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SC में बोलीं ममता: 'व्हाट्सएप आयोग जैसा है चुनाव आयोग, सिर्फ नाम काटने के लिए हो रहा SIR, निशाने पर बंगाल'

Wed, 04 Feb 2026 01:39 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Wed, 04 Feb 2026 01:39 PM IST
सार

West Bengal SIR Row: पश्चिम बंगाल में एसआईआर के खिलाफ आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। इस दौरान सीएम ममता बनर्जी भी अदालत में मौजूद रहीं और यह पहली बार है जब किसी राज्य की मौजूदा मुख्यमंत्री मौखिक दलीलें देने के लिए खुद सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष पेश हुईं। पढ़ें, बंगाल में एसआईआर को लेकर उपजे विवाद पर पल-पल के अपडेट...

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Supreme Court CM Mamata West Bengal SIR Hearing Hindi Updates ECI Voter List Special Intensive revision Case
बंगाल एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट में आज पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सुनवाई हुई। इस दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद वकीलों के बीच मौजूद थी। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और विपुल एम. पंचोली की पीठ ने की। मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उन्हें पश्चिम बंगाल के अपने दो साथी न्यायाधीशों से जानकारी मिली, जिन्होंने पास प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया समझाई और इसी समझ के आधार पर इस मुद्दे को शामिल किया गया। मामले में सीएम ममता बनर्जी का पक्ष रखने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने बताया कि न्यायालय ने पहले तार्किक विसंगतियों की सूची प्रदर्शित करने का निर्देश दिया था। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि न्यायालय को सूचित किया गया था कि सूची संचार का एकमात्र माध्यम नहीं है और संबंधित व्यक्तियों को व्यक्तिगत नोटिस भी जारी किए जा रहे हैं।

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32 लाख मतदाता सूचीबद्ध नहीं- बंगाल सरकार
अधिवक्ता श्याम दीवान ने न्यायालय से याचिकाकर्ता के संक्षिप्त नोट पर विचार करने का आग्रह किया और बताया कि इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए केवल चार दिन शेष हैं। उन्होंने कहा कि 32 लाख मतदाता सूचीबद्ध नहीं हैं, 1.36 करोड़ नाम तार्किक विसंगति सूची में हैं, और 63 लाख मामलों की सुनवाई अभी लंबित है। उन्होंने यह भी बताया कि 8,300 सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को नियुक्त किया गया है, जो संविधान के तहत परिकल्पित श्रेणी नहीं है। दीवान ने आगे कहा कि निवास प्रमाण पत्र, आधार और ओबीसी प्रमाण पत्र सहित कई स्वीकृत दस्तावेजों को अस्वीकार किया जा रहा है, जिससे लोगों को चार से पांच घंटे तक कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है।
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जज और वकीलों के बीच बहस
न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने टिप्पणी की कि बंगाल में श्री द्विवेदी का उच्चारण 'दिबेदी' होगा, और बताया कि बंगाली भाषा में 'वा' की ध्वनि नहीं है। मुख्य न्यायाधीश ने जवाब दिया कि कम से कम उनके नाम का उच्चारण तो सही होगा, जिस पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीच में ही टोकते हुए कहा कि ऐसा नहीं होगा। वहीं सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने बताया कि नाम संबंधी विसंगतियों के कारण सीमित समय का एक बड़ा हिस्सा बर्बाद हो रहा है और मतदाताओं को गंभीर असुविधा हो रही है। मुख्य न्यायाधीश ने भारत निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी से पूछा कि कुछ विसंगतियां स्थानीय बोलियों और उच्चारण में भिन्नता के कारण उत्पन्न होती हैं और इस तरह की समस्याएं पूरे देश में होती हैं।

ममता का आरोप- सिर्फ नाम हटाने के लिए हो रहा SIR का इस्तेमाल
इस दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि वह ठोस उदाहरण दे रही हैं और प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित तस्वीरें भी दिखा सकती हैं। उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया का उपयोग केवल नाम हटाने के लिए किया जा रहा है। उदाहरण देते हुए, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि जब कोई बेटी शादी के बाद अपने ससुराल जाती है, तो सवाल उठते हैं कि वह अपने पति का उपनाम क्यों इस्तेमाल कर रही है। उनके अनुसार, ऐसी कई महिलाओं के नाम एकतरफा तरीके से मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि फ्लैट खरीदने या निवास स्थान बदलने वाले गरीब लोगों के नाम भी हटाए जा रहे हैं। सीएम ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि इन परिस्थितियों के बावजूद, अधिकारी ऐसे मामलों को 'गलत मानचित्रण' बताकर अदालत के पूर्व निर्देशों का उल्लंघन कर रहे हैं।

बंगाल को निशाना बनाया जा रहा, हमें न्याय नहीं मिल रहा- ममता 
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अदालत को बताया कि इस अदालत के आधार कार्ड को मान्यता देने के निर्देश के बाद बंगाल के लोगों को राहत मिली है। उन्होंने बताया कि अन्य राज्यों में निवास प्रमाण पत्र और जाति प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज स्वीकार किए जाते हैं, जबकि चुनाव की पूर्व संध्या पर केवल बंगाल को ही निशाना बनाया जा रहा है। सीएम ममता बनर्जी ने सर्वोच्च न्यायालय से कहा कि वह इसी राज्य की निवासी हैं और न्यायालय की इस दयालुता के लिए आभारी हैं। उन्होंने कहा कि जब न्याय 'बंद दरवाजों के पीछे पुकार रहा होता है', तो ऐसा लगता है कि कहीं भी न्याय नहीं मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने न्यायालय को सूचित किया कि चुनाव आयोग को छह पत्र लिखे जा चुके हैं। स्वयं को बंधुआ मजदूर बताते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वह किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि एक व्यापक उद्देश्य के लिए लड़ रही हैं।

'नाम हटाने के लिए भाजपा शासित राज्यों से सूक्ष्म पर्यवेक्षकों की हुई नियुक्ति'
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि मतदाता पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को प्रभावी रूप से उनके अधिकार छीन लिए गए हैं, भाजपा शासित राज्यों से सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को नामों को हटाने के लिए नियुक्त किया गया है। उन्होंने दावा किया कि ये सूक्ष्म पर्यवेक्षक बिना उचित सत्यापन के कार्यालयों में बैठे-बैठे ही नाम हटा रहे हैं। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि फॉर्म 6 भरने की अनुमति नहीं दी गई है, जिसके परिणामस्वरूप लाखों नाम हटा दिए गए हैं। उनके अनुसार, कई जीवित व्यक्तियों को गलत तरीके से मृत घोषित कर दिया गया है। उन्होंने इन कार्रवाइयों को महिला विरोधी बताया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि 58 लाख नाम काट दिए गए, उनके पास अपील करने का विकल्प नहीं था। केवल बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है - पश्चिम बंगाल के लोगों को कुचलने के लिए। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि शायद अधिकारियों की उपलब्धता के बाद सूक्ष्म पर्यवेक्षकों की आवश्यकता नहीं होगी। इस पर चुनाव आयोग से मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अपने अधिकारियों को भी बताएं कि वे संवेदनशील रहें और नोटिस जारी न करें...

ममता ने चुनाव आयोग को 'व्हाट्सएप आयोग' कहा
सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को 'व्हाट्सएप आयोग' कहा और कहा कि चुनाव आयोग व्हाट्सएप के माध्यम से अनौपचारिक आदेश जारी कर रहा था। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस दौरान कहा कि चार राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, 24 साल बाद, तीन महीने में यह सब करने की क्या जल्दी थी? जब फसल कटाई का मौसम चल रहा है...जब लोग यात्रा कर रहे हैं...100 से अधिक लोग मारे गए! बीएलओ की मौत हो गई, कई लोग अस्पताल में भर्ती हैं। एसआईआर असम क्यों नहीं किया जा रहा है? मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आगे कहा कि 58 लाख नाम काट दिए गए, उनके पास अपील करने का विकल्प नहीं था। केवल बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है - पश्चिम बंगाल के लोगों को कुचलने के लिए। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि शायद अधिकारियों की उपलब्धता के बाद सूक्ष्म पर्यवेक्षकों की आवश्यकता नहीं होगी। इस पर चुनाव आयोग से मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अपने अधिकारियों को भी बताएं कि वे संवेदनशील रहें और नोटिस जारी न करें...

बंंगाल SIR पर 9 फरवरी को सुनवाई, सीएम ने जताया आभार
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि एक व्यावहारिक समाधान निकाला जा सकता है और निर्देश दिया कि सोमवार तक राज्य को ग्रुप बी के उन अधिकारियों की सूची प्रस्तुत करनी चाहिए जिन्हें कार्यमुक्त किया जा सकता है और उपलब्ध कराया जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश ने दोनों याचिकाओं पर नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान, सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि एक अन्य याचिका भी है जिसमें भारत निर्वाचन आयोग पहले ही हलफनामा दाखिल कर चुका है और उसमें उठाए गए मुद्दे वर्तमान मामले से संबंधित होंगे। मुख्य न्यायाधीश ने निर्देश दिया कि उक्त मामले पर भी सोमवार को सुनवाई की जाए और कहा कि न्यायालय उस दिन इससे संबंधित सभी मुद्दों पर सुनवाई करेगा। सीएम ममता बनर्जी ने न्यायालय से जनता के अधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया और पीठ के प्रति आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ को बहस का अवसर देने के लिए शुभकामनाएं दीं और सर्वोच्च न्यायालय से लोकतंत्र को बचाने का आग्रह किया।


ECI के SIR से जुड़े आदेश रद्द करने की मांग
अपनी याचिका में, प्रशिक्षित अधिवक्ता ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग द्वारा 24 जून, 2025 और 27 अक्तूबर, 2025 को जारी किए गए सभी एसआईआर संबंधी आदेशों और उनसे जुड़े सभी निर्देशों को रद्द करने की मांग की थी। उन्होंने चुनाव आयोग को आगामी विधानसभा चुनाव अपरिवर्तित 2025 मतदाता सूची के आधार पर कराने का निर्देश देने के लिए परमादेश याचिका भी दायर की थी। उनका तर्क है कि एसआईआर का 2002 की आधारभूत सूची पर निर्भरता और इसकी कठिन सत्यापन प्रक्रिया वास्तविक मतदाताओं के मतदान अधिकारों के लिए खतरा है।

सुप्रीम कोर्ट पहुंची सीएम ममता बनर्जी

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