{"_id":"65f9b01c5326495a500a1090","slug":"supreme-court-justify-framing-of-charges-strong-suspicion-role-of-accused-in-offence-2024-03-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Supreme Court: 'आरोप तय करने को पुख्ता शक का आधार काफी'; आपराधिक केस में सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ का बड़ा फैसला","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Supreme Court: 'आरोप तय करने को पुख्ता शक का आधार काफी'; आपराधिक केस में सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ का बड़ा फैसला
Tue, 19 Mar 2024 09:02 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Tue, 19 Mar 2024 09:02 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर निचली अदालत में जारी आपराधिक मामले में पुख्ता शक के आधार पर आरोप तय किए जाते हैं तो इसे भी पर्याप्त माना जाएगा। शीर्ष अदालत में दो जजों की खंडपीठ ने आपराधिक मामले में आरोप तय किए जाने की प्रक्रिया निरस्त करने से इनकार कर यह फैसला पारित किया।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
आपराधिक मामले में आरोपी की पुख्ता भूमिका के आधार पर आरोप तय किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने साफ किया कि मजबूत संदेह के आधार पर तय किया जाने वाला आरोप भी पर्याप्त माना जाएगा। उच्चतम न्यायालय में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और केवी विश्वनाथन की पीठ ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में आरोप तय करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा, मुकदमे से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर किसी अपराध में आरोपी की भूमिका को लेकर मजबूत संदेह आरोप तय किए जाने के लिए पर्याप्त है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- यहां 'मुकदमे की ड्रेस रिहर्सल' नहीं
खंडपीठ ने कहा, शीर्ष अदालत को 'मुकदमे की ड्रेस रिहर्सल' नहीं करनी चाहिए। खास तौर पर प्रारंभिक चरण में जहां केवल आरोप लगाए जाएंगे। निचली अदालत प्रथम दृष्टया आरोपी के खिलाफ उपलब्ध प्रमाणों और दृष्टिकोण के आधार पर आरोप तय करती है।
अपराध किए जाने में पुख्ता शक के आधार पर आरोप तय करने का अधिकार
न्यायमूर्ति विश्वनाथन की पीठ ने 46 पन्ने के अपने फैसले में कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से पता चलता है कि आरोपी के खिलाफ संदेह का आधार मजबूत है तो अदालत आरोप तय करने को उचित ठहराएगी। अदालत ने कहा, किसी अपराध किए जाने में पुख्ता शक के आधार पर तथ्यात्मक प्रमाण मिलने की स्थिति में आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए जाने को कोर्ट उचित ठहराएगा।
विज्ञापन
25 साल से लंबित मुकदमे को निष्पादित करने में तेजी लाने का निर्देश
अदालत ने दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाले पुनीत सभरवाल और आरसी सभरवाल की तरफ से दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी। हाईकोर्ट ने 2006 के आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया था। ट्रायल कोर्ट ने भ्रष्टाचार के आरोप तय किए थे। मंगलवार को पारित आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने 25 साल से लंबित मुकदमे को निष्पादित करने में तेजी लाने का निर्देश भी दिया।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- यहां 'मुकदमे की ड्रेस रिहर्सल' नहीं
खंडपीठ ने कहा, शीर्ष अदालत को 'मुकदमे की ड्रेस रिहर्सल' नहीं करनी चाहिए। खास तौर पर प्रारंभिक चरण में जहां केवल आरोप लगाए जाएंगे। निचली अदालत प्रथम दृष्टया आरोपी के खिलाफ उपलब्ध प्रमाणों और दृष्टिकोण के आधार पर आरोप तय करती है।
विज्ञापन
अपराध किए जाने में पुख्ता शक के आधार पर आरोप तय करने का अधिकार
न्यायमूर्ति विश्वनाथन की पीठ ने 46 पन्ने के अपने फैसले में कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से पता चलता है कि आरोपी के खिलाफ संदेह का आधार मजबूत है तो अदालत आरोप तय करने को उचित ठहराएगी। अदालत ने कहा, किसी अपराध किए जाने में पुख्ता शक के आधार पर तथ्यात्मक प्रमाण मिलने की स्थिति में आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए जाने को कोर्ट उचित ठहराएगा।
विज्ञापन
25 साल से लंबित मुकदमे को निष्पादित करने में तेजी लाने का निर्देश
अदालत ने दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाले पुनीत सभरवाल और आरसी सभरवाल की तरफ से दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी। हाईकोर्ट ने 2006 के आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया था। ट्रायल कोर्ट ने भ्रष्टाचार के आरोप तय किए थे। मंगलवार को पारित आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने 25 साल से लंबित मुकदमे को निष्पादित करने में तेजी लाने का निर्देश भी दिया।