Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई मेट्रो पर लगाया 10 लाख का जुर्माना, सीमा से ज्यादा पेड़ काटने का मामला
कोर्ट ने आईआईटी बॉम्बे के डायरेक्टर को कहा है कि वह एक टीम बनाए, जो इसकी निगरानी करे और तीन हफ्ते में रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है।
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आईआईटी बॉम्बे के निदेशक को दिया निर्देश
कोर्ट ने कहा कि MMRCLको जुर्माने की राशि दो हफ्ते में जंगल के संरक्षक के पास जमा करानी होगी ताकि संरक्षक यह सुनिश्चित कर सके कि वनरोपण का काम ठीक से हो सके। कोर्ट ने आईआईटी बॉम्बे के डायरेक्टर को कहा है कि वह एक टीम बनाए, जो इसकी निगरानी करे और तीन हफ्ते में रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है। बता दें कि बीते साल सुप्रीम कोर्ट ने आरे जंगल में 84 पेड़ काटने की मंजूरी दी थी। मेट्रो के लिए कार शेड के निर्माण के लिए यह मंजूरी दी गई थी।
बृंदा करात की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने सीपीआई (एम) नेता बृंदा करात की याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। बृंदा करात ने याचिका में मांग की थी कि दिल्ली दंगे के मामले में अनुराग ठाकुर, प्रवेश वर्मा के भाषण को लेकर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। बृंदा करात ने अपनी याचिका में भाजपा नेताओं पर कथित तौर पर नफरत फैलाने का आरोप लगाया है।
नगालैंड शहरी स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर शीर्ष ने केंद्र से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र से यह स्पष्ट करने के लिए कहा कि क्या नागालैंड में नगरपालिका और नगर परिषद चुनावों में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण की संवैधानिक योजना का उल्लंघन किया जा सकता है। न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने कहा कि नगालैंड नगरपालिका अधिनियम 2001 को निरस्त करके चुनाव कराने के बारे में शीर्ष अदालत को दिए गए वचन से बचने के लिए एक 'सरल तरीका' अपनाया गया है। शीर्ष अदालत ने पांच अप्रैल को नागालैंड में यूएलबी के चुनाव को अगले आदेश तक रद्द करने वाली 30 मार्च की अधिसूचना पर रोक लगा दी थी। ये चुनाव लगभग दो दशकों के बाद 16 मई को होने थे।
आदिवासी संगठनों और नागरिक समाज समूहों के दबाव के बाद नगालैंड विधानसभा ने नगरपालिका अधिनियम को निरस्त करने और चुनाव न कराने का प्रस्ताव पारित किया था।
इससे पहले, 30 मार्च को राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) ने नगालैंड नगरपालिका अधिनियम 2001 के निरसन के मद्देनजर अगले आदेश तक पूर्व में अधिसूचित चुनाव कार्यक्रम को रद्द करने की अधिसूचना जारी की थी।
इस वजह से प्रवासियों को राशन कार्ड से वंचित नहीं रखा जा सकता
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को साफ कर दिया है कि केंद्र और राज्य सरकारें केवल इस आधार पर प्रवासी श्रमिकों को राशन कार्ड देने से इनकार नहीं कर सकती हैं कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत जनसंख्या अनुपात ठीक से नहीं रखा गया है।
न्यायमूर्ति एमआर शाह और अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने इस मुद्दे पर सुनवाई की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को कल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम यह नहीं कह रहे हैं कि सरकार अपना कर्तव्य निभाने में विफल रही है या कोई लापरवाही हुई है। फिर भी, अगर कुछ लोग छूट गए हैं, तो केंद्र और राज्य सरकारों को यह देखना चाहिए कि उन्हें राशन कार्ड मिले।
शीर्ष अदालत ने कहा कि यह सरकार का काम है कि वह जरूरतमंदों तक पहुंचे। केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने शुरुआत में कहा कि 28.86 करोड़ श्रमिकों ने 'ई-श्रम' पोर्टल पर पंजीकरण कराया है, जो असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों जैसे निर्माण श्रमिकों, प्रवासी मजदूरों, सड़क विक्रेताओं और घरेलू मदद के लिए है।
समलैंगिक दंपती को गोद लेने की अनुमति बच्चों के लिए खतरा
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने सुप्रीम कोर्ट में विवाह समानता से संबंधित विभिन्न याचिकाओं पर एक हस्तक्षेप आवेदन दायर कर कहा है कि समलैंगिक दंपती को गोद लेने की अनुमति देना बच्चों को खतरे में डालना है। यह माता-पिता की भूमिका और उनकी पहचान को लेकर बच्चों की समझ को प्रभावित कर सकता है। आयोग ने कहा कि समलैंगिक दंपती के लिए पहले एक उचित कानूनी व्यवस्था जरूरी है। उसके बाद बच्चों को समानता के दायरे में लाना दोनों यानी बच्चों और समलैंगिक दंपती दोनों के हित में होगा। बच्चों का लालन-पालन करना और समलैंगिक दंपती की ओर से उन्हें गोद लेना असामयिक है।
आयोग ने आगे कहा कि बच्चों को समलैंगिक दंपती को पालने के लिए देना, उन्हें केवल प्रयोग के लिए देने जैसा होगा जिसमें बच्चों को संघर्ष करना होगा। यह बच्चों के हित में नहीं है क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति के समान मानवाधिकार हैं और यह बच्चों पर भी लागू होता है जिन्हें सुरक्षित पालन-पोषण का अधिकार है।
SC ने 2018 में विधायक, पूर्व विधायक की हत्या के दो आरोपियों को जमानत दी
सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2018 में आंध्र प्रदेश में कथित तौर पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से जुड़े लोगों द्वारा एक मौजूदा और एक पूर्व विधायक की हत्या के मामले में दो आरोपियों को सोमवार को जमानत दे दी। मामले में सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने कहा किवह एक राय बनाने में असमर्थ है कि कड़े गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत अपराध करने के दो आरोपियों के खिलाफ आरोपों पर विश्वास करने के लिए उचित आधार प्रथम दृष्टया सच थे।
इसके साथ ही जस्टिस एएस ओका और राजेश बिंदल की पीठ ने अमरावती में आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के दिसंबर 2020 के आदेश को रद्द कर दिया, जिसने मामले में उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था।
SC ने आसाराम मामले में IPS अधिकारी को तलब करने के राजस्थान HC के आदेश को रद्द कर दिया
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया। इस आदेश में राजस्थान हाईकोर्ट ने एक आईपीएस अधिकारी को बलात्कार के मामले में स्वयंभू संत आसाराम बापू द्वारा दायर अपील के सिलसिले में साक्ष्य दर्ज करने के लिए समन भेजा था।
जोधपुर के एक आश्रम में 2013 में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में निचली अदालत ने 2018 में आसाराम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। मामले में आसाराम के वकील ने तर्क दिया कि लड़की ने अपनी हस्तलिखित शिकायत या 20 अगस्त, 2013 को पुलिस द्वारा दर्ज किए गए बयान में 'कुटिया' के अंदरूनी हिस्सों का कोई विवरण नहीं दिया था।
जस्टिस संजीव खन्ना और एमएम सुंदरेश की पीठ ने कहा कि विवादित फैसला टिकाऊ नहीं है और तथ्यों और कानून दोनों में गलत है।