फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court: Compassionate Appointment Not a Right, Cannot Claim Higher Post

Supreme Court: दयावश नियुक्ति अब अधिकार नहीं, आश्रित उच्च पद की मांग नहीं कर सकते; सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Fri, 12 Dec 2025 10:45 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Fri, 12 Dec 2025 10:45 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि दयावश नियुक्ति कोई अधिकार नहीं बल्कि मानवीय अपवाद है। इसलिए मृत कर्मचारी के आश्रित प्रारंभिक पद मिलने के बाद उच्च पद की मांग नहीं कर सकते। कोर्ट ने इस मामले में हाई कोर्ट के प्रमोशन संबंधी आदेश को खारिज कर दिया।

विज्ञापन
Supreme Court: Compassionate Appointment Not a Right, Cannot Claim Higher Post
सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि दयावश नियुक्ति कोई अधिकार नहीं, बल्कि केवल मानवीय आधार पर दिया गया अपवाद है। मृत कर्मचारी के आश्रित, भले ही योग्य हों, किसी भी ऊंचे पद पर नियुक्ति को अधिकार के रूप में मांग नहीं कर सकते। जस्टिस राजेश बिंदल और मनमोहन की बेंच ने यह फैसला तमिलनाडु सरकार की ओर से दायर दो याचिकाओं पर सुनाया, जिनमें मद्रास हाई कोर्ट ने सफाई कर्मचारियों को दयावश नियुक्ति के बाद जूनियर असिस्टेंट पद पर प्रोमोशन देने का आदेश दिया था।

विज्ञापन


क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
कोर्ट ने कहा दयावश नियुक्ति अपवाद है, अधिकार नहीं। यह नियुक्ति मानवीय आधार पर दी जाती है, ताकि अचानक हुए दुखद निधन के बाद परिवार आर्थिक संकट से उबर सके। केवल योग्य होना उच्च पद की मांग का आधार नहीं हो सकता। एक बार आश्रित को नौकरी मिल जाए तो दयावश नियुक्ति का उद्देश्य पूरा हो जाता है। इसके बाद उच्च पद पर नियुक्ति मांगना अनंत दया जैसा होगा, जो कानून के खिलाफ है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें:-  'अब देश के लिए जीने का समय, मरने का नहीं', मोहन भागवत बोले- सावरकर को देशभक्ति के लिए याद करते
विज्ञापन
विज्ञापन


क्यों रद्द किया हाई कोर्ट का आदेश?
कोर्ट ने कहा कि जिन आश्रितों को स्वीपर के तौर पर नियुक्त किया गया, उन्होंने बिना आपत्ति पद जॉइन किया। इससे साबित होता है कि परिवार की आर्थिक जरूरतें पूरी हो गईं। इसलिए अब ऊंचे पद की दोबारा दयावश मांग करने का कोई आधार नहीं। बेंच ने हाई कोर्ट के आदेश को कानून की भावना के खिलाफ और त्रुटिपूर्ण बताया और रद्द कर दिया।

कोर्ट की साफ बात: बराबरी का अधिकार भी जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान केअनुच्छेद 14 और 16 के तहत सरकारी नौकरियों में सभी को समान अवसर मिलना चाहिए। दयावश नियुक्ति उसी नियम का अपवाद है, इसलिए इसे अधिकार बनाना संभव नहीं है। कोर्ट ने याद दिलाया कि इस तरह की नियुक्ति केवल उस संकट की घड़ी में दी जाती है जब परिवार कमाने वाले को खो देता है, ताकि परिवार गरीबी में न धकेला जाए। इसका मतलब यह नहीं कि आश्रित आगे चलकर उच्च पद भी मांग सके।


 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed