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सेंट्रल लाइब्रेरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त: केंद्र से मांगा जवाब, पूछा- लाखों किताबों का क्या होगा?

Mon, 05 Oct 2026 12:07 PM IST
प्रशांत तिवारी एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: प्रशांत तिवारी Updated Mon, 05 Oct 2026 12:07 PM IST
सार

सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत प्रस्तावित नई लाइब्रेरी में सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी के विशाल पुस्तक संग्रह को रखने की पर्याप्त जगह को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है।  सोमवार को कोर्ट ने केंद्र से मौजूदा संग्रह और नई इमारत में किताबों के लिए प्रस्तावित जगह की जानकारी मांगी है।

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Supreme Court gets tough Central Library issue Seeks response from Centre asks what happen to lakhs of books
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत प्रस्तावित नई लाइब्रेरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। सोमवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने खास तौर पर इस बात पर सवाल उठाया कि मौजूदा सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी (CSL) की लाखों किताबों को नई जगह पर रखने के लिए पर्याप्त इंतजाम हैं या नहीं। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि करीब दो लाख किताबें दिल्ली के आरके पुरम में कार्टन में रखी हैं और 2011 से अब तक खोली भी नहीं गई हैं। कोर्ट ने मौजूदा लाइब्रेरी के संग्रह और नई इमारत में किताबों के लिए प्रस्तावित जगह की पूरी जानकारी मांगी है।

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कॉन्फ्रेंस रूम बनेंगे, लेकिन किताबों के लिए कितनी जगह बचेगी?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से यह भी पूछा कि नई प्रस्तावित इमारत में कॉन्फ्रेंस रूम और दूसरी सुविधाओं के लिए जगह तय करने के बाद क्या लाइब्रेरी की किताबों को रखने के लिए पर्याप्त स्थान बचेगा। कोर्ट की चिंता सीधे तौर पर इस बात से जुड़ी है कि नई व्यवस्था में लाइब्रेरी के विशाल संग्रह को किस तरह सुरक्षित और व्यवस्थित रखा जाएगा।
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135 साल पुरानी लाइब्रेरी, सिर्फ किताबों का कमरा नहीं
सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी करीब 135 साल पुरानी है। इतने लंबे समय में यहां सिर्फ किताबें ही नहीं जुटीं, बल्कि कई अहम दस्तावेज, संदर्भ सामग्री और ऐतिहासिक महत्व का ज्ञान-संग्रह भी तैयार हुआ है। यही वजह है कि इस लाइब्रेरी को केवल एक जगह से दूसरी जगह सामान पहुंचाने जैसा मामला नहीं माना जा सकता। हर किताब और दस्तावेज का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना और जरूरत पड़ने पर पाठकों को उसकी पहुंच देना भी उतना ही जरूरी है।
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2011 से बंद पड़े कार्टन ने बढ़ाई चिंता
करीब दो लाख किताबों का वर्षों से कार्टन में बंद रहना अपने आप में बड़ा सवाल खड़ा करता है। अगर इतनी बड़ी संख्या में किताबें लंबे समय से पाठकों की पहुंच से बाहर हैं, तो नई व्यवस्था में उन्हें किस तरह व्यवस्थित किया जाएगा, यह भी महत्वपूर्ण है। किताबों को सिर्फ किसी गोदाम में रख देना काफी नहीं होगा। उन्हें सुरक्षित रखने, सूचीबद्ध करने और जरूरत के समय आसानी से उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी करनी होगी।


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सेंट्रल विस्टा की नई योजना में CSL का भविष्य क्या होगा?
सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत दिल्ली के सरकारी भवनों और दफ्तरों के पूरे इलाके को नए सिरे से विकसित किया जा रहा है। इसी बदलाव के बीच सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी के भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी पुरानी और महत्वपूर्ण लाइब्रेरी को नई योजना में उचित जगह क्यों नहीं मिल पाई और अगर इसे मौजूदा स्थान से हटाया जाता है तो नई व्यवस्था आखिर कैसी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा संग्रह और नई इमारत में किताबों के लिए उपलब्ध जगह को लेकर स्पष्ट जानकारी मांगी है। ऐसे में अगली सुनवाई में केंद्र की ओर से क्या जानकारी दी जाती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।

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