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Hindi News ›   India News ›   Supreme Court: Everyone fights differently with mental problems, Do not weigh in a scale, saying that order of Karnataka High Court has been canceled

सुप्रीम कोर्ट: मानसिक परेशानी से हर कोई अलग तरह से लड़ता है.. एक तराजू में न तौलें, ऐसा कहकर रद्द कर दिया हाईकोर्ट का आदेश

Sun, 31 Oct 2021 05:25 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Sun, 31 Oct 2021 05:25 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, व्यक्तित्वों में फर्क होता है। इसी से लोगों का अलग व्यवहार तय होता है। कोई व्यक्ति मानसिक या शारीरिक संकट से कैसे निपटता है, प्रेम, दुख, हानि, खुशी-कैसे अभिव्यक्त करता है, यह मानव मन व मस्तिष्क के अलग-अलग पहलू तय करते हैं। सब एक सांचे में फिट नहीं हो सकते।

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Supreme Court: Everyone fights differently with mental problems, Do not weigh in a scale, saying that order of Karnataka High Court has been canceled
supreme court - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आत्महत्या करने वालों को कमजोर दिल नहीं मानना चाहिए। हर व्यक्ति बिगड़े मानसिक स्वास्थ्य से अपनी तरह से लड़ता है, सभी को एक तराजू में तौलकर उनकी पीड़ा कमतर नहीं आंकनी चाहिए। शीर्ष कोर्ट ने इसके साथ ही खुदकुशी के लिए उकसाने में एफआईआर खारिज करने के कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया।

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हाईकोर्ट ने इस मामले में आरोपी सरकारी अधिकारी पर दर्ज एफआईआर यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि मृतक ड्राइवर था, सड़क हादसों में लोगों को मरते, अपाहिज होते देखता था, कमजोर दिल नहीं था। दोस्तों-रिश्तेदारों से बातचीत करता था। यह सब सामान्य व्यक्ति के व्यवहार हैं, किसी गंभीर तनाव से गुजर रहे व्यक्ति के नहीं। मामले को जारी रखना न्याय का उपहास होगा। आरोपी को लंबी सुनवाई से गुजरना होगा। 
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इसके खिलाफ अपील मंजूर करते हुए जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने कहा, हाईकोर्ट ने सुनवाई के बजाय धारणा के अनुसार कार्रवाई की। सुनवाई में आरोपों की सच्चाई जाननी चाहिए थी। पर, जांच भी रोक दी गई। यह अपने क्षेत्राधिकार का उल्लंघन है।
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सुप्रीम कोर्ट : सभी को एक सांचे में फिट नहीं कर सकते

  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हाईकोर्ट यह मान कर चला कि सामान्य तौर पर मनुष्य का व्यवहार कैसा होना चाहिए और कैसा नहीं? आत्महत्या करने का फैसला करने वाले व्यक्ति को ‘कमजोर’ करार दिया, लेकिन इस पारंपरिक सोच को व्यवहार विज्ञानी खारिज करते हैं कि ‘सभी मनुष्य एक जैसा व्यवहार करते हैं।’
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा, व्यक्तित्वों में फर्क होता है। इसी से लोगों का अलग व्यवहार तय होता है। कोई व्यक्ति मानसिक या शारीरिक संकट से कैसे निपटता है, प्रेम, दुख, हानि, खुशी-कैसे अभिव्यक्त करता है, यह मानव मन व मस्तिष्क के अलग-अलग पहलू तय करते हैं। सब एक सांचे में फिट नहीं हो सकते।
  • शीर्ष अदालत ने कहा-यह कहना कि अवसाद या तनाव में व्यक्ति को कैसा व्यवहार करना चाहिए था, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की गंभीरता को कम आंकना है।

काला धन ड्राइवर से करवाता था सफेद
इस मामले में आरोप है कि बंगलूरू का भूमि अधिग्रहण अधिकारी अपने ड्राइवर के बैंक खाते व फोन नंबर का उपयोग कर काला धन सफेद करता था। मना करने पर उसे जान से मारने की धमकी दी गई। पीड़ित ने 12 पेज का सुसाइड नोट लिख खुदकुशी कर ली। आत्महत्या के लिए उकसाने में अधिकारी गिरफ्तार हुआ। बाद में बेल मिल गई। 29 मई 2020 को हाईकोर्ट ने एफआईआर भी रद्द कर दी।

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