमल की याचिका पर स्थगन दिया था।
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जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस रविंद्र भट और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने सुनवाई के दौरान इस बात पर गौर किया कि हाईकोर्ट ने दो निजी पक्षों की याचिका पर अपना फैसला दिया था और एनजीओ इस कार्यवाही में दखल नहीं दे सकता था। पीठ ने यह भी पाया कि वास्तविक याचिका के दोनों पक्षों में यह विवाद सुलझ चुका है इसलिए किसी तीसरे पक्ष को लेकर इस कार्यवाही को जारी रखना जरूरी नहीं है।

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