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सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने मोदी सरकार की चार सिफारिशों को खारिज किया

Sat, 09 Jul 2016 11:47 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 09 Jul 2016 11:47 PM IST
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Supreme Court collegium rejects four recommendations of Modi Government
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Getty Images

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति की क्या प्रक्रिया होनी चाहिए, इसे लेकर न्यायपालिका और कार्यपालिका में गतिरोध जारी है। जानकारी के मुताबिक, नियुक्ति की प्रकिया यानी मेमोरेंडम ऑफ प्रोस्जिर (एमओपी) को लेकर मोदी सरकार की चार सिफारिशों को सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने एक सिरे से खारिज कर दिया है। एमओपी को लेकर पिछले दिनों भारत केप्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और तत्कालीन कानून मंत्री सदानंद गौड़ा के बीच बैठक हुई थी। सूत्रों के मुताबिक, बैठक बेनतीजा निकली।

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इसके बाद सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने एमओपी पर केंद्र सरकार की ओर से दी गई चारों सिफारिशों को नकार दिया। कोलेजियम को सबसे अधिक उस सिफारिश पर आपत्ति थी जिसमें कहा गया था कि कोलेजियम द्वारा सुझाए गए नामों को राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर सरकार खारिज कर सकती है। सरकार ने यह भी सिफारिश की थी कि सुप्रीम कोर्ट में जजों को भेजने का आधार सिर्फ वरिष्ठïता नहीं होनी चाहिए बल्कि योग्यता को भी आधार बनाया जाना चाहिए। इस सिफारिशों को भी कोलेजियम ने नकार दिया।
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इसके अलावा कोलेजियम ने नियुक्ति प्रक्रिया में सेवानिवृत्त जजों से सलाह करने की सिफारिश को खारिज कर दिया। सरकार की ओर से चौथी सिफारिश यह की गई थी कि सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति में सुझाए गए नामों में अटॉर्नी जनरल की भूमिका होनी चाहिए जबकि हाईकोर्ट में नियुक्ति के लिए सुझाए गए नामों में एडवोकेट जनरल की भी भूमिका होनी चाहिए, लेकिन कोलेजियम ने इसे भी खारिज कर दिया।

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तीन जजों को सुप्रीम कोर्ट लाने पर विचार

Supreme Court collegium rejects four recommendations of Modi Government
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : getty

 मालूम हो कि एमओपी को लेकर न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच चल रहे गतिरोध की वजह से जजों की नियुक्ति खासकर हाईकोर्ट में जजों की संख्या लगातार कम हो रही है। हालत यह है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में आधे से अधिक जजों के पद रिक्त हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की अधिकतम क्षमता 160 है लेकिन फिलहाल वहां 78 जज हैं, जबकि 82 पद रिक्त हैं। वहीं पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में करीब 46 फीसदी जजों के पद रिक्त हैं। इसके अलावा अन्य हाईकोर्ट में भी भारी संख्या में जजों केपद रिक्त हैं। जानकारी के मुताबिक, विभिन्न हाईकोर्ट में करीब 470 जजों के पद रिक्त हैं।


सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम न्यायमूर्ति के एम जोसफ, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति मंजुला चेल्लूर को सुप्रीम कोर्ट लाने पर विचार कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, कोलेजियम की ओर से लगभग ये तीनों नाम तय कर लिए गए हैं। अगले महीने इसकी घोषणा कर दी जाएगी। इस वक्त सुप्रीम कोर्ट में कुल 29 जज हैं, जबकि अधिकतम क्षमता 31 है। इस वर्ष के अंत तक तीन जज सेवानिवृत्त होने वाले हैं। जबकि अगले वर्ष जनवरी में चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर भी सेवानिवृत्त होंगे। इसे ध्यान में रखते हुए कोलेजियम ने जजों को एलिवेट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

मालूम हो कि उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन को निरस्त करने के फैसले के बाद न्यायमूर्ति के एम जोसफ चर्चा में आए थे। इस फैसले के चंद दिनों बाद उनका तबादला आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट कर दिया गया था। वहीं न्यायमूर्ति संजय किशन कौल फिलहाल मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस हैं और वह दिल्ली हाईकोर्ट में भी रह चुके हैं। जबकि न्यायमूर्ति मंजुला चेल्लूर कलकत्ता हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस हैं। वह कलकत्ता हाईकोर्ट की पहली महिला चीफ जस्टिस हैं।

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