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पैक्ड फूड पर चेतावनी के निशान: बच्चों की सेहत को लेकर चिंतित सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? जानिए पूरा मामला
Thu, 10 Sep 2026 03:16 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 10 Sep 2026 03:16 PM IST
सार
पैक्ड फूड में चीनी, नमक और वसा की अधिक मात्रा से बच्चों की सेहत पर पड़ रहे बुरे असर पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट चेतावनी लेबल जल्द लागू करने के संकेत दिए हैं और एफएसएसएआई को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। एफएसएसएआई ने पैकेट के आगे लाल रंग का चेतावनी निशान लगाने का प्रस्ताव रखा है, जिस पर 28 सितंबर को अगली सुनवाई होगी। क्या है पूरा मामला? जानिए...
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने पैकेज्ड फूड यानी डिब्बा बंद और पैक्ड खाने-पीने की चीजों पर चेतावनी लेबल लगाने के मामले में बेहद सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने साफ-साफ कहा है कि वह देश के आम लोगों और खास तौर पर बच्चों की सेहत को लेकर बेहद चिंतित है। शीर्ष अदालत के मुताबिक, पैक्ड फूड पर चीनी, नमक और वसा (फैट) की ज्यादा मात्रा को लेकर चेतावनी का निशान लगाना राष्ट्रीय हित से जुड़ा एक बेहद गंभीर मुद्दा है।
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा?
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अदालत ने इस विषय पर अपनी ओर से पूरा अध्ययन किया है। पीठ ने कहा कि देश के स्वास्थ्य से जुड़े इस गंभीर विषय पर सभी संबंधित पक्षों को राष्ट्रीय हित में मिलकर सोचना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि वह इस मामले में एक-दो दिन के भीतर विस्तृत आदेश जारी करेगा, जिसमें सभी पक्षों से जरूरी जानकारियां मांगी जाएंगी। इस मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने एफएसएसएआई से क्या पूछा?
'3एस एंड अवर हेल्थ सोसाइटी' नाम के चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने खाद्य सुरक्षा संस्था एसएसएसएआई से तीखे सवाल पूछे। पीठ ने पूछा कि पैक्ड फूड के पिछले हिस्से में सामग्री का ब्योरा तो लिखा ही होता है, लेकिन क्या संस्था ने ऐसी कोई गाइडलाइन बनाई है जिससे यह पता चल सके कि कोई चीज तय सीमा से ज्यादा होने पर 'हाई शुगर', 'हाई साल्ट' या 'हाई फैट' मानी जाएगी? इस पर एफएसएसएआई के वकील ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक पैकेट के पीछे प्रति 100 ग्राम और प्रति सर्विंग (एक बार में खाने की मात्रा) की जानकारी देना जरूरी होता है।
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यह भी पढ़ें: गौरव भाटिया मानहानि केस: दास-रांका 24 घंटे में हटाएंगे पोस्ट, हाईकोर्ट ने दर्ज की अंडरटेकिंग; क्या है मामला?
अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड को लेकर क्या सुझाव सामने आए?
सुनवाई के दौरान एक वकील ने अदालत के सामने दलील दी कि सरकार 'कुरकुरे' जैसे अत्यधिक प्रोसेस्ड (अल्ट्रा प्रोसेस्ड) स्नैक्स को अंडे और नमकीन काजू जैसे पौष्टिक खाने के बराबर दर्जा दे रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि शाकाहारी (हरा) और मांसाहारी (लाल) के निशानों से भ्रम न फैले, इसलिए अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड पर चेतावनी देने के लिए लाल रंग की जगह किसी दूसरे स्पष्ट रंग के निशान का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इन सुझावों को अपने रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया है।
एफएसएसएआई ने सुप्रीम कोर्ट में क्या प्रस्ताव दिया?
इससे पहले एफएसएसएआई ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर अपना प्रस्ताव रखा था। इसके तहत अत्यधिक नमक, चीनी और वसा वाले पैक्ड फूड पर पैकेट के अगले हिस्से (फ्रंट) में ही लाल रंग का छह कोनों वाला चेतावनी निशान लगाने की योजना है। आईसीएमआर- एनआईएन की 'डायटरी गाइडलाइंस 2024' के आधार पर तय इस निशान पर स्पष्ट रूप से 'हाई फैट', 'हाई शुगर' या 'हाई साल्ट' लिखा होगा, ताकि ग्राहक पैकेट देखते ही पहचान सकें। इसे दो चरणों में लागू करने की बात कही गई है।
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मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा?
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अदालत ने इस विषय पर अपनी ओर से पूरा अध्ययन किया है। पीठ ने कहा कि देश के स्वास्थ्य से जुड़े इस गंभीर विषय पर सभी संबंधित पक्षों को राष्ट्रीय हित में मिलकर सोचना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि वह इस मामले में एक-दो दिन के भीतर विस्तृत आदेश जारी करेगा, जिसमें सभी पक्षों से जरूरी जानकारियां मांगी जाएंगी। इस मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।
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सुप्रीम कोर्ट ने एफएसएसएआई से क्या पूछा?
'3एस एंड अवर हेल्थ सोसाइटी' नाम के चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने खाद्य सुरक्षा संस्था एसएसएसएआई से तीखे सवाल पूछे। पीठ ने पूछा कि पैक्ड फूड के पिछले हिस्से में सामग्री का ब्योरा तो लिखा ही होता है, लेकिन क्या संस्था ने ऐसी कोई गाइडलाइन बनाई है जिससे यह पता चल सके कि कोई चीज तय सीमा से ज्यादा होने पर 'हाई शुगर', 'हाई साल्ट' या 'हाई फैट' मानी जाएगी? इस पर एफएसएसएआई के वकील ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक पैकेट के पीछे प्रति 100 ग्राम और प्रति सर्विंग (एक बार में खाने की मात्रा) की जानकारी देना जरूरी होता है।
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अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड को लेकर क्या सुझाव सामने आए?
सुनवाई के दौरान एक वकील ने अदालत के सामने दलील दी कि सरकार 'कुरकुरे' जैसे अत्यधिक प्रोसेस्ड (अल्ट्रा प्रोसेस्ड) स्नैक्स को अंडे और नमकीन काजू जैसे पौष्टिक खाने के बराबर दर्जा दे रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि शाकाहारी (हरा) और मांसाहारी (लाल) के निशानों से भ्रम न फैले, इसलिए अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड पर चेतावनी देने के लिए लाल रंग की जगह किसी दूसरे स्पष्ट रंग के निशान का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इन सुझावों को अपने रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया है।
एफएसएसएआई ने सुप्रीम कोर्ट में क्या प्रस्ताव दिया?
इससे पहले एफएसएसएआई ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर अपना प्रस्ताव रखा था। इसके तहत अत्यधिक नमक, चीनी और वसा वाले पैक्ड फूड पर पैकेट के अगले हिस्से (फ्रंट) में ही लाल रंग का छह कोनों वाला चेतावनी निशान लगाने की योजना है। आईसीएमआर- एनआईएन की 'डायटरी गाइडलाइंस 2024' के आधार पर तय इस निशान पर स्पष्ट रूप से 'हाई फैट', 'हाई शुगर' या 'हाई साल्ट' लिखा होगा, ताकि ग्राहक पैकेट देखते ही पहचान सकें। इसे दो चरणों में लागू करने की बात कही गई है।