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Supreme Court: उमर खालिद ने कोर्ट से जमानत याचिका ली वापस; FIR रद्द कराने शीर्ष अदालत पहुंचे सिद्धारमैया

Wed, 14 Feb 2024 12:06 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Wed, 14 Feb 2024 12:06 PM IST
सार

खालिद को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था और उस पर आपराधिक साजिश, दंगा, गैरकानूनी रूप से एकत्र होने के साथ-साथ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत कई अन्य अपराधों के आरोप लगाए गए थे। तब से वह जेल में है।
 

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SUPREME COURT NEWS AND UPDATE  Umar Khalid withdraws bail plea before Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

दिल्ली दंगे मामले में जेल में बंद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र उमर खालिद ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी जमानत अर्जी वापस ले ली है।

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2020 के पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों के पीछे की साजिश में कथित संलिप्तता को लेकर आतंकवाद विरोधी कानून यूएपीए के तहत दर्ज मामले में जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से अपनी जमानत याचिका वापस ले ली। 
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पीठ को खालिद के वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को सूचित किया कि परिस्थितियों में बदलाव के कारण जमानत याचिका वापस ली जा रही है। सिब्बल ने कहा, 'हम परिस्थितियों में बदलाव के कारण पीछे हटना चाहते हैं और उचित राहत के लिए निचली अदालत का रुख करना चाहते हैं ।'
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इसके बाद न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति पंकज मित्तल की पीठ ने उन्हें जमानत याचिका वापस लेने की अनुमति दी।

यह है मामला
खालिद को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था और उस पर आपराधिक साजिश, दंगा, गैरकानूनी रूप से एकत्र होने के साथ-साथ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत कई अन्य अपराधों के आरोप लगाए गए थे। तब से वह जेल में है।

कड़कड़डूमा अदालत ने मार्च 2022 में खालिद को जमानत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जिसने उन्हें अक्तूबर 2022 में राहत देने से इनकार कर दिया, जिससे उन्हें शीर्ष अदालत के समक्ष अपील दायर करने के लिए प्रेरित किया गया। मई 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा। शीर्ष अदालत के समक्ष उनकी याचिका को तब 14 बार स्थगित कर दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने 10 जनवरी को मामले में 'अंतिम' स्थगन दिया था क्योंकि दोनों पक्षों ने इसके लिए अनुरोध किया था। उस समय, अदालत इस मामले को स्थगित करने के लिए तैयार नहीं थी और इसे 17 जनवरी के लिए सूचीबद्ध करने वाली थी जब खालिद का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि वह एक अन्य मामले में संविधान पीठ के समक्ष शामिल होंगे।

न्यायमूर्ति पंकज मित्तल ने यह इंगित करते हुए जवाब दिया कि यह धारणा नहीं बनाई जानी चाहिए कि अदालत मामले की सुनवाई करने के लिए तैयार नहीं थी, खासकर जब वकीलों द्वारा स्थगन की मांग की जा रही थी। इससे पहले नवंबर 2023 में कोर्ट ने दोनों पक्षों की ओर से वकील न मिलने के कारण जमानत याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी थी । 

जुलाई 2023 में, मामले की सुनवाई करने वाली बेंच ने कहा कि सुनवाई दो मिनट के भीतर समाप्त हो जाएगी। हालांकि, अगस्त में जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।

2022 में दर्ज FIR रद्द करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जिसने 2022 में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान उनके और अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की उनकी याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट के छह फरवरी के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन पर और कांग्रेस महासचिव और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला, राज्य के मंत्रियों एमबी पाटिल और रामलिंगा रेड्डी पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया था। 
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