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जस्टिस राजेश बिंदल बोले: 'समय पर विवाद निपटान जरूरी...', इंफ्रास्ट्रक्चर में मजबूत आर्बिट्रल संस्थाओं की जरूरत

Sat, 06 Dec 2025 09:14 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Sat, 06 Dec 2025 09:14 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट के जज राजेश बिंदल ने कहा कि भारत के तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में विवादों को रोकने और समय पर समाधान के लिए मजबूत आर्बिट्रल संस्थाओं की जरूरत है।

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Supreme Court Judge Urges Stronger Arbitral Institutions for Infrastructure Sector in India
जस्टिस राजेश बिंदल (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस राजेश बिंदल ने कहा कि भारत के तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में समय पर प्रोजेक्ट पूरा करने और विवादों से रोकने के लिए मजबूत आर्बिट्रल संस्थाओं की आवश्यकता है। जस्टिस बिंदल यह बात 5वीं द्विवार्षिक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ऑन कंस्ट्रक्शन लॉ एंड आर्बिट्रेशन में बोलते हुए कही, जिसे सोसाइटी ऑफ कंस्ट्रक्शन लॉ ने खैतान एंड कंपनी, लार्सन एंड टुब्रो और जेएसए एडवोकेटस के सहयोग से आयोजित किया।

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निर्माण कानून और विवाद समाधान पर जोर
जस्टिस बिंदल ने कहा कि निर्माण कानून एक विशेषज्ञ क्षेत्र है। भारत में बिजली, सड़कें, मेट्रो, पोर्ट और बांधों जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर के तेजी से बढ़ने के कारण विवादों की संख्या भी बढ़ रही है। उन्होंने कहा गतिविधियां बढ़ रही हैं, इसलिए विवाद बढ़ेंगे कुछ वास्तविक, कुछ नए। हमें इन्हें हर चरण में सुलझाना चाहिए बजाय इसके कि पूरे विवाद को लंबित करके प्रोजेक्ट को रोक दिया जाए।
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उन्होंने संविदा मसौदा को भी विवाद कम करने का मुख्य तरीका बताया। जज बिंदल ने कहा कि सबसे अच्छा समझौता वह है जिसमें सभी लागू कानून और नियम एक दस्तावेज में शामिल हों, जिससे ओवरलैप या गलत धाराओं से बचा जा सके।
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AI और भविष्य के विवाद समाधान
जज बिंदल ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कारण उत्पन्न चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया, जैसे कि नकली साक्ष्य, मौजूद न होने वाले न्यायनिर्णय और खुली एआई प्लेटफॉर्म पर गोपनीयता जोखिम। इस मौके पर एटॉर्नी जनरल आर वेंकटरामणि ने निर्माण क्षेत्र के लिए विशेष कानून की आवश्यकता जताई और कानून के छात्रों को इस क्षेत्र में भविष्य तैयार करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

दिल्ली हाईकोर्ट के जज तेजस कारिया ने भी भारत के निर्माण क्षेत्र की तेजी और जटिलता पर जोर देते हुए कहा कि भविष्य में निर्माण विवाद तेज, डेटा-आधारित और तकनीक समर्थित होंगे।


आर्बिट्रल संस्थाओं की मजबूती पर जोर
सोसाइटी ऑफ इंडियन लॉ फर्म्स के अध्यक्ष ललित भसीन ने वर्तमान प्रणाली की कमजोरियों को उजागर किया। उन्होंने कहा कि न्यायालयों के माध्यम से निर्माण विवादों का समाधान लगभग असफल रहा है और आर्बिट्रेशन को भी मजबूती देने के लिए विश्वसनीय आर्बिट्रल संस्थाओं की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक सामंजस्यपूर्ण दृष्टिकोण को पुनर्जीवित करना ही एकमात्र रास्ता है।

सम्मेलन में खैतान एंड कंपनी और एससीएल इंडिया द्वारा जारी व्हाइट पेपर का भी विमोचन हुआ। इसका शीर्षक है: ग्लोबल फ्रेमवर्क के तहत देरी और व्यवधान: भारत में संरचित निर्माण विवाद समाधान का ढांचा। यह पेपर सुझाव देता है कि स्थापित मानकों, मजबूत प्रोग्राम प्रबंधन और तकनीक-संचालित साक्ष्यों के माध्यम से निर्माण विवादों का समाधान अधिक स्पष्ट, सुसंगत और भरोसेमंद बनाया जा सकता है।

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