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भ्रष्टाचार के आरोप के बाद SC ने इलाहाबाद हाईकोर्ट जज की नियुक्ति का अनुरोध लिया वापस
amarujala.com- Presented by: जया पाण्डेय
Updated Sat, 10 Jun 2017 09:38 AM IST
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भारत के मुख्य न्यायाधीश जे एस खेहर की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज की नियुक्ति के अनुरोध को वापस ले लिया है। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से इसे सहमति मिलने से पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने ये कदम उठाया है।
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कॉलेजियम का ये हस्तक्षेप उस समय आया है जब इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दिलीप बी भोसले ने इंटिलिजेंस ब्यूरो की रिपोर्ट पर कार्यवाही की, जिसमें कहा गया था कि लखनऊ जिला न्यायाधीश और उनके सहयोगियों ने कथित रूप से पूर्व यूपी मंत्री गायत्री प्रजापति को जमानत देने के लिए रिश्वत ली थी।
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बता दें पूर्व मंत्री प्रजापति को बलात्कार के आरोप में एफआईआर दर्ज होने के करीब 1 महीने तक भागने के बाद 15 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। सुप्रीम कोर्ट का प्रजापति की गिरफ्तारी पर स्टे से इंकार करने के बावजूद भी लखनऊ कोर्ट में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ओम प्रकाश मिश्रा ने 25 अप्रैल को प्रजापति सहित तीन आरोपियों को जमानत दे दी थी।
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मिश्रा और कई अन्य वरिष्ठ के खिलाफ आरोपों पर भोसले ने आईबी जांच का आदेश दिया था। आईबी की रिपोर्ट के मुताबिक, 2 जजों समेत पांच लोगों को प्रजापति को जमानत देने के लिए साजिश करने का कसूरवार पाया था। इसके बाद भोसले ने दोबारा आईबी से इस मामले की जांच करने को कहा था। दोबारा जांच के बाद भोसले ने कहा कि आईबी द्वारा दी गई जानकारी सही और कार्रवाई योग्य है।