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Updates: 'संसद हस्तक्षेप कर सकती है', अंधविश्वास मिटाने के लिए कदम उठाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट

Fri, 02 Aug 2024 01:05 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Fri, 02 Aug 2024 01:05 PM IST
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supreme court news and updates today: SC refuses to entertain plea for steps to eradicate superstition
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : एएनआई

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अंधविश्वास और जादू-टोना से जुड़ी एक याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। दरअसल, याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों को अंधविश्वास, जादू-टोना और संबंधित प्रथाओं को समाप्त करने के उद्देश्य से उपाय अपनाने के निर्देश देने की मांग की गई थी।

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अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दी गई याचिका में अंधविश्वास और जादू-टोना के खिलाफ सख्त कानूनों की आवश्यकता पर तर्क दिया गया था, ताकि समुदाय को नकारात्मक रूप से प्रभावित करने वाले अवैज्ञानिक कृत्यों का मुकाबला किया जा सके और धोखेबाज पाखंडियों द्वारा शोषण को रोका जा सके।
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प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की तीन सदस्यीय पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि अंधविश्वास को खत्म करने का समाधान न्यायिक आदेशों के बजाय शिक्षा में निहित है। पीठ ने कहा कि हम वैज्ञानिक सोच विकसित करने और अंधविश्वास को खत्म करने के लिए कदम उठाने के लिए रिट कैसे जारी कर सकते हैं। संविधान के संस्थापकों ने यह सब राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों में शामिल किया था।
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सीजेआई ने कहा कि यह शिक्षा के बारे में भी है और धारणा यह है कि आप जितना अधिक शिक्षित होंगे, आपका रुझान इन पर नहीं होगा। लेकिन अदालत वैज्ञानिक सोच बढ़ाने का निर्देश कैसे दे सकती है? सीजेआई ने कहा कि संविधान में राज्यों को अंधविश्वास मिटाने और वैज्ञानिक सोच विकसित करने का निर्देश है।

सीजेआई ने कहा कि ऐसी हजारों चीजें हैं, जो बच्चों को पाठ्यक्रम में सीखनी चाहिए। आप परिवार, दोस्तों आदि के जरिए बहुत कुछ सीखते हैं। संसद हस्तक्षेप कर सकती है और व्यापक हितधारक परामर्श के बाद वैज्ञानिक स्वभाव के लिए एक कानून बना सकती है, लेकिन हम इसमें हस्तक्षेप के लिए तैयार नहीं है।
  
पीठ द्वारा इस मामले पर विचार करने से इनकार करने के बाद याचिकाकर्ता ने याचिका वापस ले ली।

किसानों के समाधान के लिए बनाए जाने वाली समिति का नाम सुझाए हरियाणा और पंजाब
सुप्रीम कोर्ट ने शंभू सीमा पर प्रदर्शन कर रहे किसानों से उनकी मांगों का समाधान निकालने के लिए एक समिति के गठन के लिए हरियाणा और पंजाब दोनों से एक समान नाम सुझाने को कहा। अदालत का कहना है कि अंबाला के पास शंभू बॉर्डर पर यथास्थिति बनाए रखने का उसका पहले का आदेश जारी रहेगा। बता दें, यहां किसान 13 फरवरी से डेरा डाले हुए हैं। 

जमानत की शर्तें लगाने में अदालतें सावधानी बरतें: उच्चतम न्यायालय 
उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि जब एक अदालत पाती है कि अग्रिम जमानत दी जा सकती है, खासकर वैवाहिक विवाद से जुड़े मामलों में, तो उसे जमानत की शर्तें लगाते समय सावधानी बरतनी चाहिए।  शीर्ष अदालत ने कहा कि उसे यह देखकर दुख हुआ कि अग्रिम जमानत के लिए कठिन शर्तें लगाने की प्रथा की निंदा करने वाले कई फैसलों के बावजूद ऐसे आदेश पारित किए जा रहे हैं। उच्चतम न्यायालय की ये टिप्पणियां एक फैसले में आईं, जिसमें दहेज निषेध अधिनियम-1961 के तहत अपराधों समेत अन्य अपराधों के लिए दर्ज एक मामले में एक व्यक्ति को अनंतिम अग्रिम जमानत देते समय पटना उच्च न्यायालय द्वारा लगाई गई शर्त को खारिज कर दिया गया।

न्यायमूर्ति सी टी रविकुमार और न्यायमूर्ति पी के मिश्रा की शीर्ष अदालत की पीठ ने जमानत देते समय अनुपालन योग्य शर्तें लगाने की आवश्यकता पर बल दिया। उच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों की इच्छा पर विचार करते हुए उन्हें निचली अदालत के समक्ष एक संयुक्त हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था, जिसमें कहा गया था कि वे एक साथ रहने के लिए सहमत हुए हैं। इसमें यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता को शिकायतकर्ता की सभी शारीरिक और वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक विशिष्ट बचनबद्धता देनी होगी ताकि वह उसके परिवार के किसी भी सदस्य के हस्तक्षेप के बिना एक सम्मानजनक जीवन जी सके। पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश से पता चला कि जो पक्ष अलग होने वाले थे, उन्होंने दोबारा विचार किया और मतभेद भुलाकर फिर से एकजुट होने की इच्छा व्यक्त की।

बंगाल में 36 विवि में नियमित कुलपति नियुक्त करने का सुप्रीम फैसला
 राज्यपाल सीवी आनंद बोस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी में बढ़ते विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में सभी 36 राज्य सहायता प्राप्त विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियमित नियुक्ति करने का आदेश दिया है। कुलपतियों की नियुक्तियों को लेकर दो शीर्ष सांविधानिक पदों पर बैठे लोगों के बीच लड़ाई खत्म करने की कोशिश में शीर्ष अदालत ने 8 जुलाई को एक खोज-सह-चयन समिति का गठन किया था। भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित को इसका अध्यक्ष नियुक्त किया था। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने 29 जुलाई को पारित आदेश में शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि कुलपतियों की नियुक्तियों के मामले में कोई भी अंतरिम व्यवस्था नहीं होनी चाहिए।  

इसको और स्पष्ट करते हुए पीठ ने कहा कि राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में नियमित कुलपतियों की नियुक्ति ही होनी चाहिए।

समलैंगिकों को रक्तदान पर रोक...केंद्र और नाको को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर, क्वीर, इंटरसेक्स (एलजीबीटीक्यूआई) के लोगों को रक्तदान से रोकने वाले 2017 के नियमों की सांविधानिक वैधता को चुनौती वाली याचिका पर केंद्र व एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) को नोटिस जारी किया है। नियम के तहत इन लोगों को रक्तदान करने से स्थायी रूप से रोक दिया गया है। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने शरीफ डी रंगनेकर की याचिका पर केंद्र, राष्ट्रीय रक्त आधान परिषद और राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता ने खुद के समलैंगिक होने का दावा किया है। रंगनेकर ने तर्क दिया कि पूर्ण प्रतिबंध संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 17 और 21 के तहत संरक्षित समानता, सम्मान और जीवन के अधिकार का उल्लंघन है। 

एशियानेट के खिलाफ मानहानि का मामला रद्द करने से इन्कार
सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेत्री-राजनेता दिव्या स्पंदना के एशियानेट न्यूज नेटवर्क और पत्रकार विश्वेश्वर भट के खिलाफ दायर मानहानि का मामला रद्द करने से इन्कार कर दिया। स्पंदना ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग कांड में कन्नड़ फिल्म अभिनेत्रियों की कथित संलिप्तता की खबर प्रसारित की थी। स्पंदना ने आरोप लगाया कि समाचार प्रसारित होने के दौरान शिकायतकर्ता का नाम बार-बार लिया गया तथा उनके फोटो और वीडियो दिखाए गए।

कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप नहीं कर सकते...मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कार्यवाही रद्द करने से इन्कार करने वाले कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया। पीठ ने कहा कि उनका (स्पंदना का) बार-बार बुलेटिन में उल्लेख किया गया है, हम आदेश को कैसे रद्द कर सकते हैं? हम इस पर विचार नहीं कर सकते। पीठ एशियानेट न्यूज नेटवर्क और अन्य की ओर से हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई कर रही थी। 

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