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सुप्रीम कोर्ट: कोविशील्ड, कोवाक्सिन के सामूहिक टीकाकरण के खिलाफ याचिका खारिज, कहा- टीकाकरण पर संदेह न करें
Mon, 25 Oct 2021 07:05 PM IST
अभिषेक दीक्षित
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Mon, 25 Oct 2021 07:05 PM IST
सार
शीर्ष अदालत, कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ एक विशेष अनुमति याचिका(एसएलपी) पर सुनवाई कर रही थी जिसने कोविशील्ड और कोवाक्सिन के सामूहिक टीकाकरण को रोकने के निर्देश देने वाली एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया था।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : एएनआई
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कोविशील्ड और कोवाक्सिन के माध्यम से सामूहिक टीकाकरण के खिलाफ एक याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि यह लोगों को कोविड -19 से बचाने की 'कुंजी' है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने कहा कि हम नहीं चाहते कि इस मामले पर बहस हो। हमें टीकाकरण पर संदेह नहीं करना चाहिए।
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यह कहते हुए पीठ ने याचिकाकर्ता मैथ्यू थॉमस के वकील की उस दलील को ठुकरा दिया कि उनकी दलीलों को विस्तार से सुना जाए। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि टीकों के लिए क्लीनिकल ट्रायल पूरा नहीं किया गया था। पीठ ने कहा कि वह याचिका पर विचार करने का इच्छुक नहीं है। पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि उसे इस मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश में कोई त्रुटि नहीं मिली।
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दरअसल शीर्ष अदालत, कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ एक विशेष अनुमति याचिका(एसएलपी) पर सुनवाई कर रही थी जिसने कोविशील्ड और कोवाक्सिन के सामूहिक टीकाकरण को रोकने के निर्देश देने वाली एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया था।
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हाईकोर्ट ने अदालत का कीमती समय बर्बाद करने के लिए याचिकाकर्ताओं पर 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया था। हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए यह भी कहा था कि याचिका जनहित में दायर नहीं की गई थी और यह जुर्माना लागत लगाने के लिए एक उपयुक्त मामला है क्योंकि इससे न्यायालय का 45 मिनट का समय नष्ट हुआ जबकि इस समय का इस्तेमाल कोविड-19 से संबंधित महत्वपूर्ण मामलों से निपटने के लिए किया जा सकता था।