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Supreme Court: 'चीता प्रोजेक्ट पर केंद्र से सवाल पूछने की कोई वजह नहीं'; अदालत ने याचिकाओं का किया निपटारा

Tue, 08 Aug 2023 05:21 AM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Tue, 08 Aug 2023 05:21 AM IST
सार

जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा कि मामले में हमें हलफनामे पर भरोसा न करने का कोई कारण नहीं दिखता। यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसे इस क्षेत्र के विशेषज्ञों पर छोड़ देना ही बेहतर है, क्योंकि अदालत के पास इसमें कोई विशेषज्ञता नहीं है।

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Supreme Court disposes of petitions related to Cheetah Project news update in hindi
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कूनो में चीतों की मौत को चिंता को विषय बताया। साथ ही कहा, केंद्र ने आश्वस्त किया है कि नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीतों को बचाने के हरसंभव उपाय किए जा रहे हैं और सरकार के इस बयान पर अविश्वास करने की कोई वजह नजर नहीं आती है। इसके साथ ही कोर्ट ने उस आवेदन का निपटारा कर दिया, जिसमें आरोप लगाया था कि सरकार कूनो पार्क में चीतों की मौत रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठा रही है।

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जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा कि मामले में हमें हलफनामे पर भरोसा न करने का कोई कारण नहीं दिखता। यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसे इस क्षेत्र के विशेषज्ञों पर छोड़ देना ही बेहतर है, क्योंकि अदालत के पास इसमें कोई विशेषज्ञता नहीं है। जहां तक किसी विशेष व्यक्ति को समिति में नामांकित करने की बात है तो यह केंद्र के अधिकार क्षेत्र में आता है। हालांकि, कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि कूनो में मारे गए चीतों की संख्या कम नहीं है। यही वजह है कि आम जनता भी हालिया घटनाक्रम से खासी चिंतित है।
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मीडिया रिपोर्ट गलत : सरकार
अदालत ने कहा कि सरकार ने अपने हलफनामे में कहा गया है कि बाहर से लाए गए 20 चीतों में से 14 अभी जीवित हैं। सरकार की दलील है कि चीतों की संख्या पर मीडिया में गलत रिपोर्ट प्रकाशित की गई है। केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि जिन तीन और अतिरिक्त मौतों की बात की जा रही है, वो यहां लाए गए चीतों के शावकों की हैं। केंद्र ने कहा कि चीतों की मौत रोकने के लिए विशेषज्ञों के अंतरराष्ट्रीय पैनल से 11 सदस्यों का एक पैनल गठित किया गया है।
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भारतीय परिवेश में ढलने में समय लगेगा
भाटी ने कहा कि ट्रांसलोकेट कर यहां लाए जाने के दौरान चीतों की मौत होने में कुछ बहुत अस्वाभाविक नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके जीवित रहने की दर अगर 50 फीसदी रहती है, तो यह भी चलेगा। यह प्रयास शावकों पर लक्षित नहीं था, बल्कि चीतों को परिस्थितियों के अनुकूल ढालने के लिए किया गया था। उन्होंने यह बात भी कही चूंकि दक्षिण अफ्रीका की सर्दियों के अनुरूप उनमें विंटर कवर यानी एक तरह से फर का कोट विकसित हो गया था जबकि कूनो में तापमान 45-46 था। यह भी डिहाइड्रेशन की वजह भी बन गया। गौरतलब है कि सितंबर 2022 में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से 20 चीतों को भारत के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में लाया गया था।

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