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Supreme Court: शीर्ष कोर्ट के वकीलों को हाईकोर्ट में जज न बनाने की मांग वाली याचिका खारिज
Thu, 05 Jan 2023 06:09 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Thu, 05 Jan 2023 06:09 AM IST
सार
जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस अभय एस ओका की पीठ ने कहा, संविधान में ऐसा कुछ भी नहीं है जो शीर्ष अदालत में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों को हाईकोर्ट के जज के रूप में नियुक्त करने से रोकता है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Social Media
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट में जज के तौर पर शीर्ष अदालत में वकालत करने वाले वकीलों पर विचार नहीं करने की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। शीर्ष अदालत ने कहा, इस याचिका में कोई मेरिट नहीं है और यह न्यायिक समय की बर्बादी है।
जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस अभय एस ओका की पीठ ने कहा, संविधान में ऐसा कुछ भी नहीं है जो शीर्ष अदालत में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों को हाईकोर्ट के जज के रूप में नियुक्त करने से रोकता है। याचिकाकर्ता वकील अशोक पांडे ने कहा, संविधान के अनुच्छेद- 217 के अनुसार, एक व्यक्ति जो राज्य बार काउंसिल में पंजीकृत है और बाद में सुप्रीम कोर्ट में वकालत के लिए शिफ्ट होता है तो वह उस अदालत के जज के रूप में नियुक्त होने के अयोग्य है। संविधान का अनुच्छेद 217 हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति और उनके कार्यालय की शर्तों से संबंधित है। पीठ ने कहा, आपकी याचिका में कोई मेरिट नहीं है। आप पर न्यायिक समय की बर्बादी करने के लिए 50 हजार जुर्माना लगाया जाता है। यह जुर्माना चार सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट मध्यस्थता एवम सुलह परियोजना समिति में जमा कराना होगा।
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जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस अभय एस ओका की पीठ ने कहा, संविधान में ऐसा कुछ भी नहीं है जो शीर्ष अदालत में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों को हाईकोर्ट के जज के रूप में नियुक्त करने से रोकता है। याचिकाकर्ता वकील अशोक पांडे ने कहा, संविधान के अनुच्छेद- 217 के अनुसार, एक व्यक्ति जो राज्य बार काउंसिल में पंजीकृत है और बाद में सुप्रीम कोर्ट में वकालत के लिए शिफ्ट होता है तो वह उस अदालत के जज के रूप में नियुक्त होने के अयोग्य है। संविधान का अनुच्छेद 217 हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति और उनके कार्यालय की शर्तों से संबंधित है। पीठ ने कहा, आपकी याचिका में कोई मेरिट नहीं है। आप पर न्यायिक समय की बर्बादी करने के लिए 50 हजार जुर्माना लगाया जाता है। यह जुर्माना चार सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट मध्यस्थता एवम सुलह परियोजना समिति में जमा कराना होगा।
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