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Supreme Court: समलैंगिक विवाह से जुड़ी याचिकाओं पर संविधान पीठ करेगी सुनवाई, अगली तारीख 18 अप्रैल तय की
Mon, 13 Mar 2023 05:33 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Mon, 13 Mar 2023 05:33 PM IST
सार
केंद्र ने कोर्ट से समलैंगिक विवाह के मुद्दे पर दोनों पक्षों की दलीलों में कटौती नहीं करने का आग्रह किया। केंद्र ने कहा कि इस फैसले का पूरे समाज पर प्रभाव पड़ेगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक विवाहों को कानूनी मान्यता दिए जाने के अनुरोध वाली याचिकाओं को 18 अप्रैल को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने से जुड़ी याचिकाओं को संविधान पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। पांच जजों की पीठ मामले पर अब 18 अप्रैल को सुनवाई करेगी। प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा कि यह मुद्दा एक ओर संवैधानिक अधिकारों और दूसरी ओर विशेष विवाह अधिनियम सहित विशेष विधायी अधिनियमों से जुड़ा है। इनका एक-दूसरे पर प्रभाव है।
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इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में समलैंगिक विवाह के मामले में केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि प्यार, अभिव्यक्ति और पसंद की स्वतंत्रता का अधिकार पहले से ही बरकरार है और कोई भी उस अधिकार में हस्तक्षेप नहीं कर रहा है, लेकिन इसका मतलब शादी के अधिकार को प्रदान करना नहीं है।
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एसजी मेहता ने कहा कि जिस क्षण समलैंगिक विवाह को मान्यता दी जाएगी, गोद लेने पर सवाल उठेगा और इसलिए संसद को बच्चे के मनोविज्ञान के मुद्दे को देखना होगा। उसे जांचना होगा कि क्या इसे इस तरह से उठाया जा सकता है। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समलैंगिक जोड़े के गोद लिए हुए बच्चे का समलैंगिक होना जरूरी नहीं है।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समलैंगिक विवाह से संबंधित मुद्दा अहम महत्व का है। इस पर पांच-न्यायाधीशों की पीठ की ओर से विचार किए जाने की आवश्यकता है। समलैंगिक विवाह पर पांच-न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष सुनवाई का सीधा प्रसारण (लाइव-स्ट्रीम) किया जाएगा।
केंद्र ने कोर्ट से समलैंगिक विवाह के मुद्दे पर दोनों पक्षों की दलीलों में कटौती नहीं करने का आग्रह किया। केंद्र ने कहा कि इस फैसले का पूरे समाज पर प्रभाव पड़ेगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक विवाहों को कानूनी मान्यता दिए जाने के अनुरोध वाली याचिकाओं को 18 अप्रैल को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने के अनुरोध वाली याचिकाओं का केंद्र ने विरोध किया है। सरकार का दावा है कि समलैंगिक विवाह को मान्यता देना पर्सनल लॉ और स्वीकृत सामाजिक मूल्यों के बीच नाजुक संतुलन के पूर्ण विनाश का कारण बन सकता है।