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सुप्रीम कोर्ट : जस्टिस एनवी रमना होंगे अगले प्रधान न्यायाधीश! सीजेआई बोबड़े ने की सिफारिश

Wed, 24 Mar 2021 12:25 PM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Wed, 24 Mar 2021 12:25 PM IST
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Supreme Court: CJI SA Bobde sends a letter to Central government  recommending  NV Ramana as the next CJI
प्रधान न्यायाधीश एसए बोबड़े - फोटो : Twitter

सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठ जज एनवी रमना देश के अगले प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) हो सकते हैं। मौजूदा प्रधान न्यायाधीश एसए बोबड़े ने अपने उत्तराधिकारी के तौर पर जस्टिस रमना के नाम की सिफारिश की है। बता दें कि सीजेआई बोबड़े 23 अप्रैल को रिटायर हो रहे हैं। अगर केंद्र सरकार बोबड़े की सिफारिश मान लेती है, तो 24 अप्रैल को जस्टिस रमना शपथ लेंगे।

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भारत के प्रधान न्यायाधीश एसए बोबड़े ने अपने उत्तराधिकारी और देश के 48वें प्रधान न्यायाधीश के तौर पर न्यायमूर्ति एनवी रमना के नाम की सिफारिश की है। सूत्रों ने बताया कि भारत के प्रधान न्यायाधीश ने वरिष्ठता क्रम के नियमों का पालन करते हुए यह सिफारिश की है। सूत्रों ने बताया कि भारत के प्रधान न्यायाधीश बोबड़े 23 अप्रैल को सेवानिवृत्त हो जाएंगे। उन्होंने अपनी सिफारिश सरकार के पास भेजी है और इसकी एक प्रति न्यायमूर्ति रमना को भी सौंपी है। 
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गौरतलब है कि नियमों के मुताबिक, मौजूदा सीजेआई अपनी सेवानिवृत्ति के एक महीने पहले, अपने उत्तराधिकारी को लेकर एक सिफारिश भेजते हैं। न्यायमूर्ति रमणा 24 अप्रैल को भारत के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर पदभार संभाल सकते हैं। वह 26 अगस्त 2022 में सेवानिवृत्त होंगे।

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आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के पहले ऐसे जज जो बनेंगे सीजेआई
सरकार के प्रस्ताव स्वीकार करने के बाद 24 अप्रैल को जस्टिस रमना नए मुख्य न्यायाधीश का पद संभाल सकते हैं। ऐसा हुआ तो वह आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के पहले ऐसे जज होंगे जो सीजेआई बनेंगे।  

जानिए जस्टिस रमना का अब तक का सफर
जस्टिस रमना का जन्म 27 अगस्त 1957 को आंध्रप्रदेश के कृष्णा जिले के पोन्नवरम गांव में हुआ था। 10 फरवरी 1983 को उन्होंने वकालत की शुरुआत की। 27 जून 2000 को वे आंध्रप्रदेश के हाईकोर्ट में स्थायी जज के तौर पर नियुक्त किए गए। जस्टिस रमना को फरवरी 2014 में सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया था। रमना के नाम कई बड़े ऐतिहासिक फैसले भी हैं...

1.जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट के निलंबन पर तत्काल समीक्षा करने का फैसला सुनाया था।
2.सीजेआई के ऑफिस को आरटीआई के दायरे में लाने का फैसला दिया था।
3.किसी घरेलू महिला के काम का मूल्य उसके ऑफिस जाने वाले पति से कम नहीं है।
 

जस्टिस रमना के खिलाफ आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री की शिकायत खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस एनवी रमना के खिलाफ आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की शिकायत को खारिज कर दिया है। रेड्डी ने चीफ जस्टिस एसए बोबडे से शिकायत की थी कि जस्टिस रमना राज्य की न्यायपालिका को प्रभावित करने और राज्य सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं।

शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर बयान जारी कर कहा गया कि रेड्डी की शिकायत को खारिज कर दिया गया है। इन हाउस प्रक्रिया के तहत पूरी तरह से विचार करने के बाद शिकायत को खारिज किया गया है। इन हाउस प्रक्रिया के तहत विचार किए जाने वाले मामले पूरी तरह से गोपनीय होते हैं, लिहाजा इन्हें सार्वजनिक नहीं किया जाता।

पिछले साल 6 अक्तूबर को रेड्डी ने ने चीफ जस्टिस बोबडे को शिकायत में कहा था कि जस्टिस रमना राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों में हाईकोर्ट के जजों पर सरकार के खिलाफ आदेश पारित करने का दबाव डाल रहे हैं। रेड्डी ने बाकायदा ऐसे कुछ मामलों के उदाहरण भी दिए थे। रेड्डी से सचिव बाद में शिकायत को सार्वजनिक कर दिया था।

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