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क्या यूपी सरकार दे सकती है हाईकोर्ट की मस्जिद के लिए जगह
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Mon, 02 Apr 2018 09:53 PM IST
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : अमर उजाला
इलाहाबाद हाईकोर्ट परिसर में मौजूद मस्जिद को हटाने के विवाद की गेंद अब यूपी सरकार के पाले में चली गई है। हाईकोर्ट ने अपने परिसर में ही मस्जिद के लिए कोई अन्य वैकल्पिक जगह देने से इनकार कर दिया है। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा है कि क्या वह वक्फ मस्जिद को वैकल्पिक जगह उपलब्ध करा सकती है?
इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने सोमवार को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष कहा कि वैकल्पिक जगह देने के लिए हाईकोर्ट परिसर में जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार चाहे तो वैकल्पिक जगह देने पर विचार कर सकती है। इसके बाद पीठ ने यूपी सरकार से पूछा है कि वह मस्जिद के लिए वैकल्पिक जगह दे सकती है या नहीं?
मालूम हो कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की जमीन पर अतिक्रमण कर बनी मस्जिद के खिलाफ एक जनहित याचिका दायर की गई थी। इस पर गत वर्ष नवंबर में हाईकोर्ट ने मस्जिद को तीन महीने के भीतर हटाने का आदेश दिया था। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। बीते नौ फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद हटाने की कार्रवाई फिलहाल रोकते हुए दोनों पक्षों को इस मामले में समाधान निकालने को कहा था। वक्फ बोर्ड की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि मस्जिद को कोई वैकल्पिक जगह जगह दिए जाने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने सोमवार को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष कहा कि वैकल्पिक जगह देने के लिए हाईकोर्ट परिसर में जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार चाहे तो वैकल्पिक जगह देने पर विचार कर सकती है। इसके बाद पीठ ने यूपी सरकार से पूछा है कि वह मस्जिद के लिए वैकल्पिक जगह दे सकती है या नहीं?
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मालूम हो कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की जमीन पर अतिक्रमण कर बनी मस्जिद के खिलाफ एक जनहित याचिका दायर की गई थी। इस पर गत वर्ष नवंबर में हाईकोर्ट ने मस्जिद को तीन महीने के भीतर हटाने का आदेश दिया था। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। बीते नौ फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद हटाने की कार्रवाई फिलहाल रोकते हुए दोनों पक्षों को इस मामले में समाधान निकालने को कहा था। वक्फ बोर्ड की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि मस्जिद को कोई वैकल्पिक जगह जगह दिए जाने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
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