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Hindi News ›   India News ›   Supreme Court closes all proceedings arising out of 2002 Gujarat Riots

Gujarat Riots: गुजरात दंगे से जुड़े सभी मामले बंद, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Tue, 30 Aug 2022 12:34 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Tue, 30 Aug 2022 12:34 PM IST
सार

27 फरवरी 2002 को गुजरात में स्थित गोधरा शहर में एक कारसेवकों से भरी रेलगाड़ी में आग लगाने से 59 यात्री मारे गए थे। जिसके परिणामस्वरूप गुजरात में 2002 के दंगे हुए।  

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Supreme Court closes all proceedings arising out of 2002 Gujarat Riots
supreme court, सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ani

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात में 2002 के दंगों से जुड़े सभी मामले बंद कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष याचिकाओं का एक बैच लंबित था। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि समय बीतने के साथ मामले अब निष्फल हो गए हैं। 9 में से 8 मामलों में ट्रायल खत्म हो गया है और गुजरात के नरोदा गांव एक मामले में अंतिम बहस चल रही है।

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जानें कब और क्यों हुआ गुजरात दंगा 
27 फरवरी, 2002 को  गुजरात के गोधरा में एक ट्रेन को उपद्रवियों ने आग लगा दी थी। ट्रेन की बोगी में सवार 59 लोग जलकर मर गए थे, इसमें ज्यादातर अयोध्या से लौट रहे कारसेवक थे। इस घटना के बाद गुजरात में दंगा भड़क उठा था। इस मामले को लेकर केंद्र सरकार ने एक कमिशन नियुक्त किया था, जिसका मानना था कि यह महज एक दुर्घटना थी। इस निष्कर्ष से बवाल खड़ा हो गया और कमिशन को असंवैधानिक घोषित कर दिया गया। इस मामले में 28 फरवरी, 2002 को 71 दंगाई गिरफ्तार किए गए थे। गिरफ्तार  लोगों के खिलाफ आतंकवाद निरोधक अध्यादेश (पोटा) लगाया गया। फिर 25 मार्च 2002 को सभी आरोपियों पर से पोटा हटा लिया गया।
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2005 से 2011 तक की टाइमलाइन
17 जनवरी 2005 को यूसी बनर्जी समिति ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया कि गोधरा कांड महज एक ‘दुर्घटना’थी। फिर 13 अक्टूबर 2006 को गुजरात हाई कोर्ट ने  यूसी बनर्जी समिति को अवैध और असंवैधानिक करार दिया क्योंकि नानावटी-शाह आयोग पहले ही दंगे से जुड़े सभी मामले की जांच कर रहा है। वहीं 26 मार्च 2008 को सुप्रीम कोर्ट ने गोधरा कांड और फिर हुए दंगों से जुड़े 8 मामलों की जांच के लिए विशेष जांच आयोग बनाया। 18 सितंबर 2008 को नानावटी आयोग ने गोधरा कांड की जांच सौंपी। इसमें कहा गया कि यह पूर्व नियोजित षड्यंत्र था। फिर 22 फरवरी 2011 को विशेष अदालत ने गोधरा कांड में 31 लोगों को दोषी पाया, जबकि 63 अन्य को बरी किया।
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कई याचिकाओं में भी हिंसा की सीबीआई जांच की मांग
एनएचआरसी, दंगा पीड़ितों की विशेष अनुमति याचिकाएं (एसएलपी), एनजीओ सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस की रिट याचिकाओं में फरवरी, 2002 के गोधरा कांड के बाद गुजरात में हुई हिंसा की जांच सीबीआई को स्थानांतरित करने की मांग की गई थी।


सीतलवाड़ की जमानत अर्जी पर सुनवाई कल
सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ की जमानत अर्जी पर सुनवाई बृहस्पतिवार तक टाल दी। तीस्ता को गुजरात दंगा मामले में बेगुनाहों को गुनहगार साबित करने के लिए साक्ष्यों से छेड़छाड़ के मामले में गिरफ्तार किया है। सीजेआई यूयू ललित की पीठ पहले मंगलवार दोपहर 3:45 बजे इस मामले को सुनने वाली थी लेकिन बाद में सुनवाई 1 सितंबर को करने का फैसला किया। 

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