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सुप्रीम कोर्ट: कश्मीरी प्रवासियों के लिए अहम फैसला, सेवानिवृत्ति के बाद तीन साल से ज्यादा नहीं रख सकते आवास

Tue, 12 Oct 2021 06:21 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Tue, 12 Oct 2021 06:21 AM IST
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Supreme Court: Important decision for Kashmiri migrants, can't keep housing for more than three years after retirement
supreme court - फोटो : पीटीआई

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कश्मीरी प्रवासी सरकारी कर्मचारी सेवानिवृत्ति के बाद तीन साल से ज्यादा सरकारी आवास को अपने पास नहीं रख सकता। साथ ही कहा कि सामाजिक या आर्थिक आधार पर उन्हें अनिश्चितकाल तक सरकारी आवास में रहने नहीं दिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि सरकारी आवास केवल सेवारत कर्मचारियों के लिए होता है, उसमें आजीवन नहीं रहा जा सकता।

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जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस एएस बोपन्ना ने कहा कि प्रवासी कश्मीरी सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों को बेमियादी सरकारी आवास में रहने की अनुमति देने वाला ऑफिस मेमोरेंडम असांविधानिक है और यह पूरी तरह मनमाना और भेदभावपूर्ण है। पीठ ने कहा कि हम इसे तो उचित मान सकते थे कि सेवानिवृत्ति के बाद तीन साल तक यदि उन्हें रहने का कोई वैकल्पिक ठिकाना नहीं मिला हो तो वह सरकारी आवास में रह सकते हैं।

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जांच में सहयोग न करके भाग जाने वाले आरोपियों की मदद न करें अदालतें

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि अदालतों को किसी ऐसे व्यक्ति की मदद के लिए नहीं आना चाहिए जो जांच एजेंसियों से सहयोग नहीं करते और भाग जाते हैं। यूपी के बलिया में मार्च 2017 में दंगा करने के आरोप में एक व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश दिए। इस आरोपी की चार्जशीट नवंबर 2018 में ही दायर हो चुकी है, जिसमें उस पर दंगे के साथ-साथ हत्या के प्रयास का भी आरोप है। 

अग्रिम जमानत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसकी एक याचिका जून में खारिज की थी। जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एएस बोपन्ना ने कहा कि यह व्यक्ति लगातार जांच से भाग रहा है। हाईकोर्ट ने दिसंबर 2019 में उसे 30 दिन में आत्मसमर्पण करने के लिए कहा था। तब भी वह नहीं माना, उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे आरोपी को अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती।

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