फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court High Court cannot cancel bail without notice, bench said accused get fair hearing opportunity

SC: शीर्ष अदालत ने कहा- बिना नोटिस के जमानत रद्द नहीं कर सकता हाईकोर्ट, आरोपी को मिले सुनवाई का उचित अवसर

Sun, 05 Nov 2023 06:12 AM IST
यशोधन शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: यशोधन शर्मा Updated Sun, 05 Nov 2023 06:12 AM IST
सार

शीर्ष अदालत ने मद्रास हाईकोर्ट के सात जुलाई 2023 के उस आदेश को रद्द करते हुए कानूनी प्रावधानों की व्याख्या की, जिसमें पॉक्सो कानून के तहत आरोपी की जमानत रद्द कर दी गई थी, क्योंकि वकील ने अपील पर बहस की तैयारी के लिए चार सप्ताह के स्थगन की मांग की थी।

विज्ञापन
Supreme Court High Court cannot cancel bail without notice, bench said accused get fair hearing opportunity
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हाईकोर्ट वकील की चूक पर और नोटिस जारी किए बिना अपील के निलंबन पर रिहा किसी आरोपी की जमानत रद्द नहीं कर सकता है। जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस पंकज मिथल की पीठ ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में सीआरपीसी की धारा 389 की उप-धारा 1 के तहत किसी आरोपी को दी गई जमानत को आरोपी को सुनवाई का उचित अवसर दिए बिना रद्द नहीं किया जा सकता है।

विज्ञापन


शीर्ष अदालत ने मद्रास हाईकोर्ट के सात जुलाई 2023 के उस आदेश को रद्द करते हुए कानूनी प्रावधानों की व्याख्या की, जिसमें पॉक्सो कानून के तहत आरोपी की जमानत रद्द कर दी गई थी, क्योंकि वकील ने अपील पर बहस की तैयारी के लिए चार सप्ताह के स्थगन की मांग की थी। पीठ ने कहा, जेल में बंद अपीलकर्ता-अभियुक्त की सजा को निलंबित करते हुए अपीलीय अदालत को अपील के अंतिम निपटान तक आरोपी को जमानत पर रिहा करना होगा। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि धारा 389 की उप-धारा 1 का दूसरा प्रावधान लोक अभियोजक को उप-धारा 1 के तहत दी गई जमानत को रद्द करने के लिए आवेदन दायर करने की अनुमति देता है।
विज्ञापन


अपने ही पुराने फैसले को अपनाने की दी सलाह  
शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में, ‘बानी सिंह बनाम यूपी सरकार’ (1996) के मामले में इस न्यायालय के निर्णय में सुझाए गई बातों में से एक को हाईकोर्ट को हमेशा अपनाना चाहिए। जब अपीलकर्ता का वकील अनुचित आधार पर अपील पर बहस करने से इन्कार करता है तो हाईकोर्ट के पास अपीलकर्ता के लिए एक वकील नियुक्त करने का विवेकाधिकार है।
विज्ञापन
विज्ञापन


आरोपी को नोटिस जारी कर सकती है अदालत
पीठ ने कहा, अदालत स्वत: संज्ञान लेते हुए एक नोटिस भी जारी कर सकती है, जिसमें आरोपी से पूछा जा सकता है कि जमानत क्यों रद्द नहीं की जानी चाहिए? मौजूदा मामले में पीठ ने कहा कि दुर्भाग्य से अपीलकर्ता-अभियुक्त को जमानत रद्द करने के मुद्दे पर सुनवाई का अवसर दिए बिना हाईकोर्ट ने सीधे उसे दी जमानत रद्द कर दी। हाईकोर्ट की ओर से इस तरह के दृष्टिकोण को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। खासकर तब जब हाईकोर्ट हमेशा उस स्थिति से निपट सकता है जब अपील की अंतिम सुनवाई के समय अनुचित आधार पर आरोपी के वकील स्थगन मांग करता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed