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Supreme Court: NRC से महिला का नाम बाहर करने के मामले में असम और केंद्र सरकार को नोटिस, निर्वासन पर भी रोक

Sat, 24 Sep 2022 06:31 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sat, 24 Sep 2022 06:31 PM IST
सार

याचिकाकर्ता महिला को विदेशी घोषित करके उसका नाम अंतिम राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (एनआरसी) से बाहर कर दिया गया था। फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल, बोंगाईगांव ने जून 2017 में आदेश जारी कर महिला को विदेशी घोषित किया था। विदेशी ट्रिब्यूनल बोंगाईगांव का दावा था कि महिला 25 मार्च, 1971 के बाद अवैध रूप से बांग्लादेश से भारत में आई थी।

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Supreme Court issues notice to Assam and Central Government in excluded of women name from NRC
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उच्चतम न्यायालय ने शनिवार को एक महिला की याचिका पर केंद्र और असम सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हेमा कोहली की पीठ ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय के जून 2019 के फैसले को चुनौती देने वाली महिला की याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमति जताई है। महिला की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि महिला के निर्वासन के लिए प्रशासन द्वारा कोई कदम ना उठाया जाए।  

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गौरतलब है कि याचिकाकर्ता महिला को विदेशी घोषित करके उसका नाम अंतिम राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (एनआरसी) रजिस्टर से बाहर कर दिया गया था। फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल, बोंगाईगांव ने जून 2017 में आदेश जारी कर महिला को विदेशी घोषित किया था। विदेशी ट्रिब्यूनल बोंगाईगांव का दावा था कि महिला 25 मार्च, 1971 के बाद अवैध रूप से बांग्लादेश से भारत में आई थी। जिसके बाद महिला ने गुवाहाटी हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि हाई कोर्ट ने विदेशी ट्रिब्यूनल, बोंगाईगांव के जून 2017 के आदेश की पुष्टि करते हुए उसकी याचिका को खारिज कर दिया। गुवाहाटी हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ महिला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। 
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महिला ने याचिका में कहा है कि वह जन्म से भारत का नागरिक है। पूरे परिवार के सदस्यों के साथ-साथ उसके माता-पिता के साथ-साथ उसके ससुराल वालों को सक्षम प्राधिकारी द्वारा भारतीय नागरिक घोषित किया गया है। एनआरसी के मसौदे में याचिकाकर्ता का नाम उसके पूरे परिवार के सदस्यों के साथ था, लेकिन अंतिम सूची में उसका नाम हटा दिया गया। महिला का पक्ष रख रहे अधिवक्ता पीयूष कांति रॉय ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता के परिवार के अन्य सभी सदस्यों को हालांकि एनआरसी में शामिल किया गया था। 
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पीठ ने कहा कि ट्रिब्यूनल के साथ-साथ गुवाहाटी उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने महिला द्वारा पेश किए  दस्तावेजों को देखे बिना याचिकाकर्ता को विदेशी घोषित कर दिया, ये अदालत की विफलता है।

 
इस मामले में पीठ ने सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए असम और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। इसका जवाब उन्हें तीन सप्ताह में दाखिल करना होगा। साथ ही पीठ ने मामले को 17 अक्टूबर को सुनवाई के लिए पोस्ट किया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिए गए अपने आदेश में कहा कि मामले के सूचीबद्ध होने की अगली तारीख तक याचिकाकर्ता के निर्वासन के लिए कोई कदम नहीं उठाया जाएगा।

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