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30 साल पहले जिस दिन राम मंदिर का शिलान्यास हुआ उसी दिन सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला

Sat, 09 Nov 2019 06:16 PM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Sat, 09 Nov 2019 06:16 PM IST
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Supreme Court historic verdict on the day of Ram Mandir shilanyas day 9 november
अयोध्या फैसला - फोटो : Amar Ujala

अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने विवादित जमीन पर रामलला के हक में निर्णय सुनाया। साथ ही मुस्लिम पक्ष को नई मस्जिद बनाने के लिए अलग से पांच एकड़ जमीन देने के भी निर्देश हैं। इसके अलावा कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े और शिया वक्फ बोर्ड के दावों को खारिज कर दिया है। 

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आपको बता दें कि अयोध्या मामला पर आज यानी 9 नवंबर को फैसला सुनाया गया। आज ही के दिन 9 नवंबर 1989 को अयोध्या में राम मंदिर के लिए शिलान्यास किया गया था। यानी  30 साल पहले जिस दिन मंदिर की नींव पड़ी थी उसी दिन सुप्रीम कोर्ट ने रामलला के हक में निर्णय सुनाया। 
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2010 में सुनाया था फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2010 में अयोध्या मामले पर जो फैसला सुनाया था उसे सभी पक्षों ने मानने से इनकार कर दिया था जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2.77 एकड़ की विवादित भूमि को मुस्लिम पक्ष, रामलला विराजमान और निर्मोही अखाड़े के बीच बराबर बांट दिया था।


285 पन्नों के फैसले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा था कि यह जमीन का छोटा सा टुकड़ा है, जहां देवदूत भी पैर रखने से डरते हैं। कोर्ट ने आगे कहा था कि हम वह फैसला दे रहे हैं, जिसके लिए पूरा देश सांस थामें बैठा है। हालांकि, हाईकोर्ट के उस फैसले को किसी भी पक्ष ने मानने से इनकार कर दिया था। 

तीन महीने में ट्रस्ट बनाने का निर्देश

अयोध्या फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को राम मंदिर बनाने के लिए तीन महीने में ट्रस्ट बनाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि 02.77 एकड़ जमीन केंद्र सरकार के अधीन ही रहेगी। साथ ही मुस्लिम पक्ष को नई मस्जिद बनाने के लिए अलग से पांच एकड़ जमीन देने के भी निर्देश हैं। 

कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े और शिया वक्फ बोर्ड के दावों को खारिज कर दिया है। हालांकि निर्मोही अखाड़े को ट्रस्ट में जगह देने की अनुमति को स्वीकार कर लिया गया है।

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