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Supreme Court Updates: मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर सुनवाई करने के लिए SC तैयार; CBI और ED से मांगा जवाब

Tue, 16 Jul 2024 03:07 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Tue, 16 Jul 2024 03:07 PM IST
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Supreme Court News and Update today, SC agrees to hear Manish Sisodia's bail plea in Excise policy case
Supreme Court - फोटो : PTI

सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को आम आदमी पार्टी (आप) नेता मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर सुनवाई करने को सहमत हो गया। बता दें, दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार और धनशोधन के मामलों में जमानत के लिए सिसोदिया की याचिकाओं पर सुनवाई के लिए शीर्ष अदालत सहमत हुआ है। 

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न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने सिसोदिया की याचिकाओं पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जवाब मांगा। वहीं, मामले की सुनवाई के लिए 29 जुलाई की तारीख तय की। 
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न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ, सिसोदिया की उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें उन्होंने आबकारी नीति से संबंधित भ्रष्टाचार और धनशोधन मामलों में अपनी याचिकाओं को फिर से शुरू करने के लिए एक आवेदन के साथ जमानत का अनुरोध किया था।
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सीबीआई ने सिसोदिया को शराब नीति मामले में उनकी कथित भूमिका के लिए 26 फरवरी 2023 को गिरफ्तार किया था। ईडी ने उन्हें नौ मार्च 2023 को सीबीआई की प्राथमिकी पर आधारित धन शोधन मामले में गिरफ्तार किया था। उन्होंने पिछले साल 28 फरवरी को दिल्ली मंत्रिमंडल से इस्तीफ दे दिया था। 

आबकारी नीति मामला: न्यायमूर्ति संजय कुमार ने बोइनपल्ली की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग किया
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश संजय कुमार ने दिल्ली आबकारी नीति संबंधी कथित घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में हैदराबाद के व्यवसायी अभिषेक बोइनपल्ली की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से मंगलवार को खुद को अलग कर लिया। जैसे ही मामला सुनवाई के लिए न्यायालय में आया, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने कहा कि इस मामले की सुनवाई किसी अन्य पीठ के समक्ष की जाएगी क्योंकि न्यायमूर्ति कुमार इसकी सुनवाई नहीं करना चाहेंगे।

पीठ ने निर्देश दिया कि इस मामले को पांच अगस्त से शुरू होने वाले सप्ताह में किसी ऐसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए, जिसमें न्यायमूर्ति कुमार शामिल नहीं हों। उसने निर्देश दिया कि बोइनपल्ली को दी गई अंतरिम जमानत की अवधि को अगले आदेश तक बढ़ाया जाए। बोइनपल्ली को उनकी पत्नी का स्वास्थ्य खराब होने के आधार पर जमानत पर रिहा किया गया था।

न्यायालय ने 20 मार्च को बोइनपल्ली को पांच सप्ताह की अंतरिम जमानत देते हुए इस बात पर गौर किया था कि बोइनपल्ली 18 महीने से हिरासत में हैं। पीठ ने बोइनपल्ली को जमानत पर रिहा करने का आदेश सुनाते हुए उनसे अपना पासपोर्ट जमा करने को कहा था और उन्हें निर्देश दिया था कि वह अपने गृहनगर हैदराबाद जाने के अलावा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से बाहर कहीं नहीं जाएं।

बोइनपल्ली ने दिल्ली उच्च न्यायालय के तीन जुलाई, 2023 के आदेश को चुनौती दी है जिसने नौ अक्टूबर, 2022 को उनकी गिरफ्तारी की वैधानिकता पर सवाल खड़ा करने वाली उनकी याचिका को खारिज कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
वैवाहिक बलात्कार के मामलों में पतियों को अभियोजन से छूट प्रदान करने वाले दंडात्मक कानूनों के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सहमति दे दी है। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ के सामने वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने दलील दी कि इस मुद्दे से जुड़ी याचिकाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इस पर सीजेआई ने कहा कि याचिकाओं पर सुनवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि इन पर 18 जुलाई को सुनवाई हो सकती है।

मामले की योग्यता पर टिप्पणी के लिए तेलंगाना के जांच आयोग के अध्यक्ष को सुप्रीम कोर्ट की फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के कार्यकाल के दौरान बिजली क्षेत्र में कथित अनियमितताओं की जांच वाले सदस्यीय जांच आयोग के अध्यक्ष जस्टिस (सेवानिवृत्त) एल नरसिम्हा रेड्डी को प्रेस कॉन्फ्रेंस में मामले की योग्यता पर टिप्पणियां के लिए फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट की आलोचना के बाद पटना हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रेड्डी ने पैनल से अपना नाम वापस ले लिया। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा, न्याय होते हुए दिखना चाहिए। वह जांच आयोग का नेतृत्व कर रहे हैं और उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मामले की गुणवत्ता के आधार पर अपने विचार व्यक्त किए हैं! हम आपको (तेलंगाना सरकार) जांच आयोग में न्यायाधीश को बदलने का अवसर दे रहे हैं। किसी अन्य न्यायाधीश की नियुक्ति करें। क्योंकि यह धारणा बननी चाहिए कि उन्होंने मामले की गुणवत्ता के आधार पर टिप्पणियां की हैं। पीठ ने तेलंगाना सरकार से रेड्डी की जगह किसी अन्य व्यक्ति के नाम की घोषणा करने को कहा।रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली वर्तमान कांग्रेस सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील अभिषेक सिंघवी ने पीठ से कहा, दृष्टिकोण की त्रुटि इसे पक्षपात का मामला नहीं बनाती है। पीठ ने कहा कि पूर्व जस्टिस को जांच शुरू होने से पहले ही मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी। ब्यूरो

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