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Supreme Court: आठ राज्यों और हाईकोर्ट से जवाब-तलब; आपराधिक केसों पर स्थगन आदेशों के प्रतिकूल प्रभाव का मामला
Mon, 09 Dec 2024 05:50 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Mon, 09 Dec 2024 05:50 AM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मामलों में स्थगन देने के मामले में आठ राज्यों, हाईकोर्ट से जवाब मांगा है। मामला स्थगन से सुनवाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का है। बता दें कि शीर्ष अदालत ने स्वत: संज्ञान लेकर 8 नवंबर, 2021 को अपने फैसले में अपीलीय अदालतों की ओर से दिए गए स्थगन आदेशों पर चिंता जाहिर की थी।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मुकदमों में अपीलीय अदालतों की ओर से दिए जाने वाले स्थगन आदेशों के कारण इन मामलों की सुनवाई पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव का स्वत: संज्ञान लेते हुए सोमवार को आठ राज्यों और वहां के उच्च न्यायालयों से जवाब मांगा है।
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चीफ जस्टिस की बेंच में सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ की ओर से नवंबर, 2021 में पारित एक आदेश पर संज्ञान लेते हुए राज्यों को नोटिस जारी किया। जस्टिस कौल ने विपक्ष शासित कई राज्यों की ओर से सीबीआई को दी जांच की सामान्य अनुमति वापस लेने के खिलाफ केंद्रीय एजेंसी की याचिका पर यह आदेश जारी किया था।
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17 मार्च, 2025 से शुरू होने वाले सप्ताह के दौरान अगली सुनवाई
इसका शीर्षक है, ‘इस अदालत की ओर से स्थगन के लिए निर्धारित मापदंडों के बावजूद, अपीलीय अदालतों के स्थगन आदेशों से मुकदमे की गति पर प्रतिकूल प्रभाव’। यह आदेश पहली बार विचार के लिए सोमवार को जस्टिस खन्ना की पीठ के सामने आया। जस्टिस खन्ना ने कहा, संबंधित उच्च न्यायालय छह सप्ताह के भीतर प्रतिक्रिया दाखिल कर सकते हैं और 17 मार्च, 2025 से शुरू होने वाले सप्ताह के दौरान मामले की सुनवाई की जाएगी।
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आठ राज्यों में महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और राजस्थान भी
महाराष्ट्र, पंजाब, छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड, पश्चिम बंगाल, केरल और मिजोरम को इस मामले में जवाब दाखिल करना होगा, क्योंकि उन्होंने क्षेत्राधिकार में मामलों की जांच के लिए सीबीआई को दी गई सामान्य सहमति वापस ली है। महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में अब भाजपा की सरकारें हैं।
सुप्रीम कोर्ट के स्वत: संज्ञान के बाद मामला जनहित याचिका के रूप में दर्ज
शीर्ष अदालत ने नवंबर 2021 में सीबीआई की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए अपीलीय अदालतों द्वारा दिए गए स्थगन आदेशों और मुकदमे की गति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने के मुद्दे को उठाया था। शीर्ष अदालत ने 8 नवंबर, 2021 को अपने फैसले में अपीलीय अदालतों की ओर से दिए गए स्थगन आदेशों पर चिंता जाहिर की थी। अदालत ने कहा था कि संबंधित राज्यों और हाईकोर्ट को नोटिस भेजकर एक उचित याचिका को जनहित याचिका के रूप में दर्ज करके इस पहलू को न्यायिक रूप से संबोधित करने की आवश्यकता है।
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