{"_id":"61cb8e8b347b747ad0583629","slug":"supreme-court-cji-nv-ramana-said-state-government-should-decide-to-have-libraries-in-every-school-and-college","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुझाव: सीजेआई बोले- राज्य सरकार तय करें हर स्कूल व कॉलेज में हों पुस्तकालय","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
सुझाव: सीजेआई बोले- राज्य सरकार तय करें हर स्कूल व कॉलेज में हों पुस्तकालय
Wed, 29 Dec 2021 03:54 AM IST
ओम. प्रकाश
एजेंसी हैदराबाद
एजेंसी हैदराबाद
Published by: ओम. प्रकाश
Updated Wed, 29 Dec 2021 03:54 AM IST
सार
सरकार को इस मुद्दे में शामिल होकर समाधान पर जोर देना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार की जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि सरकार को गांव में भी पुस्तकालय की व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए और उनके लिए अनुदान की भी व्यवस्था हो।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) एनवी रमना ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करें कि हर स्कूल व कॉलेज में एक पुस्तकालय और खेल के मैदान की व्यवस्था हों। ताकि छात्रों का अच्छे से विकास हो सके। हैदराबाद पुस्तक मेला में पहुंचे सीजेआई रमना ने कहा कि पुस्तक पढ़ना एक अच्छी आदत है जिससे दिमाग विकसित होता है। वहीं खेलने से बच्चों में खेल के प्रति रूचि भी बढ़ती है। जहां कहीं भी स्कूल या कॉलेज खुल रहे हैं तो उसमें पुस्तकालय जरूर होना चाहिए, लेकिन इस नियम का कोई भी पालन नहीं कर रहा है।
विज्ञापन
ठीक यहीं स्थिति खेल के मैदान को लेकर भी है। यह एक गंभीर मुद्दा है। सरकार को इस मुद्दे में शामिल होकर समाधान पर जोर देना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार की जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि सरकार को गांव में भी पुस्तकालय की व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए और उनके लिए अनुदान की भी व्यवस्था हो।
विज्ञापन
सीजेआई रमना ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी जब जेलों में बंद थे तो उन्होंने बहुत सारी किताबें पढ़ीं और लिखीं भी। पढ़ाई के कारण ही दुनिया भर के साहित्यकारों व लेखकों ने संघर्ष करके महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। उन्होंने कहा कि मैं खुद मैक्सिम गोर्की का उपन्यास मदर कई बार पढ़ चुका हूं और बिना प्रभावित हुए नहीं रह सका।
विज्ञापन