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Supreme Court: RSS को मार्च की इजाजत देने के मद्रास HC के फैसले पर होगी सुनवाई, स्टालिन सरकार ने दी है याचिका

Wed, 01 Mar 2023 03:29 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Wed, 01 Mar 2023 03:29 PM IST
सार

मद्रास हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को तमिलनाडु में अपना मार्च निकालने की इजाजत दे दी थी। इसी के खिलाफ तमिलनाडु सरकार सुप्रीम कोर्ट गई है।

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को तमिलनाडु में मार्च निकालने की अनुमति देने के मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए हामी भर दी है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच ने राज्य सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी की ओर से पेश किए गए प्रतिवेदन पर गौर किया, जिसमें कहा गया था कि मामले पर तत्काल सुनवाई की जरूरत है क्योंकि यह पदयात्रा पांच मार्च से शुरू हो रही है। रोहतगी ने मांग की कि कोर्ट को इस मामले में शुक्रवार को सुनवाई करनी चाहिए। इस पर पीठ ने हामी भर दी
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गौरतलब है कि मद्रास हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को तमिलनाडु में फिर से निर्धारित तिथि पर अपना मार्च निकालने की इजाजत दे दी थी। उच्च न्यायालय ने कहा था कि विरोध प्रदर्शन मजबूत लोकतंत्र के लिए जरूरी है।
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SC: श्रीलंकाई नागरिक की समयपूर्व रिहाई पर तमिलनाडु सरकार को निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को करीब 35 साल जेल में बिता चुके एक श्रीलंकाई की समयपूर्व रिहाई के मुद्दे पर पुनर्विचार करने का आदेश दिया है। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता रिहा होने पर श्रीलंका वापस जाना चाहता है, निर्देश दिया कि उसे एक ट्रांजिट कैंप में भेजा जाए, जिस पर राज्य फैसला करे।

जस्टिस एएस ओका और जस्टिस राजेश बिंदल की पीठ ने कहा कि अदालत को बताया गया है कि राज्य सरकार ने ट्रांजिट कैंप की स्थापना की है, जहां वीजा समाप्त होने पर भी देश में रुके विदेशियों और शरणार्थियों को रखा जाता है। अगर अदालत द्वारा उस संबंध में कोई निर्देश दिया जाता है तो याचिकाकर्ता को वहां स्थानांतरित किया जाए। शीर्ष अदालत याचिकाकर्ता राजन द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने एक फरवरी 2018 की नीति के संदर्भ में समय से पहले रिहाई के अनुरोध को खारिज करने के राज्य के 12 फरवरी 2021 के आदेश को चुनौती दी है।

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