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Land Acquisition: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, भारत-चीन सीमा के पास भूमि अधिग्रहण पर बढ़ाकर नहीं मिलेगा मुआवजा

Fri, 27 Jun 2025 06:40 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Fri, 27 Jun 2025 06:40 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण के मामले में मिलने वाले मुआवजे को लेकर अहम आदेश पारित किया है। जस्टिस केवी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने भारत-चीन सीमा के पास भूमि अधिग्रहण के लिए मुआवजा बढ़ाने के आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी। जानिए क्या है पूरा मामला

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Supreme Court Land Acquisition near India China border enhancing compensation Justice K V Viswanathan Bench
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : एएनआई

विस्तार

भूमि अधिग्रहण के एक मुकदमे में सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने अहम आदेश पारित किया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि भारत-चीन सीमा के पास भूमि अधिग्रहण मुआवजा नहीं बढ़ेगा। इस फैसले के साथ सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल में अधिग्रहीत भूमि पर गौहाटी हाईकोर्ट के फैसले पर रोक भी लगा दी। पूरा मामला अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा के पास रक्षा संबंधी परियोजना के लिए 537 एकड़ भूमि अधिग्रहण का है। शीर्ष अदालत में दो जजों की खंडपीठ ने मुआवजे को बढ़ाने संबंधी आदेश पर शुक्रवार को रोक लगा दी।

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सरकार ने कहा- लाभार्थियों को मुआवजा पहले ही दिया जा चुका है
न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने केंद्र और अन्य की तरफ से दायर याचिका पर यह आदेश पारित किया। इस याचिका में गौहाटी हाईकोर्ट की ईटानगर पीठ के मार्च 2025 के आदेश को चुनौती दी गई थी। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की पीठ को बताया कि लाभार्थियों को मुआवजा पहले ही दिया जा चुका है और भूमि का अधिग्रहण भी कर लिया गया है। लेकिन बाद में एक व्यक्ति ने पावर ऑफ अटॉर्नी (मुख्तारनामा) के आधार पर यह मामला दायर कर दिया।
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पहले करीब 70 करोड़ रुपये का मुआवजा, जिला अदालत ने 410 करोड़ रुपये से अधिक कर दिया
याचिका में दावा किया गया कि पहले सभी लाभार्थियों के लिए करीब 70 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया था लेकिन अक्तूबर 2024 में संबंधित मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने इसे बढ़ाकर 410 करोड़ रुपये से अधिक कर दिया। केंद्र की ओर से दलील दी गई कि संबंधित मामला एक धोखाधड़ी पर आधारित था और व्यक्ति ने 100 से अधिक व्यक्तियों का फर्जी मुख्तारनामा बनाया था।
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हाईकोर्ट पहुंची सरकार को नहीं मिली राहत, 50 प्रतिशत रकम तीन महीने के भीतर जमा करने का निर्देश
सरकार ने संबंधित मामले में पारित आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। केंद्र ने कहा कि उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया था कि संदर्भ मामले में पारित आदेश इस शर्त के अधीन स्थगित रहेगा कि बढ़ाई गई राशि का 50 प्रतिशत तीन महीने के भीतर जमा किया जाए। सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी, जिसने मामले की सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की।

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प्रतिवादियों को नोटिस जारी, 18 अगस्त को अगली सुनवाई
शीर्ष अदालत में दो जजों की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद शुक्रवार को पारित आदेश में कहा, प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया जाए। विवादित आदेश के क्रियान्वयन पर इस शर्त पर रोक रहेगी कि याचिकाकर्ता (केंद्र) हाईकोर्ट के समक्ष की गई अपनी पेशकश पर अमल करते हुए चार सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में बढ़ी राशि का 10 प्रतिशत जमा करें। शीर्ष कोर्ट ने इस मामले में निचली अदालत के अक्तूबर 2024 के आदेश पर भी रोक लगा दी और मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 अगस्त की तारीख निर्धारित की।

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