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सुप्रीम कोर्ट का अपराधियों को टिकट न देने की याचिका पर सुनवाई से इनकार, दी यह सलाह

Mon, 21 Jan 2019 12:14 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Mon, 21 Jan 2019 12:14 PM IST
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Supreme Court denies hearing on plea for not giving tickets to the criminals
सुप्रीम कोर्ट

उच्चतम न्यायालय ने अपराधियों के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया है। याचिका में मांग की गई थी कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों और अपराधियों के राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों के टिकट पर चुनाव लड़ने पर रोक लगाई जाए। जिससे कि राजनीति के अपराधिकरण को रोका जा सके। 

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याचिका में यह भी मांग की गई थी कि उन राजनीतिक दलों की मान्यता राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टी के तौर खत्म कर दी जाए जो दागियों को टिकट देते हैं। यानी उन पार्टियों के चुनाव चिन्ह को छीन लिया जाए और मान्यता रद्द कर दी जाए जिन्होंने अपराधियों को टिकट दिए हों। यह जनहित याचिका वकील और भाजपा नेता अश्वनी कुमार उपाध्याय ने दायर की थी। 
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सोमवार को याचिका पर उच्चतम न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई की। अदालत ने इस मामले पर चुनाव आयोग जाने की सलाह दी है। याचिकाकर्ता ने याचिका में राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण का हवाला देते हुए लोकसभा और विधानसभाओं में अपराधियों के आंकड़े दिए थे।
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याचिका में मांग की गई थी कि अदालत चुनाव आयोग को आदेश दे कि वह चुनाव चिन्ह आदेश 1968 और चुनाव आचार संहिता के नियमों में बदलाव करे। जिससे कि उन पार्टियों की मान्यता रद्द करने की शर्त को शामिल किया जा सके जो दागियों को टिकट देते हैं। इसके लिए चुनाव चिन्ह आदेश 6ए, 6बी और 6सी में अपराधियों को टिकट न देने की शर्त को शामिल किया जाए।


याचिकाकर्ता का कहना था कि चुनाव आयोग के पास संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत इस बारे में निर्देश जारी करने का अधिकार है। इस तरह का आदेश देने से किसी संवैधानिक प्रावधान का उल्लंघन नहीं होगा और न ही चुनाव आयोग को इसके लिए अलग से किसी तरह की जांच पड़ताल की जरूरत है। इसकी वजह उम्मीदवार द्वारा नामांकन के समय अपने लंबित मुकदमों का ब्योरा देना और उनकी स्थिति के बारे में बताना है।

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