{"_id":"69d1917ad7980ee70803b8ed","slug":"supreme-court-literacy-has-increased-many-initiatives-have-been-taken-but-domestic-violence-has-not-stopped-2026-04-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुप्रीम कोर्ट: साक्षरता बढ़ी, कई पहल हुए लेकिन घरेलू हिंसा नहीं रुकी; यह रोग ग्रस्त सामाजिक व्यवस्था का संकेत","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
सुप्रीम कोर्ट: साक्षरता बढ़ी, कई पहल हुए लेकिन घरेलू हिंसा नहीं रुकी; यह रोग ग्रस्त सामाजिक व्यवस्था का संकेत
Sun, 05 Apr 2026 04:02 AM IST
Pavan
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Sun, 05 Apr 2026 04:02 AM IST
सार
घरेलू हिंसा पर टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा- साक्षरता बढ़ी, कई पहल हुए लेकिन इस पर रोक नहीं लग सकी; यह रोग ग्रस्त सामाजिक व्यवस्था का संकेत है। जस्टिस संजय करोल व जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने इन टिप्पणियों के साथ अक्तूबर 2012 में अपनी पत्नी को आग लगाकर हत्या करने वाले व्यक्ति की दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा।
विज्ञापन
Supreme Court
- फोटो : PTI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि घरेलू हिंसा जैसी प्रथाएं अपवाद नहीं बल्कि एक रोगग्रस्त सामाजिक व्यवस्था का संकेत हैं। देश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के प्रत्यक्ष आंकड़े एक चिंताजनक तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि भारत ने महत्वपूर्ण आर्थिक विकास, साक्षरता में वृद्धि और शिक्षा एवं कार्यबल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का अनुभव किया है, फिर भी पितृसत्ता ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजमर्रा की जिंदगी का एक अभिन्न अंग बनी हुई है।
यह भी पढ़ें - आर्टेमिस-II मिशन: ISRO चीफ नारायणन ने अमेरिकी अंतरिक्ष अभियान की सराहना की, गगनयान पर भारत की तैयारियां कैसी?
जस्टिस संजय करोल व जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि संविधान समानता, लिंग के आधार पर गैर-भेदभाव और जीवन एवं स्वतंत्रता के अधिकार का वादा करता है, लेकिन ऐसे मामले दर्शाते हैं कि इतने वर्षों बाद भी, संविधान में निहित अधिकार कई लोगों के लिए अभी भी दूर हैं।
विज्ञापन
अदालत ने कहा कि कानूनी सुधारों के साथ-साथ, राज्य ने कल्याणकारी और सामाजिक परिवर्तन योजनाओं और कार्यक्रमों में निवेश किया है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाएं लैंगिक असमानता को दूर करने और लड़कियों की शिक्षा में सुधार लाने के उद्देश्य से शुरू की गई हैं, जबकि सुकन्या समृद्धि योजना और उज्ज्वला योजना जैसी पहलों का लक्ष्य महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा बढ़ाना और उनके जीवन स्तर में सुधार करना है। फिर भी, सरकार की विभिन्न शाखाओं के इस निरंतर हस्तक्षेप के बावजूद, जमीनी आंकड़े बताते हैं कि स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। यह वाकई चिंताजनक तस्वीर पेश करता है।
यह भी पढ़ें - उज्बेकिस्तान में मेडिकल स्टडी के नाम पर खेल: भारतीय दूतावास ने जारी की एडवाइजरी, कहा- बिना जांच न लें दाखिला
2023 में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के 44.8 लाख मामले दर्ज
पीठ ने 2 अप्रैल के फैसले में कहा, राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो के अनुसार, 2023 में महिलाओं के खिलाफ 44.8 लाख से अधिक अपराध दर्ज किए गए। दहेज से संबंधित हिंसा के कारण प्रतिवर्ष 6,000 से अधिक लोगों की जान जा रही है, जो लंबे समय से प्रतिबंधित प्रथाओं की निरंतरता को उजागर करती है। पीठ ने कहा, राष्ट्रीय महिला आयोग के समक्ष दर्ज शिकायतें भी लगातार घरेलू हिंसा को सबसे अधिक दर्ज शिकायतों में से एक के रूप में दर्शाती हैं। भारत ने महत्वपूर्ण आर्थिक विकास, साक्षरता में वृद्धि और शिक्षा एवं कार्यबल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का अनुभव किया है। कई शहरी क्षेत्रों में लैंगिक भूमिकाएं अब सख्ती से लागू नहीं होती हैं।
अन्य वीडियो
विज्ञापन
यह भी पढ़ें - आर्टेमिस-II मिशन: ISRO चीफ नारायणन ने अमेरिकी अंतरिक्ष अभियान की सराहना की, गगनयान पर भारत की तैयारियां कैसी?
विज्ञापन
जस्टिस संजय करोल व जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि संविधान समानता, लिंग के आधार पर गैर-भेदभाव और जीवन एवं स्वतंत्रता के अधिकार का वादा करता है, लेकिन ऐसे मामले दर्शाते हैं कि इतने वर्षों बाद भी, संविधान में निहित अधिकार कई लोगों के लिए अभी भी दूर हैं।
विज्ञापन
अदालत ने कहा कि कानूनी सुधारों के साथ-साथ, राज्य ने कल्याणकारी और सामाजिक परिवर्तन योजनाओं और कार्यक्रमों में निवेश किया है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाएं लैंगिक असमानता को दूर करने और लड़कियों की शिक्षा में सुधार लाने के उद्देश्य से शुरू की गई हैं, जबकि सुकन्या समृद्धि योजना और उज्ज्वला योजना जैसी पहलों का लक्ष्य महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा बढ़ाना और उनके जीवन स्तर में सुधार करना है। फिर भी, सरकार की विभिन्न शाखाओं के इस निरंतर हस्तक्षेप के बावजूद, जमीनी आंकड़े बताते हैं कि स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। यह वाकई चिंताजनक तस्वीर पेश करता है।
यह भी पढ़ें - उज्बेकिस्तान में मेडिकल स्टडी के नाम पर खेल: भारतीय दूतावास ने जारी की एडवाइजरी, कहा- बिना जांच न लें दाखिला
2023 में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के 44.8 लाख मामले दर्ज
पीठ ने 2 अप्रैल के फैसले में कहा, राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो के अनुसार, 2023 में महिलाओं के खिलाफ 44.8 लाख से अधिक अपराध दर्ज किए गए। दहेज से संबंधित हिंसा के कारण प्रतिवर्ष 6,000 से अधिक लोगों की जान जा रही है, जो लंबे समय से प्रतिबंधित प्रथाओं की निरंतरता को उजागर करती है। पीठ ने कहा, राष्ट्रीय महिला आयोग के समक्ष दर्ज शिकायतें भी लगातार घरेलू हिंसा को सबसे अधिक दर्ज शिकायतों में से एक के रूप में दर्शाती हैं। भारत ने महत्वपूर्ण आर्थिक विकास, साक्षरता में वृद्धि और शिक्षा एवं कार्यबल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का अनुभव किया है। कई शहरी क्षेत्रों में लैंगिक भूमिकाएं अब सख्ती से लागू नहीं होती हैं।
अन्य वीडियो
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन