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Supreme Court: 'पूर्व CM की भूमिका पर सवाल उठाने वाली क्लिप से छेड़छाड़ हुई', NFSL रिपोर्ट पर कोर्ट की टिप्पणी
Mon, 03 Nov 2025 05:16 PM IST
हिमांशु चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Mon, 03 Nov 2025 05:16 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा से जुड़े ऑडियो क्लिप्स पर एनएफएसएल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रिकॉर्डिंग्स के साथ छेड़छाड़ की गई है। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह की कथित भूमिका का जिक्र था। अदालत ने रिपोर्ट की प्रति पक्षकारों को देने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई आठ दिसंबर को तय की।
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सुप्रीम कोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि गुजरात की नेशनल फॉरेंसिक साइंस लैब की जांच में मणिपुर हिंसा से जुड़े वे ऑडियो क्लिप्स छेड़छाड़ किए गए पाए गए हैं, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह की कथित भूमिका का जिक्र था। अदालत ने एनएफएसएल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इन क्लिप्स में संपादन और एडिटिंग के संकेत मिले हैं, जिससे आवाज की फॉरेंसिक तुलना संभव नहीं है।
जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस आलोक आराध्य की पीठ ने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार ये क्लिप्स मूल स्रोत रिकॉर्डिंग नहीं हैं और वैज्ञानिक दृष्टि से इनका विश्लेषण फॉरेंसिक तुलना के लिए उपयुक्त नहीं पाया गया। सुप्रीम कोर्ट यह सुनवाई कुकी ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट की याचिका पर कर रही थी, जिसने इस मामले की स्वतंत्र एसआईटी जांच की मांग की थी। अदालत ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि एनएफएसएल की रिपोर्ट की प्रति सभी पक्षकारों को उपलब्ध कराई जाए और अगली सुनवाई आठ दिसंबर को होगी।
याचिकाकर्ता की दलील
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि रिपोर्ट की प्रति सभी पक्षों को दी जानी चाहिए ताकि वे जवाब दाखिल कर सकें। उन्होंने यह भी बताया कि एक अलग फॉरेंसिक रिपोर्ट में एक रिकॉर्डिंग को बिना संपादन के बताया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एनएफएसएल की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि विवादित रिकॉर्डिंग के साथ छेड़छाड़ की गई है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब में कहा कि अब मणिपुर में स्थिति काफी शांत है।
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ये भी पढ़ें- राजनीतिक पार्टियों के नियमों को लेकर जनहित याचिका दायर, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग-केंद्र से मांगा जवाब
पूर्व जांच और अदालत की टिप्पणियां
19 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लैब की जांच प्रक्रिया पर असंतोष जताते हुए कहा था कि परीक्षण गलत दिशा में किया गया। इसके बाद 25 अगस्त को शीर्ष अदालत ने ऑडियो क्लिप्स की जांच के लिए मामला गुजरात की एनएफएसएल को भेजा था। अदालत ने एनएफएसएल से यह भी कहा था कि वह जांच करे कि क्या आवाज विवादित और स्वीकृत क्लिप्स में एक ही व्यक्ति की है। इस पर एनएफएसएल ने अपनी रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की।
मणिपुर हिंसा की पृष्ठभूमि
मई 2023 में मणिपुर में घाटी आधारित मैती और पहाड़ी क्षेत्रों की कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें 260 से अधिक लोगों की मौत हुई और हजारों लोग विस्थापित हुए। हिंसा की शुरुआत ‘ट्राइबल सॉलिडेरिटी मार्च’ के बाद हुई थी, जो मणिपुर हाईकोर्ट के उस आदेश के विरोध में निकाला गया था जिसमें मैती समुदाय को अनुसूचित जनजाति दर्जा देने की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि उस वक्त मुख्यमंत्री रहे एन बीरेन सिंह ने राज्य मशीनरी के माध्यम से हिंसा भड़काने और उसे संगठित रूप देने में भूमिका निभाई। सिंह ने 9 फरवरी 2024 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
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जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस आलोक आराध्य की पीठ ने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार ये क्लिप्स मूल स्रोत रिकॉर्डिंग नहीं हैं और वैज्ञानिक दृष्टि से इनका विश्लेषण फॉरेंसिक तुलना के लिए उपयुक्त नहीं पाया गया। सुप्रीम कोर्ट यह सुनवाई कुकी ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट की याचिका पर कर रही थी, जिसने इस मामले की स्वतंत्र एसआईटी जांच की मांग की थी। अदालत ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि एनएफएसएल की रिपोर्ट की प्रति सभी पक्षकारों को उपलब्ध कराई जाए और अगली सुनवाई आठ दिसंबर को होगी।
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याचिकाकर्ता की दलील
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि रिपोर्ट की प्रति सभी पक्षों को दी जानी चाहिए ताकि वे जवाब दाखिल कर सकें। उन्होंने यह भी बताया कि एक अलग फॉरेंसिक रिपोर्ट में एक रिकॉर्डिंग को बिना संपादन के बताया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एनएफएसएल की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि विवादित रिकॉर्डिंग के साथ छेड़छाड़ की गई है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब में कहा कि अब मणिपुर में स्थिति काफी शांत है।
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पूर्व जांच और अदालत की टिप्पणियां
19 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लैब की जांच प्रक्रिया पर असंतोष जताते हुए कहा था कि परीक्षण गलत दिशा में किया गया। इसके बाद 25 अगस्त को शीर्ष अदालत ने ऑडियो क्लिप्स की जांच के लिए मामला गुजरात की एनएफएसएल को भेजा था। अदालत ने एनएफएसएल से यह भी कहा था कि वह जांच करे कि क्या आवाज विवादित और स्वीकृत क्लिप्स में एक ही व्यक्ति की है। इस पर एनएफएसएल ने अपनी रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की।
मणिपुर हिंसा की पृष्ठभूमि
मई 2023 में मणिपुर में घाटी आधारित मैती और पहाड़ी क्षेत्रों की कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें 260 से अधिक लोगों की मौत हुई और हजारों लोग विस्थापित हुए। हिंसा की शुरुआत ‘ट्राइबल सॉलिडेरिटी मार्च’ के बाद हुई थी, जो मणिपुर हाईकोर्ट के उस आदेश के विरोध में निकाला गया था जिसमें मैती समुदाय को अनुसूचित जनजाति दर्जा देने की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि उस वक्त मुख्यमंत्री रहे एन बीरेन सिंह ने राज्य मशीनरी के माध्यम से हिंसा भड़काने और उसे संगठित रूप देने में भूमिका निभाई। सिंह ने 9 फरवरी 2024 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
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