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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट चुनाव सुधार को लेकर नए नियमों का परीक्षण करने को तैयार, ECI और केंद्र को नोटिस

Wed, 15 Jan 2025 12:43 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Wed, 15 Jan 2025 12:43 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश की उस याचिका पर केंद्र और निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा, जिसमें 1961 के चुनाव संचालन नियम में हाल के संशोधनों को चुनौती दी गई है। संशोधित नियम सीसीटीवी और अन्य चुनाव संबंधी दस्तावेजों तक जनता की पहुंच को प्रतिबंधित करते हैं।

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Supreme Court issues notice to Centre poll panel on Jairam Ramesh plea challenging amendments Election Rules
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव जयराम रमेश की याचिका पर केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। जयराम रमेश ने चुनाव संचालन नियम 1961 में किए गए संशोधनों को चुनौती दी है। संशोधनों के तहत सीसीटीवी फुटेज, वेबकास्टिंग रिकॉर्डिंग और उम्मीदवारों के वीडियो फुटेज सहित इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों के सार्वजनिक निरीक्षण पर रोक लगाई गई है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई 17 मार्च से शुरू होने वाले सप्ताह में तय की है।

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क्या है मामला?
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश की उस याचिका पर केंद्र और निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा, जिसमें 1961 के चुनाव संचालन नियम में हाल के संशोधनों को चुनौती दी गई है। संशोधित नियम सीसीटीवी और अन्य चुनाव संबंधी दस्तावेजों तक जनता की पहुंच को प्रतिबंधित करते हैं। प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने कांग्रेस नेता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी की दलीलों पर गौर किया और याचिका पर नोटिस जारी किए। 
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सरकार ने किन नियमों को बदला? 
चुनाव संचालन नियम, 1961 के नियम 93 अनुबंधों के मुताबिक, चुनाव से संबंधित सभी 'कागजात' सार्वजनिक निरीक्षण के लिए रखे जाएंगे। यानी ये सार्वजनिक स्तर पर उपलब्ध होंगे। अब केंद्र सरकार ने इस नियम में संशोधन किया है। इसके तहत अब नियम 93 की शब्दावली में 'कागजातों' के बाद 'जैसा कि इन नियमों में निर्दिष्ट है' शब्द जोड़े गए हैं।
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चुनाव आयोग से मशवरे के बाद केंद्रीय कानून और विधि मंत्रालय की तरफ से किएगए बदलावों के बाद अब चुनाव संबंधी सभी दस्तावेजों को सार्वजनिक निरीक्षण के लिए नहीं रखा जाएगा। अब आम जनता सिर्फ उन्हीं चुनाव संबंधी दस्तावेजों को देख सकेगी, जिनका जिक्र चुनाव कराने से जुड़े नियमों में पहले से तय होगा। 


इसका क्या असर होने वाला है?
चूंकि नामांकन फार्म, चुनाव एजेंट की नियुक्ति, परिणाम और चुनाव खाता विवरण जैसे दस्तावेजों का जिक्र चुनाव संचालन नियमों में किया गया है, इसलिए इन्हें सार्वजनिक निरीक्षण के लिए बरकरार रखा जाएगा। हालांकि, आदर्श आचार संहिता अवधि के दौरान सीसीटीवी कैमरा फुटेज, वेबकास्टिंग फुटेज और उम्मीदवारों की वीडियो रिकॉर्डिंग जैसे इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज चुनाव संचालन नियमों के दायरे में नहीं आते हैं। ऐसे में यह दस्तावेज जनता की पहुंच से दूर हो जाएंगे। पढ़ें पूरी खबर

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