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Supreme Court: सरदारों पर बने चुटकुलों पर अदालत गंभीर, कहा- बच्चों और समुदायों को संवेदनशील बनाने की जरूरत

Fri, 22 Nov 2024 07:17 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Fri, 22 Nov 2024 07:17 AM IST
सार

जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने इस समस्या के हल के लिए व्यावहारिक उपाय तलाशने का सुझाव दिया। पीठ ने कहा, इस पर विचार होना चाहिए कि क्या स्कूलों में बच्चों को संवेदनशील बनाया जा सकता है।

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Supreme Court is serious about jokes made on Sardars, said- there is a need to sensitize communities
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सिखों और सरदारों को निशाना बनाने वाले चुटकुलों के खिलाफ बच्चों और समुदायों को संवेदनशील बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। शीर्ष कोर्ट ने इसे महत्वपूर्ण मुद्दा करार दिया। कोर्ट ऐसे चुटकुलों पर रोक की मांग वाली 2015 की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
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पीठ का तर्क
जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने इस समस्या के हल के लिए व्यावहारिक उपाय तलाशने का सुझाव दिया। पीठ ने कहा, इस पर विचार होना चाहिए कि क्या स्कूलों में बच्चों को संवेदनशील बनाया जा सकता है। वकील हरविंदर चौधरी ने इस याचिका में तर्क दिया कि सिखों व सरदारों का उपहास करने वाले चुटकुले संविधान के समानता व सम्मान के अधिकार का उल्लंघन करते हैं। कोर्ट सरकार को ऐसे चुटकुले चलाने वाली वेबसाइटों व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से इन्हें हटाने के लिए कदम उठाने का निर्देश दे।
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हरविंदर चौधरी ने निजी अनुभवों का किया जिक्र
हरविंदर चौधरी ने निजी अनुभवों का भी जिक्र किया। बताया, मैं हाईकोर्ट में बहस कर रही थी, तभी 12 बज गए और मेरा केस नंबर भी 12 था। मेरा मजाक उड़ाया गया। उन्होंने स्कूलों में सिख बच्चों को परेशान किए जाने पर भी चिंता जताई। याचिका में दावा किया गया कि शर्मिंदगी के डर से बच्चे सिंह व कौर उपनाम रखने से बचने लगे हैं।  ब्यूरो
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सुझाव देने के लिए  आठ सप्ताह का वक्त
पीठ ने चौधरी व दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (डीएसजीएमसी) से आठ सप्ताह में कार्रवाई योग्य सुझाव मांगे। पिछली सुनवाई में, समिति ने कहा था कि ऐसेे चुटकुले सिख समुदाय की गरिमा कम करते हैं। चौधरी ने प्रस्ताव दिया, ऐसी सामग्री बनाने या साझा करने के लिए जिम्मेदार लोगों को राष्ट्रीय कानूनी सहायता कोष में मुआवजा देना चाहिए।
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