SC Updates: असम में विपक्ष के नेता ने किया सुप्रीम कोर्ट का रुख, CAA के नियम लागू होने के खिलाफ दखल की मांग
कांग्रेस के देवव्रत सैकिया उन चुनिंदा याचिकाकर्ताओं में हैं, जिन्होंने 2019 में सीएए कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
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सैकिया ने इस आवेदन के जरिए सुप्रीम कोर्ट से सीएए के नियमों को लागू किए जाने के फैसले को चुनौती दी है। गौरतलब है कि कांग्रेस के सैकिया उन चुनिंदा याचिकाकर्ताओं में हैं, जिन्होंने 2019 में सीएए कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
केरल को 5000 करोड़ रुपये की राशि देने पर केंद्र सहमत, शीर्ष कोर्ट को दी जानकारी
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने बताया कि वह केरल सरकार को उसके वित्तीय मुद्दों से निपटने के लिए बहुत विशेष एवं असाधारण उपाय के रूप में कुछ शर्तों के अधीन 5,000 करोड़ रुपये उधार लेने की अनुमति देने को तैयार है। हालांकि केरल सरकार ने कहा कि 5,000 करोड़ रुपये से उसका कोई काम नहीं बनेगा, उसकी पूर्ण न्यूनतम आवश्यकता 10,000 करोड़ रुपये है।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने एक दिन पहले केंद्र सरकार से 31 मार्च तक केरल को एक एकमुश्त बेलआउट पैकेज पर विचार करने की सलाह दी थी। केंद्र की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमण ने पीठ को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर अत्यधिक विचार करते हुए केंद्र एक बहुत ही विशेष और असाधारण उपाय के लिए तैयार है। हालांकि इसे किसी अन्य राज्य या किसी अन्य अवसर पर उदाहरण के रूप में इस्तेमाल या उद्धृत नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट चाहे तो केंद्र सरकार पेंशन, वेतन और अन्य प्रतिबद्ध व्यय के भुगतान की देनदारी पूरा करने के लिए केंद्र कुछ शर्तों के अधीन केरल को 5,000 करोड़ रुपये की उधारी के लिए सहमति देने को तैयार है।
ये शर्तें माननी होंगीकेंद्र की शर्तों के बारे में एएसजी ने बताया कि यह 5,000 करोड़ रुपये वित्तीय वर्ष 2024-25 के पहले नौ महीनों के लिए केरल की शुद्ध उधार सीमा से काट लिया जाएगा और वित्तीय वर्ष के लिए कोई तदर्थ उधार नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा 2024-25 में उधार लेने की सहमति सिर्फ केरल सरकार से निर्धारित जानकारी और दस्तावेजों की प्राप्ति पर जारी की जाएगी। राज्य वित्तीय वर्ष के लिए अपने बजट में संसाधन जुटाने और राजकोषीय स्थिति में सुधार के लिए घोषित बी योजना पेश करेगा। इसके अलावा 2024-25 की अंतिम तिमाही के लिए उधार लेने की सहमति देने से पहले केरल सरकार को योजना को क्रियान्वित करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यों को संविधान के तहत खानों और खनिजों पर कर लगाने की शक्ति से वंचित कर दिया गया है क्योंकि खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम के तहत इस क्षेत्र को केंद्र ने अपने अधिकार में ले लिया है। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली नौ न्यायाधीशों की पीठ को खनन कंपनियों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने बताया कि इंडिया सीमेंट्स मामले में 1989 का फैसला जिसमें कहा गया था कि रॉयल्टी कर है, कानूनन सही है।